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UGC Bill Row Live: यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को मंजूरी, पढ़ें पल-पल की ताजा अपडेट

Wed, 28 Jan 2026 05:23 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

खास बातें

UGC Bill 2026 Controversy News Live: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जाति आधारित भेदभाव को कम करने और भारतीय परिसरों में समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पेश किए। सवर्ण समाज ने इन नियमों को अस्पष्ट या एकतरफा बताया है। देशभर में इन नियमों को वापस लेने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मामले पर लगातार छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
 
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यूजीसी विनयम, 2026 से जुड़े ताजा समाचार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स (X-@ugc_india)
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लाइव अपडेट

05:22 PM, 28-Jan-2026

क्या है यूजीसी?

यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC ka full form hindi mein), जिसे हिंदी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कहा जाता है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला एक वैधानिक निकाय है। यूजीसी का मुख्य काम देश में विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को व्यवस्थित करना, उसका समन्वय करना और गुणवत्ता बनाए रखना है। भारत में उच्च शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है। नालंदा, तक्षिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में एशिया के कई देशों से छात्र पढ़ने आते थे। ब्रिटिश काल में भी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए। एल्फिंस्टन, मैकाले और वुड जैसे अधिकारियों ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नींव रखी। आजादी से पहले ही भारत में एक केंद्रीय उच्च शिक्षा नियामक संस्था की जरूरत महसूस की जाने लगी थी।
  • 1944 में तैयार की गई सार्जेंट रिपोर्ट में पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान समिति बनाने की सिफारिश की गई।
  • 1945 में यूजीसी का प्रारंभिक गठन अलीगढ़, बनारस और दिल्ली विश्वविद्यालयों के लिए किया गया।
  • 1947 में इसे सभी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी मिली।
  • 1948 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग बना।
  • 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने यूजीसी का औपचारिक उद्घाटन किया।
  • बाद में नवंबर, 1956 में यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत इसे कानूनी दर्जा मिला और यह एक स्थायी वैधानिक संस्था बन गई।

01:45 PM, 28-Jan-2026

बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की प्रतिक्रिया

1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।

2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।

3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
 

11:53 AM, 28-Jan-2026

यूजीसी नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है। याचिका में नियम को गैर-समावेशी बताते हुए जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में उच्च शिक्षा से जुड़े कई अहम पहलुओं पर बहस होने की संभावना है।

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11:18 AM, 28-Jan-2026

राष्ट्रपति के नाम खून से लिखा पत्र 

मंगलवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने नगर पालिका परिसर स्थित शहीद स्तंभ पर धरना प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने इस कानून को वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम खून से पत्र लिखा और इसे एसडीएम ईला प्रकाश को सौंपा।

09:15 AM, 28-Jan-2026

अर्धनग्न प्रदर्शन और मशाल मार्च

यूजीसी एक्ट 2026 के खिलाफ श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। नाराज प्रदर्शनकारियों ने अर्धनग्न होकर परिवर्तन चौक पर घूम-घूम कर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस कानून को “काला कानून” बताया और इसे वापस लेने की मांग की।

अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो उन्होंने देशभर में आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह दीपू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हाथों में मशालें लेकर विधान भवन की ओर मार्च भी किया।
 

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07:23 PM, 27-Jan-2026

शिक्षा मंत्री का बयान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी 2026 के नए नियमों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा, 'मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा।'

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा देना है और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से इन्हें जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी देश भर में नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बहसों के बीच आई है, जिसमें समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
 

06:44 PM, 27-Jan-2026

यूपी के कई जिलों में प्रदर्शन तेज

यूजीसी के नए इक्विटी नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, संभल और कुशीनगर में छात्र व सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए तत्काल वापसी की मांग की। प्रशासन ने ज्ञापन केंद्र को भेजने की बात कही है।

05:36 PM, 27-Jan-2026

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र का बयान

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विधेयक 2026 के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान, छात्र अनुज त्रिपाठी ने कहा, 'हम इसका कड़ा विरोध करते हैं... यहां सभी जातियों के लोग पढ़ने आते हैं। अगर आप सिर्फ एक ही नजरिए से देखें, अगर आप यह मानते हैं कि सिर्फ उच्च जातियां ही दूसरों पर अत्याचार कर रही हैं, तो यह सच नहीं है। अगर यूजीसी का यह कानून पारित हो जाता है, तो हमारा आपसी स्नेह खत्म हो जाएगा क्योंकि लोग हमसे डरने लगेंगे। वे हमारे साथ बैठने या बातचीत करने से डरेंगे। हम भी उनसे डरेंगे, यह सोचकर कि 'अगर हम उनके साथ बैठें और वे अनजाने में हमें किसी विवाद में घसीट लें, तो हम क्या करेंगे?' हर किसी के परिवार की तरफ से दबाव होता है कि अगर किसी को गलत समझा जाए तो उससे संबंध तोड़ लें।'
 

05:25 PM, 27-Jan-2026

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

यूजीसी के नए कानून को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कई याचिकाकर्ताओं ने नए नियम को चुनौती देते हुए इसे संविधान और यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन बताया। याचिकाएं खास तौर पर इन नियमों के विनियम 3(सी) को लेकर दायर की गईं, जिसे याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, बहिष्कर करने वाला और भेदभावपूर्ण करार दिया है। अधिक पढ़ें...


