अमर उजाला के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने सभी शब्द साधकों और विलक्षण साधकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने प्रख्यात संगीतज्ञ डाॅ. एन राजम का सम्मान किया।
समारोह में बनारस के होली गीतों की भी धुन गूंजी। इसके बाद उन्होंने वायलिन पर राग भैरवी की प्रस्तुति दी।
अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में वायलिन वादन से पद्मभूषण डॉ. एन. राजम, उनकी बेटी संगीता शंकर और उनकी पुत्री रागिनी शंकर भजन की प्रस्तुति दे रही हैं। कार्यक्रम में राग श्याम कल्याण के बाद मीरा के भजनों की प्रस्तुति हो रही है। उन्होंने पायो जी मैंने राम रतन धन पायो भजन की प्रस्तुति दी।
वायलिन वादक और एम राजन की बेटी संगीता शंकर ने कहा कि साहित्यकारों की जमघट में हमें आनंद आ रहा है। गोविंद जी ने एक बात कही थी कि अंधकार को देखने की जगह हम अपनी शम्मा जला दें। हमें पीढ़ियों को मूल्य देने होंगे। संगीता शंकर ने बताया कि पांच से 15 साल के बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा देने के उद्देश्य से उन्होंने एक पहल शुरू की है। इसके तहत बच्चों के लिए कविताओं को रागों में संगीतबद्ध कर गीत बनाए जा रहे हैं। इन गीतों के जरिये किसी न किसी नैतिक मूल्य का संदेश दिया जा रहा है। ऐसे 30 गीतों को अब तक संगीतबद्ध किया जा चुका है।
प्रख्यात संगीतज्ञ डॉ. एन. राजम ने राग श्याम कल्याण से वायलिन वादन की शुरुआत की।
प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम की संगीत प्रस्तुति शुरू हाे गई है। उनकी बेटी संगीता शंकर और उनकी पुत्री रागिनी शंकर भी प्रस्तुति दे रहीं हैं। तबले पर संगत पर बनारस घराने से अभिषेक मिश्र कर रहे हैं।
प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम ने कहा कि इस समारोह में भाग लेते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इतने बड़े बड़े लोगों को प्रत्यक्ष देखने का मौका मिला इसी से मैं सम्मानित हुई।
आकाशदीप सम्मान पाने वाले सितांशु यशश्चंद्र ने कहा कि आकाशदीप सम्मान के लिए अपनी मातृभाषा की तरफ से प्रसन्नता व्यक्त करता हूं। मातृभाषा क्या है और वो मेरी कैसे बनी? भाषा चाहें जो हो प्रत्येक का मातृत्व क्या है? एक युवती जब मां बनती है तो युवती से मां बन जाती है। वह व्यापक मानव संबंधों को जन्म देती है। वैसे ही एक भाषा जब एक साहित्य को जन्म देती है जैसे गुजराती हिन्दी उड़िया आदि तो गत समय में साहित्य को जन्म देने लगी, तो समस्त भाषा कुल में एक हलचल मच जाती है, भले ही दिखे नहीं। भाषा मातृ भाषा कब बनती है। गुजरात में हेमचंद्र ने गुजराती राजस्थानी मिला कर अनुशासन ट्राई लिखी थी। उन्होंने कहा कि सर्व भाषा परिणिता: ऐसी भाषा जो और सरल भाषाओं में परिणत हो सके। हेमचंद कहते हैं कि हमारी भाषा हमारा कारागार नहीं बनना चाहिए, बल्कि पंख बने। उन्होंने कहा कि एक अमेरिकी कवयित्री अंडे का व्यापार करती थी एक रोज जब उसने अंडे को उठाना चाहा तो उसमें एक बच्चा उड़ना चाह रहा था। ऐसे ही कवि के अंदर भी हलचल होती है। साहित्यकार का कर्म है कि जब तक प्रत्येक व्यक्ति की मातृभाषा मानव भाषा न बने तब तक हमें साहित्य का सृजन करना चाहिए, कविता कहते रहना चाहिए।
