रेस्क्यू के दौरान श्रमिक देवनाथ को टनल से बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन के अनुसार, कुल 22 श्रमिकों में से 12 को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि आठ श्रमिकों की मौत हो चुकी है और दो श्रमिकों की तलाश जारी है। मंत्री ने टनल से पानी निकालने, मशीनरी और तकनीकी संसाधनों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने रेस्क्यू टीमों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और जल निकासी का काम तेज करने के निर्देश दिए। मदन कौशिक ने कहा कि सरकार रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को श्रमिकों के परिजनों को समय-समय पर सही और प्रमाणिक जानकारी देने के निर्देश भी दिए। मौके पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश समेत संबंधित अधिकारी और रेस्क्यू टीमों के सदस्य मौजूद रहे।
हाट-सियासैण, मायापुर स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों से इसकी प्रगति की जानकारी ली। मंत्री ने रेस्क्यू टीमों को सभी उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी का बेहतर समन्वय करते हुए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टनल में फंसे हर श्रमिक की जान बेहद महत्वपूर्ण है और सभी को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता है।
टीएचडीसी की 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना शुरुआत से ही विवादों में रही है। परियोजना निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों पर प्रभाव को लेकर ग्रामीण विरोध जताते रहे हैं। कुछ प्रभावित परिवार आज भी न्यायालय की शरण में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना निर्माण में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया और पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी हुई। वर्ष 2009 में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उनकी आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। वर्ष 2011 में हाट गांव के करीब 140 परिवारों को विस्थापित किया गया।
पीपलकोटी हादसे में सेना का बचाव अभियान जारी है। हादसे की जानकारी सामने आने के बाद ही बचाव कार्यों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित सेना की के-9 टुकड़ी और चिकित्सा दल ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान का मोर्चा संभाल लिया। हादसे में गायब तीन लोगों की तलाश का अभियान अब भी जारी है। विशेष उपकरणों की सहायता जवानों को सुरंग में करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर तक जाना पड़ा। इसमें करीब 300 मीटर का वह हिस्सा भी शामिल है जहां पानी का स्तर सीने तक था और अंदर बढ़ना बहुत कठिन था। इस कठिन रास्ते से अंदर पहुंचकर सेना के जवानों ने सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने में सफलता पाई।
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टेल रेस टनल में 13 अगस्त को हुई दुर्घटना के बाद टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने मृतकों और घायलों के लिए अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। कंपनी प्रत्येक मृतक श्रमिक के निकटतम परिजन को 5 लाख रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देगी। टीएचडीसीआईएल प्रबंधन ने हादसे में हुई जनहानि पर दुख जताते हुए दिवंगत श्रमिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। कंपनी ने कहा कि इस मुश्किल समय में वह प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
न्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को दिन में भी टनल में बड़ा मलबा आया, उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। घटना शाम को 5:40 बजे हो गई थी, मगर कंपनी की ओर से प्रशासन को हादसे की सूचना शाम 7 बजे दी गई। डेढ़ घंटे तक घायल तड़पते रहे। टनल के ठीक ऊपर जेसाल गांव है। गांव के धारी पिंगला पानी और जेसाल गदेरा टनल के ऊपर से बहते हैं। इन गदेरो के मुहाने पर कंपनी की ओर से लाखों मीट्रिक टन मक डंप किया गया है। जिससे यहां पानी जमा हो रहा था। इसी के ठीक नीचे यह टनल है। दो दिन तक धूप खिली रही, जिससे मक और पानी से गैस बन गई और यह हादसा सामने आया।
ने टनल के भीतर लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च अभियान जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान में शामिल सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम, नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जाए। बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र, डीआईजी राजकुमार नेगी ने राहत व बचाव कार्यों की जानकारी दी।
चमोली के एडीएम विवेक प्रकाश ने बताया कि पिपलकोटी टनल रेस्क्यू अभियान के दौरान आज एक शव बरामद किया गया है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान में सभी संबंधित एजेंसियां जुटी हुई हैं और अभियान परसों से लगातार चल रहा है। मौके पर एसडीआरएफ, एनडीएरएफ समेत अन्य एजेंसियां भी मौजूद हैं। एडीएम ने बताया कि टनल के अंदर दो अन्य शव भी मौजूद हैं, जिन्हें भी जल्द बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
चमोली में सुरंग में हुए हादसे के बाद निरीक्षण करने के बाद आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि टनल के भीतर पानी का स्तर अधिक होने के कारण रेस्क्यू अभियान में काफी दिक्कतें आ रही हैं। रेस्क्यू टीम के जवानों के गले तक पानी पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि टनल में फिलहाल पांच डिवाटरिंग पंप लगाए गए हैं। जिस गति से पानी बाहर निकाला जा रहा है, लगभग उसी गति से टनल के भीतर पानी का रिसाव हो रहा है। उन्होंने टीएचडीसी को डिवाटरिंग पंपों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
पीपलकोटी (मायापुर) में आपदा प्रभावित टनल का मंत्री मदन कौशिक आज स्थलीय निरीक्षण करेंगे। मंत्री मौके पर राहत और बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लेंगे। इसके बाद शाम 5 बजे जिला चिकित्सालय पहुंचकर उपचाराधीन घायलों से मुलाकात करेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि हादसे के बाद बचाव और खोज अभियान लगातार जारी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, फंसे 22 कर्मचारियों में से अधिकांश को रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि तीन लोगों की तलाश अभी जारी है।एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और उत्तराखंड सरकार का जिला प्रशासन मौके की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बचाव दल टनल में फंसे शेष लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान चला रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हादसे के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जरूरी सावधानियों का पता लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी निर्माण परियोजना में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
टनल में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू टीमें हालात का जायजा लेते हुए सुरक्षित तरीके से अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। प्रशासन और संबंधित बचाव एजेंसियां पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल बचाव दल का मुख्य फोकस टनल के अंदर फंसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। अभियान के दौरान टनल के भीतर की स्थिति और सुरक्षा को भी लगातार ध्यान में रखा जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आएगी।
हाट गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल और पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख पंकज हटवाल ने सुरक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे वाली टनल में पहले भी मलबा गिरने की घटनाएं हुई हैं। कंपनी प्रबंधन ने इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया। पिछले वर्ष हुए लोको ट्रॉली हादसे से भी सबक नहीं लिया गया। उन्होंने हादसे की स्वतंत्र समिति से जांच और प्रभावित परिवारों की चिंता की मांग की।
पीपलकोटी टनल हादसे में सात मृतक प्रदीप पंवार , मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर का शुक्रवार को जिला अस्पताल में पोस्ट मार्टम किया गया। जिसके बाद हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से शवों को उनके घरों को भेजने की व्यवस्था की गई। इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ अनुराग धनिक ने बताया कि भर्ती घायलों के स्वास्थ्य में सुधार है। डॉ दीपक और डॉ अमरीश के द्वारा एक घायल के पांव की सर्जरी की गई।