यह भी पढ़ें: क्या है यूजीसी का इक्विटी कानून, क्यों हो रहा इसका विरोध? जानें पूरा मामला

05:22 PM, 27-Jan-2026

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया

04:46 PM, 27-Jan-2026

सपा सांसद राम गोपाल यादव की प्रतिक्रिया

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने यूजीसी के नए नियम पर कहा, 'यूजीसी ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने लोगों को हो रहे अन्याय के खिलाफ शिकायत करने का अवसर दिया है।'
 

03:59 PM, 27-Jan-2026

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के नियमों के निष्पक्ष कार्यान्वयन का आश्वासन दिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी 2026 के नए नियमों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा, 'मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा।'

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा देना है और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से इन्हें जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी देश भर में नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बहसों के बीच आई है, जिसमें समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
 

03:53 PM, 27-Jan-2026

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने विरोध में दिया अपने पद से इस्तीफा

यूजीसी के नए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026' से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और धरने पर बैठ गए।

03:49 PM, 27-Jan-2026

यूजीसी मुख्यालय के बाहर हो रहा विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यालय के बाहर छात्रों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

03:42 PM, 27-Jan-2026

यूजीसी के नियमों पर प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया

राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'भेदभाव को और बढ़ाकर आप उसका समाधान नहीं कर सकते। यूजीसी के दिशानिर्देशों ने भेदभाव को दूर करने के बजाय छात्र परिसरों में नफरत को और बढ़ा दिया है। शिक्षा मंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए।'
 

03:41 PM, 27-Jan-2026

कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया

03:34 PM, 27-Jan-2026

एमपी में विरोध प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के भोपाल में सामान्य जाति समुदाय के एक समूह ने यूजीसी द्वारा जारी नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा, 'एक ऐसा कानून बनाया जहां पर एक वर्ग को सदैव फायदा होने से अपराधी घोषित कर दिया जाए। हमारा संविधान कहता है कि यदि एक पीढ़ी ने अपराध किया है, तो अगली पीढ़ी को उसकी सजा नहीं मिलना चाहिए। पहले ही कानून (एससी/एसटी एक्ट) कम था, जो ब्लैकमेलिंग के लिए एक और नया कानून ला दिया, जहां पर शिक्षण संस्थान में ब्लैकमेलिंग का सबसे उत्तम हथियार दे दिया। एक वर्ग को अपराधी घोषित कर दिया और तीन वर्ग को पीड़ित घोषित कर दिया। इस तरह के कानून से शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव बढ़ जाएगा।'
 
 

03:33 PM, 27-Jan-2026

देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विरोध

नई दिल्ली , मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, अलवर, मधुबनी और अन्य क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि इन नियमों को सावधानीपूर्वक लागू किया जाए, तो ये समानता के ढांचे को मजबूत कर सकते हैं।

03:22 PM, 27-Jan-2026

सोशल मीडिया पर भी हो रहा विरोध

सोशल मीडिया पर #RollbackUGC जैसे हैशटैग चल रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है और समाज में जातिगत बंटवारा और बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने तो इन नियमों को ऑनलाइन 'यूजीसी का काला कानून' तक कह दिया है।

03:22 PM, 27-Jan-2026

प्रतिनिधित्व को लेकर जताई चिंता

इन नियमों के अनुसार, समानता समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई स्पष्ट प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है, जिससे शिकायतों की सुनवाई में असंतुलन हो सकता है।

03:21 PM, 27-Jan-2026

नियमों के गलत इस्तेमाल का सता रहा डर

नियमों में 'भेदभाव' की परिभाषा काफी खुली और अस्पष्ट बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कौन-सा व्यवहार गलत माना जाएगा। उन्हें डर है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है और बेगुनाह छात्रों पर झूठे आरोप लग सकते हैं।

03:16 PM, 27-Jan-2026

देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विरोध

जैसे ही इन नियमों की घोषणा हुई, वैसे ही देश के कई हिस्सों में छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध करने वालों का कहना है कि भले ही नियमों का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन इनमें कई गंभीर समस्याएं हैं।

02:56 PM, 27-Jan-2026

UGC Bill Row Live: यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को मंजूरी, पढ़ें पल-पल की ताजा अपडेट

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी, 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य ने नए नियम पेश किए। ये नियम पहले से चले आ रहे 2012 के नियमों की जगह लागू किए जाने हैं।

नए नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को समान अवसर केंद्र, समता समितियां, समता दल और भेदभाव संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए चौबीसों घंटे सातों दिन चलने वाली हेल्पलाइन स्थापित करना अनिवार्य है। यूजीसी के अनुसार, इसका उद्देश्य परिसरों को अधिक समावेशी बनाना और जाति आधारित भेदभाव से सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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