आकाशदीप सम्मान पाने वाले साहित्यकार गोविंद मिश्र ने कहा कि लेखकों को जानने का सबसे अच्छ तरीका उन तक रचनाओं के माध्यम से पहुंचना है। शब्दों के मार्फत रचनाकार तक पहुंचना। मनुष्य की स्थिति आज गाजर मूली जैसी हो गई है, युद्ध को रोकने के बजाय खनिज पर लोगों की नजर है। शब्दों के अर्थ धुंधले और उल्टे सीधे हो रहे हैं। शब्द, धर्म, साहित्य, प्रेम, कर्म इनके मायने क्या हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपने गुरुजनों की याद आती है जिन्होंने मुझे पढ़ाई और फिर साहित्य से जोड़ा। मैं उनका अनुग्रही हूं। उन्होंने कहा कि इन दिनों धर्म के बारे में काफी कन्फ्यूजन है। लेकिन तुलसीदास ने बताया कि परहित सरस धर्म नहीं भाई। साहित्य और कर्म की भी परिभाषाएं हैं। उन्होंने अहमद फ़राज़ का एक शेर पढ़ा कि शिकवा ए जुल्मत ए शब से तो कहीं बेहतर था, कि अपने हिस्से के की कोई शम्मा जलाते जाते। उन्होंने कहा कि लेखन एकांत में पढ़ा जाता है तो आपकी आत्मा से संवाद करता है। संसार में जो कष्ट है उसे झेलने की ताकत देता है। सुंदरता ही संसार को बचाएगी। यानि अच्छाई ही संसार को बचाएगी।
अमर उजाला शब्द सम्मान में श्रेष्ठ कृतियों के लिए सम्मान पाने वाले साहित्यकार।
श्रेष्ठ अनुवाद 'भाषाबंधु' श्रेणी में सुभाष नीरव को तुम क्यों उदास हो के लिए सम्मानित किया गया।
छाप (कथेतर) में ध्रुव शुक्ल को वा घर सबसे न्यारा श्रेष्ठ कृति सम्मान से नवाजा गया।
थाप (पहली किताब) श्रेणी में किंशुक गुप्ता को ये दिल है कि चोर दरवाजा के लिए सम्मानित किया गया।
छाप (कविता) में ज्योति चावला को यह उनींदी रातों का समय है कृति के लिए सम्मान दिया गया।
श्रेष्ठ कृति के लिए छाप (कथा) में युगल जोशी अग्निकाल के लिए दिया गया।
विख्यात कवि व नाटककार सितांशु यशश्चंद्र को भी आकाशदीप सम्मान से नवाजा गया।
शब्द साधना का आकाशदीप गोविंद मिश्र को दिया गया। उनको प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम ने आकाशदीप सम्मान प्रदान किया।
कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथ डॉ.एन राजम और अन्य अतिथियों ने किया। इसके बाद साहित्यकारों का पुष्प गुच्छ के साथ सम्मान किया गया। अमर उजाला फाउंडेशन के यशंवत व्यास ने शब्द सम्मान की परिकल्पना साझा की। उन्होंने कहा कि 30 से ज्यादा वरिष्ठ लेखक सिर्फ निर्णायक के तौर पर हमारे साथ रहे हैं। सबसे अनूठी बात कि तीन पीढ़ी को एक साथ देख रहे हैं। पद्मभूषण डॉ. एन राजम को हम सुनेंगे। उन्हें, उनकी बेटी और उनकी बेटी को उनकी बेटी के साथ हम सुनेंगे।
कार्यक्रम में मंच पर सभी अतिथियों ने अपना स्थान लिया। इसके बाद राष्ट्रगान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह का आगाज हो गया है। कार्यक्रम की शुरुआत सभी निणार्यकों के डिजिटल वक्तव्य के साथ हुई। शब्द से संगीत की अनूठी संध्या शुरू हो गई है।
छाप (कविता) में ज्योति चावला को यह उनींदी रातों का समय है कृति के लिए सम्मान
