लोकसभा चुनाव से पहले जल्दबाजी में लाया गया सीएए: अभिषेक
टीएमसी नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी लोकसभा चुनाव से पहले सीएए नियमों को अधिसूचित करने को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में लाए गए इस कानून के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।
टीएमसी के सूत्रों ने बताया कि बंद कमरे में एक बैठक के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आश्चर्य है कि जब कानून 2019 में पारित किया गया तो नियम बनाने में पांच साल क्यों लग गए। उन्होंने कहा कि अब लोकसभा चुनाव से पहले इसे जल्दबाजी में लाया गया है।
सपा सांसद एसटी हसन ने भी भाजपा सरकार के सीएए लागू करने पर कहा कि 'यह सिर्फ लोगों को भ्रमित करने की रणनीति है। हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है कि लोगों को नागरिकता दी जाए, लेकिन इसे धर्म के आधार पर क्यों वर्गीकृत किया गया है? अहमदिया मुस्लिमों को इन देशों में प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। ऐसे में सरकार को सभी प्रताड़ित वर्गों को नागरिकता देनी चाहिए। सीएए सिर्फ एनआरसी का आधार है, जहां लोगों को ये घोषित करना पड़ेगा कि वे भारतीय हैं।'
सीएए लागू होने के बाद दिल्ली पुलिस समेत सभी राज्यों की पुलिस अलर्ट है। दिल्ली पुलिस की रैपिड एक्शन फोर्स ने मंगलवार को राजधानी के विभिन्न इलाकों में फ्लैग मार्च भी निकाला।
शिवसेना (यूबीटी) ने सीएए लागू करने की टाइमिंग पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनाव के चलते यह कदम उठाया गया। शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दूबे ने कहा कि 'अगर आप कानून लाना चाहते हैं तो आपके पास 10 साल थे, जब आचार संहिता लागू करने में 2-4 दिन का समय रह गया है तो आप कानून लेकर आ रहे हैं। आगे चुनाव हैं, तभी ये सब किया जा रहा है।'
असम कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष मीरा बोर्थकुर ने कहा कि 'हम धार्मिक तुष्टीकरण के खिलाफ हैं। असम के लोग सीएए का समर्थन नहीं करेंगे और वह लोकसभा में सरकार के खिलाफ वोट करेंगे।'
सुप्रीम कोर्ट में सीएए कानून के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की तरफ से दायर की गई है, जिसमें सीएए कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में नागरिकता संशोधन कानून 2019 के प्रावधानों को देश में लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि नागरिकता कानून के तहत कुछ धर्मों के लोगों को ही नागरिकता दी जाएगी, जो संविधान का उल्लंघन है।
पश्चिम बंगाल से भाजपा विधायक शंकर घोष ने सीएए लागू होने पर कहा कि 'भाजपा ने पहले ही इसका एलान कर दिया था। लोग इन्हीं एजेंडों पर वोट करते हैं। सीएए और कुछ नहीं बल्कि संविधान के तहत भारतीय नागरिकता देने का दस्तावेज है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। टीएमसी ऐसी पार्टी है, जो घुसपैठियों का समर्थन करती है।'
सीएए कानून के तहत भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक तौर पर प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई वर्ग के लोगों को ही भारत की नागरिकता दी जाएगी। सीएए में किसी की नागरिकता छीनने का प्रावधान है। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कानून उनके साथ भेदभाव करता है, जो देश के संविधान का उल्लंघन है।
असम के विपक्ष के नेता और कांग्रेसी नेता देबब्रत सैकिया ने कहा कि 'केंद्र ने सीएए पूरे देश में लागू कर दिया है। हमारी मांग है कि असम में सीएए को लागू न किया जाए क्योंकि यहां पहले से असम समझौता लागू है। सीएए कानून के मुताबित 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी और वे यहां जमीन और संपत्ति खरीद सकते हैं। यह असम समझौते के खिलाफ है।'
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने सीएए नोटिफिकेशन जारी होने का स्वागत किया और कहा कि 'यह बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था। इस कानून को लेकर मुस्लिमों में बहुत गलतफहमी है। इस कानून का मुस्लिमों से कोई लेना-देना नहीं है। पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का कोई प्रावधान नहीं था। यही वजह है कि ये कानून बनाया गया। देश के करोड़ों मुसलमान इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे और इससे किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। बीते वर्षों में गलतफहमी की चलते विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ राजनेताओं ने मुस्लिमों में गलतफहमी को बढ़ावा दिया और देश के हर मुसलमान को इस कानून का स्वागत करना चाहिए।'
असम में भी सीएए का विरोध तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीएए लागू करने के एलान के बाद असम स्टूडेंट यूनियन ने 30 अन्य स्थानीय संगठनों के साथ सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने विरोध स्वरूप सीएए कानून की प्रतियां जलाईं। असम में 16 पार्टियों के संयुक्त विपक्षी फोरम ने मंगलवार को राज्य में हड़ताल का एलान किया है।