कर्नाटक के कांग्रेस नेता बोले- खतरनाक बयान के कारण आपातकाल लगाना पड़ा
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर कर्नाटक के कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने कहा, 2014 में जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से एक काले युग की शुरुआत हुई है। जो लोग कभी 'काले दिन' की बात करते थे, वे खुद देश को बर्बाद करने की कोशिश में लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि 50 साल पहले पुलिस और सेना के विद्रोह वाला बयान किसने दिया था? बकौल हरिप्रसाद, यह इतना खतरनाक बयान था कि आपातकाल लगाना पड़ा।
गोवा के सीएम सावंत बोले- भाजपा के कारण बचा संविधान, कांग्रेस के दौर में खतरे में पड़ा
आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 50 साल पहले आपातकाल लगाया था। लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई थी, और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। अगर संविधान की रक्षा हुई है, तो यह भाजपा की वजह से ही हुआ है। जब भी संविधान खतरे में पड़ा है, तो इसका कारण कांग्रेस रही है।
कांग्रेस ने अत्याचारों के लिए माफी क्यों नहीं मांगी?
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी आपातकाल के 50 साल होने पर कहा, 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया गया था। आपातकाल के दौरान 1.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, मोरारजी देसाई, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 250 पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया था... उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आज तक आपातकाल के दौर में किए गए अत्याचारों के लिए माफी क्यों नहीं मांगी है, उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। भाजपा जनता को यही कड़वा सच बता रही है।
जब 25 वर्षीय नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गांधी की तानाशाही का विरोध किया...
आपातकाल लगाने के 50 साल पूरे होने पर भाजपा ने संविधान हत्या दिवस मनाने का एलान किया है। इस मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'देखिए ईश्वरीय न्याय कैसे होता है। एक 25 साल के लड़के (पीएम मोदी) ने इंदिरा गांधी की तानाशाही का विरोध किया...आज, उसी व्यक्ति ने 2014 में उस कारण (कांग्रेस) को उखाड़ फेंका जिसने आपातकाल लगाया था। वंशवाद की राजनीति...तानाशाही के खिलाफ संघर्ष करने वाला युवा अब इस देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कर रहा है। शाह ने यह टिप्पणी पीएम मोदी की किताब 'द इमरजेंसी डायरीज' को लेकर की।
शाह बोले- मोदी ने महज 24-25 साल की उम्र में गुजरात में संघर्ष का नेतृत्व किया
आपातकाल के 50 साल पूरे होने के मौके पर आज पीएम मोदी की किताब 'द इमरजेंसी डायरीज: ईयर दैट फोर्ज्ड आवर लीडर्स' का विमोचन हुआ। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, यह किताब पीएम मोदी की युवावस्था से जुड़ी घटनाओं के बारे में है। आपातकाल लागू किए जाने के समय वे एक युवा कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 19 महीने तक आंदोलन में भाग लिया... पीएम मोदी ने मीसा बंदियों के घर जाकर उनके इलाज की व्यवस्था की। उस समय बहुत सारे गुप्त समाचार पत्र प्रकाशित होते थे। पीएम मोदी ने उन समाचार पत्रों को बाजारों, छात्रों और महिलाओं के बीच वितरित किया और 24-25 साल की उम्र में गुजरात में संघर्ष का नेतृत्व किया... इस किताब में संघर्षों की पूरी कहानी है। प्रधानमंत्री मोदी ने साधु, सरदारजी, हिप्पी, अगरबत्ती या अखबार विक्रेता के रूप में जमीन पर काम किया।
लोकतंत्र की हत्या करने वाले दल के साथ RJD का गठबंधन कैसे?
आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, इस देश की जनता देख चुकी है कि लोकतंत्र की हत्या किसने की। पूरा देश समझ रहा है कि लोकतंत्र को नष्ट करने का जिम्मेदार कौन था। इसलिए जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए कदम उठाए। कांग्रेस पार्टी को इसका जवाब देना चाहिए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को भी बताना चाहिए कि वे लोकतंत्र की हत्या करने वाले दल के साथ गठबंधन कैसे कर रहे हैं। जयप्रकाश नारायण के मार्गदर्शन में राजनीति शुरू करने वाले लालू यादव अब कांग्रेस के पाले में जा चुके हैं।
कैबिनेट में आपातकाल पर प्रस्ताव पारित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आपातकाल पर प्रस्ताव पारित किया गया। कैबिनेट में शामिल मंत्रियों ने दो मिनट का मौन भी रखा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के साथ-साथ भाजपा को भी आड़े हाथों लिया है।
संविधान का गला घोंटने वाले अब इसके रक्षक बनने की कोशिश कर रहे हैं: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने संविधान का गला घोंटा था, वे आज इसके रक्षक बनने की कोशिश कर रहे हैं। आपातकाल के काले दिनों को नहीं भूलना चाहिए।
माकपा ने भाजपा को घेरा
सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी ने कहा, 'जब शाह आयोग की नियुक्ति की गई थी, तो उसने सही ढंग से बताया था कि यह इंदिरा गांधी द्वारा कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नहीं किए गए निर्णय के संबंध में एक गंभीर गलती और असंवैधानिक कार्य था। अब, इंदिरा गांधी द्वारा घोषित 21 महीनों के आपातकाल के बजाय, हमारे पास पीएम मोदी के तहत 11 साल का अघोषित आपातकाल है और उन्होंने उनसे तानाशाही के सबक सीखे हैं। अब, लोगों की जिम्मेदारी है कि वे पीएम मोदी द्वारा अपनाए जा रहे तानाशाही कदमों के खिलाफ एक व्यापक मंच विकसित करें।'
'इंदिरा गांधी अपनी कुर्सी बचाना चाहती थीं'
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आरएसएस और भाजपा नेता भुवनानंद त्रिपाठी, जो आपातकाल के दौरान जेल गए थे, ने कहा कि वह एक काला दौर था। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि इंदिरा गांधी अपनी कुर्सी बचाना चाहती थीं। कोई विदेशी आक्रमण नहीं हुआ था। देश में कोई अराजकता भी नहीं थी। उन्होंने खुद को बचाने के लिए आपातकाल लगाया। हम उस समय कॉलेज के छात्र थे। विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। उस दौरान सभी मौलिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे। संविधान की हत्या कर दी गई थी।