छाप (कविता) में ज्योति चावला को यह उनींदी रातों का समय है कृति के लिए सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्त्री की दुनिया ने मुझे हमेशा आकर्षित किया है। स्त्री की दुनिया वास्तव में मेरे लिए विषयों का अंबार है। मेरे नए संग्रह ‘यह उनींदी रातों का समय है’ का मूल स्वर भी स्त्री कविता और राजनीतिक कविता ही है। समकालीन भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिवेश को प्रतिबिंबित करती ये कविताएं न केवल मेरे कवि मन की बेचैनी से उपजी हैं, बल्कि भविष्य में ये इस समय को जानने का माध्यम भी होंगी कि अपने समय से उपजीं बेचैनियों ने कैसे उनींदी रातों को जन्म दिया था।
छाप (कथेतर) में ध्रुव शुक्ल को वा घर सबसे न्यारा के लिए श्रेष्ठ कृति सम्मान
छाप (कथेतर) में ध्रुव शुक्ल को वा घर सबसे न्यारा के लिए श्रेष्ठ कृति सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम उस पीढ़ी के लोग हैं, जिन्होंने कुमार गंधर्व के संगीत की पुनर्नवा हुई आंदोलित काया को अपने हृदयप्रांत के बसाव में अनुभूत किया है। लकदक संगीतकारों की दुनिया में उनकी सादगी अलग दिखती थी, जिन्होंने संगीत घरानों में चली आ रही संगीत शिक्षा की विधियों और उनके रूढ़ अभ्यास पर अनेक प्रश्न उठाए और स्वयं उनके सटीक उत्तर भी खोजे हैं। वे शास्त्रीय संगीतकारों की नई पीढ़ी को लोक संगीत की उस भूली हुई पगडंडी की याद दिलाते रहे, जिस पर चले बिना संगीत में नवनिर्माण करना कठिन है।
छाप (कथा) में युगल जोशी को अग्निकाल के लिए श्रेष्ठ कृति सम्मान
अमर उजाला शब्द सम्मान में छाप कथा में युगल जोशी को श्रेष्ठ कृति सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि लेखक बनना मेरे लिए एक ख्वाब था। इस ख्वाब का एक नन्हा पौधा मेरे अंतस में कहीं बड़ी शिद्दत से सरवाइव कर गया। चौराहे पर जिंदगी जब थी, तब ईमानदारी से इस सच को स्वीकार किया कि लिखने के अलावा मेरी और कोई सद्गति नहीं है। बस इतनी-सी कहानी है मेरे लेखक होने की। अग्निकाल में स्थान-स्थान पर माणिक में जो छटपटाहट दिखती है, जो उसकी जिजीविषा है, संघर्ष है, जो उसकी ‘नेवर से डाई स्पिरिट’ है, वह किसी अन्य रूप में मेरी जी हुई है या शायद हम सबकी जी हुई है।
पाठकों के लिए नए-नए पाठों का आविष्कार जरूरी: सितांशु यशश्चंद्र, विख्यात कवि व नाटककार
कवि या लेखक एक पेड़ की तरह होता है। वैसे देखें तो पेड़ों, पत्तियों, कांटों और फूलों के कई अलग-अलग प्रकार, रंग और सुगंध हैं, लेकिन वे सभी अपनी जड़ों में एक जैसे हैं, जो मिट्टी में पानी की तलाश करते हैं और उसे पाते हैं। बरसों बीतते रहते हैं। जीवन की सघनता का भरपूर अहसास नया-नया होता रहता है। इतनी सारी नई-नई वेदना, इतना सारा अभिनव आनंद! निरा विस्मय और नि:संशय ज्ञान एकरूप बन जाता है। शांत रस में सभी अन्य रस ढलते जाते हैं। इसी बीच एक कविता लिखी जाती है।
गुजराती में एक लेखक के रूप में मैं गुजराती बोलने वाले लोगों के व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में, जहां मेरी जड़ें हैं, जितना गहराई से उतरता हूं, उतना ही यह मुझे भारत और अन्य जगहों पर दूर-दराज के लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है। जितना अधिक मैं गुजराती बनता हूं, अंतर्ज्ञान और कड़ी मेहनत के माध्यम से, उतना ही अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बनता हूं।
अगर समकालीन भारतीय साहित्य को अपनी संभावनाओं को तलाशना और साकार करना है तो दो तरह के परस्पर संबंधित काम करने होंगे- इसके साहित्यिक अतीत को जानना, समझना और उसकी आलोचना करना और हमारे समकालीन सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ को जानना, समझना और उसकी आलोचना करना। इन सबसे बढ़कर पाठकों के लिए नए-नए पाठों का आविष्कार करना और उनका आनंद लेना। मैं अक्सर महसूस करता हूं कि यदि हम ईमानदारी से काम करें और अपने अतीत से प्रश्न पूछें तो यह भारतीय पौराणिक कथाओं में वर्णित समुद्र मंथन की तरह हमें अमृत और विष प्रदान कर सकता है तथा हमें स्वयं की देखभाल करने में सक्षम बना सकता है।
जिसने संवेदना के स्तर पर उद्वेलित किया, उन्ही पर लिखा : गोविंद मिश्र, प्रख्यात रचनाकार
जिसका जो अनुभव का क्षेत्र होता है, वह उस पर लिखता है। मुझे जिन चीजों ने संवेदना के स्तर पर उद्वेलित किया, मैंने केवल उन्हीं चीजों पर लिखा। सायास लेखन मुझसे न हो सका। इन दिनों साहित्य में चमत्कार करने वाले विषय, नए-नए शिल्प और चमत्कृत करने वाली भाषा का प्रयोग अधिक हो रहा है, पर विराटता और संवेदना की गहराई कम हुई है। समाज में भी बदलाव आया है। लोगों को कुछ भी प्रभावित नहीं करता। जिन लोगों पर आप अपने लिखे का असर देखना चाहते हैं, उनका मन आंदोलित नहीं होता, जबकि साहित्य सूक्ष्म है, जिसका असर तात्कालिक नहीं होता। हमने अपना धैर्य खो दिया है।
साहित्य के पास कोई जादू की छड़ी नहीं होती, पर समाज के स्तर पर वह उसे दिखाता है, जो समाज में अच्छा बचा है और व्यक्ति के तौर पर वह पाठक को आत्मबल देता है। लोग कहते हैं, साहित्य में भाषा की गिरावट हो गई है। मेरा मानना है कि भाषा की भावना महत्वपूर्ण है। वह असरकारी होती है। आज जो भाषा साहित्य में लिखी जा रही है, वह जटिल यथार्थ को पकड़ने वाली है। इसी कारण उसके आयाम अलग-अलग हैं। इसे मैं भाषा का विकास मानता हूं।
वैसे साहित्य और विमर्श, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। विमर्श को साहित्य के नाम पर नहीं चलाया जा सकता। विमर्श एक शॉर्टकट है, जबकि सर्जना का संबंध हृदय से होता है। किसी रचना में लेखक की संवेदना की तीव्रता और उसका खास ढंग से महसूस करना ही रचना को विशिष्ट बनाता है। सिर्फ यही निष्कर्ष है, जो साहित्य को दूसरे लेखन से अलग बनाता है।
अमर उजाला शब्द सम्मान के तहत वर्ष 2023 में प्रकाशित श्रेष्ठ हिंदी कृतियों के लिए भी शब्द सम्मान की घोषणा कर दी गई है। इसमें युगल जोशी, ध्रुव शुक्ल, ज्योति चावला, किंशुक गुप्ता और सुभाष नीरव को सम्मान से नवाजा जाएगा। इन सम्मानों में एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और गंगा प्रतिमा सम्मिलित हैं।
प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम आज अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत करेंगी। इस अवसर पर एन. राजम अपनी बेटी और सुपरिचित वायलिन वादक संगीता शंकर और अपनी नातिन रागिनी शंकर के साथ विशेष संगीत प्रस्तुति भी देंगी। कार्यक्रम नोएडा के सेक्टर 125 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के सभागार में शाम 5:30 बजे से शुरू होगा। सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप' हिंदी के प्रख्यात रचनाकार गोविंद मिश्र और गुजराती के विख्यात लेखक सितांशु यशश्चंद्र को दिया जाएगा।