फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025: ममता कालिया और मेमचौबी 'आकाशदीप' से सम्मानित; उस्ताद शुजात हुसैन खान ने बांधा समां

Wed, 11 Feb 2026 07:42 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 का आयोजन दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत किया।
विज्ञापन
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शब्दों की महान परंपरा के सतत सम्मान और श्रेष्ठतम सृजन को रेखांकित करते हुए इस बार शब्द सम्मान का सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' हिंदी में ममता कालिया और मणिपुरी में अरमबम ओंगबी मेमचौबी को दिया जा रहा है। इसके साथ ही श्रेष्ठ कृति सम्मान सविता सिंह (कविता), नाइश हसन (कथेतर), शहादत (कथा), सुजाता शिवेन (भाषाबंधु) और श्रेष्ठ पहली कृति के लिए मनीष यादव को दिया जा रहा है। यह अलंकरण समारोह आज यानी 11 फरवरी, 2026 को दिल्ली में प्रख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान के मुख्य आतिथ्य में हो रहा है।

विज्ञापन

आकाशदीप सम्मान 2025

सर्वोच्च सम्मान आकाशदीप (हिंदी): विख्यात कथाकार ममता कालिया 
कृति: जीवन की बेचैनी

आकाशदीप सम्मान 2025

सर्वोच्च सम्मान आकाशदीप (हिंदी): प्रख्यात साहित्यकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी
कृति: धारा के विरुद्ध

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

श्रेष्ठ कृति सम्मान (संग्रह): सविता सिंह
संग्रह: 'वासना एक नदी का नाम है'

श्रेष्ठ कृति सम्मान (कथेतर वर्ग): नाइश हसन 
कृति: 'मुताह'

श्रेष्ठ कृति सम्मान (कथा वर्ग): शहादत 
संग्रह: 'कर्फ्यू की रात'

 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

श्रेष्ठ कृति सम्मान (थाप): मनीष यादव (पहली किताब)
कृति: 'सुधारगृह की मालकिनें' 

श्रेष्ठ कृति सम्मान (थाप): सुजाता शिवेन (भाषा-बंधु)
कृति: 'चरु चीवर और चर्या

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

प्रख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान और उनकी टीम मंच पर पहुंच चुकी है। 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। मंच पर मुख्य अतिथि और जूरी का पुष्प गुच्छ के साथ स्वागत किया गया। 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला समूह के समूह सलाहकार यशवंत व्यास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, रूहों को जोड़ने और शाम को हल्का मूड देने के लिए आपका स्वागत है। यह सातवीं कड़ी है। सूरज का सातवां घोड़ा। कई बार ऐसा लगता है कि हम लोग, हर आदमी सूरज की किरण को कहीं अपने तरीके से चुराकर अपने भीतर के एक तहखाने में रख लेता है और जब भी उसे एक उष्मा की जरूरत होती है, वह उसी किरण को उठाता है, उससे फिर अपनी जिंदगी को उर्जावान बनाता है।

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी सम्मानित - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला शब्द सम्मान के सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से मणिपुरी की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को भी सम्मानित किया गया।

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

श्रेष्ठ कृति सम्मान 'छाप' 
'छाप' (कविता) के लिए सविता सिंह को सम्मानित किया गया। 
'छाप' (कथेतर) सम्मान नाइश हसन को दिया गया।
'छाप' (कथा) के लिए शहादत को सम्मानित किया गया।

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

मनीष यादव को उनकी पहली किताब के लिए 'थाप' श्रेष्ठ कृति सम्मान से सम्मानित किया गया।

आज शब्द पर सबसे बड़ा संकट: ममता कालिया

विख्यात कथाकार ममता कालिया ने अपने संबोधन में कहा, आकाशदीप सम्मान की प्रतिष्ठा से मैं भलीभांति अवगत हूं, क्योंकि मुझसे पहले श्रेष्ठ रचनाकारों को दिया जा चुका है। सबसे अच्छी बात है कि इस पूरे समारोह को जो नाम शब्द सम्मान दिया गया है। लगातार यह सोच रही थी कि आज सबसे बड़ा संकट शब्द पर ही आया हुआ है। शब्द की शक्ति कम होती जा रही है। चिह्नों और ध्ववियों की शक्ति बढ़ती जा रही है। शब्द सम्मान में सबसे बड़ी चीज यह है कि आप शब्द के प्रति सचेत, सजग और संवेदनशील बन रहे हैं। 

साहित्य से परिवर्तन बहुत धीमे-धीमे आता है: ममता कालिया

विख्यात कथाकार ममता कालिया ने अपने संबोधन में कहा, साहित्य से परिवर्तन बहुत धीमे-धीमे आता है। साहित्य का परिवर्तन और असर हम उस तरीके से नहीं देख सकते, जैसे दवाओं का असर हमारे शरीर पर होता है। तुरंत पता चल जाता है कि बुखार नीचे आ गया है। साहित्य में बुखार ठीक करने के लिए कई सदियां लग जाती हैं। 

बेहतर समाज की रचना का प्रयास करता है साहित्यकार: ममता कालिया

विख्यात कथाकार ममता कालिया ने कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए कहा, साहित्यकार का प्रयत्न यही रहता है कि वह किसी तरीके से एक बेहतर समाज की रचना करे। देखिए हम लोग तो कहानी लिखने वाले लोग हैं। कहानी कभी बन जाती है, कभी बिगड़ जाती है। लेखक को पता रहता है कि इसमें गांठ कहां पड़ गई, कहां यह थोड़ी ढीली है। आलोचक को देर में पता चलता है। जब आलोचक को पता चल जाता है, तब असली विचारों का मंथन होता है। अमर उजाला एकमात्र ऐसा अखबार है, जिसमें अभी साहित्य के लिए जगह है। 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

मणिपुरी भाषा में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए आकाशदीप 2025 से सम्मानित विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, मैं हिंदी थोड़ा जानती हूं। साहिर लुधियानवी शकील बदायूंनी को बहुत पसंद करती हूं। फिल्में बहुत पसंद है। एक अनुदित कविता सुनाऊंगी जिसे अर्जुन निराला ने अनुवाद किया। उन्होंने कविता 'मेरी प्यारी मां' का रचना पाठ किया। 
 
 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूँ कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। - उस्ताद शुजात हुसैन खान

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कहा, संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।

दर्शन देहो शंकर महादेव को सुरों में पिरोया

उस्ताद शुजात हुैसन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश 'दर्शन देहो शंकर महादेव' को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी।

तबले की थाप और सितार के सुरों से झूम उठा सभागार

कार्यक्रम में तबले की थाप और सितार के सुरों से धाराएं निकलीं और संगीत की नदी में एक हो गईं। इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट सभागार झूम उठा।

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं' को गाते हुए सितार वादन किया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सभागार झूम उठा।
 

उस्ताद शुजात हुसैन खान ने बांधा समां

उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में प्रस्तुति देकर समां बांधा। उन्होंने 'गजल का पहला शहर है, इतने हिस्से में बंट गया हूं मैं', 'आईना झूठ बोलता ही नहीं', 'बेहोशी नशा खुश्बू क्या-क्या न तुम्हारे सांसों में' जैसी गजलों के साथ प्रस्तुति दी। इस दौरान दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी जी ने आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, क्या गजल, क्या शे'र, क्या भजन, क्या सूफी गीत... आज शाम ऐसा कुछ नहीं बचा जो उस्ताद शुजात हुसैन की सितार और उनकी गायिकी से न निकला हो।

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 में उस्ताद शुजात हुसैन खान को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। 

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 के जूरी और विजेता-



 
विज्ञापन

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 के जूरी और विजेता-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें