अमर उजाला के खास कार्यक्रम संवाद में पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह पहुंचे। उन्होंने भारतीय टीम के नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल से लेकर श्रेयस अय्यर की अनदेखी पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ट्रोलर्स को भी आड़े हाथ लिया और कहा- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।
सोशल मीडिया का दबाव है, कोई भी कहीं भी किसी के बारें में बात कर रहा है। इसको आप या आपके साथी खिलाड़ी कैसे झेलते हैं?
सोशल मीडिया एक ऐसा टूल है जिसके सहारे आप घर बैठकर किसी को भी कुछ भी बोल सकते हो। मैं देखता हूं कि कुछ लोग ऐसे हैं जिनका सिर्फ इतना काम है आओ, गाली दो और निकल जाओ। आपको पता है कि आपने ठीक काम किया है तो उनके लिए वो गाना बड़ा सही है कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। कहने दीजिये। अगर आप क्लियर हो दिल से क्लियर हो आपको पता है कि आपने अपना दृष्टिकोण सही रखा है तो रखिए। गाली देकर नहीं प्यार से रखिए।
हर किसी के पास ज्ञान है क्रिकेट का, हर कोई कुछ न कुछ कहना चाहता है, आपको भी लोग आकर बताते होंगे कि आपसे ये हुआ?
हर कोई बताता है। अरे ये छूट गया, अरे ऐसा होना चाहिए था। लेकिन ये बड़ा आसान है। विचार जरूरी हैं और मायने भी रखते हैं क्योंकि आप प्यार करते हो। लेकिन कभी कभार एक खिलाड़ी हारता है तो उसकी हार में कोई खड़ा नहीं होता है। बहुत कम लोग होते हैं जो उसकी हार में खड़े होते हैं, जो उसकी भावनाओं को समझ सकें। इसलिए आपकी बात जायज है, आप सवाल पूछिए, आप मेरी निंदा भी करें अगर मैं खराब खेल रहा हूं तो लेकिन कहीं न कहीं न हम सोशल मीडिया पर देखते हैं कि कभी कोई क्रिकेटर सही नहीं खेलता है तो उसकी फैमिली को खींचकर ले आते हैं। कि ये वहां पर पहुंची हैं, उनकी फैमिली को टार्गेट करना। मुझे लगता है कि ये गलत है। अगर मैं अच्छा नहीं खेल रहा हूं या कोई भी खिलाड़ी अच्छा नहीं खेल रहा है तो आप निंदा करें लेकिन उस तक सीमित रखें। खेल तक सीमित रखें साथ में ये सारी चीजें न जोड़ दें। मुझे लगता है कि हम उस वर्ग में जी रहे हैं जहां हम युवा हैं, पढ़े लिखे हैं, समझदार हैं लिखने का हमें सबूत भी देना है कि हम भारत देश के वासी हैं और हम बहुत गर्वशाली हैं। हमने आपने भाईयों के लिए या जवानों के लिए ऐसे बात नहीं कर सकते।
कोई ऐसा किस्सा कमेंट्री से जुड़ा सुनाइये जिसमें आप कहना कुछ चाहते थे और निकल कुछ गया?
मैं स्काई स्पोर्ट्स में इंग्लिश में कमेंट्री कर रहा था। उस वक्त मैं दिमाग में हिंदी में सोचता था, फिर उसे इंग्लिश में कनवर्ट करता था। फिर मुझे लगता था कि यार मैंने बोल क्या दिया। मैंने सोचा मुझे अंग्रेजी में नहीं जाना है, अपना हिंदी बहुत बढ़िया है। हिंदी में बात करेंगे। यूट्यूब पर मैं सिर्फ क्रिकेट करता हूं। एक्टिंग थोड़ी बहुत कर लूंगा।
कमेंट्री बॉक्स का चैलेंज क्या होता है?
खेलना ज्यादा आसान था। मैं खेल चुका हूं, मुझे पता है। लेकिन कमेंट्री में ये होता है जो आप देख रहे हो उसे आपको बोलना है और उसमें बहुत बार ऐसा लगता है कहीं कुछ गलत न निकल जाए। किसी की शान के खिलाफ कुछ न निकल जाए। कभी-कभी कुछ हो भी जाता है क्योंकि हम लोग भगवान नहीं हैं, बोलते हैं, करते हैं, प्रयास यही करते हैं किसी के मन को ठेस न पहुंचे। ऐसी बात न करें गलती हर किसी से होती है। जो बंदा गलती मान ले उससे बड़ी चीज कुछ नहीं होती। आज कमेंट्री करने वाले गलती करते हैं। जिन्होंने 15-15 साल कमेंट्री की है वो भी गलतियां करते हैं। सनी सर (सुनील गावस्कर) से भी गलतियां हो जाती हैं, वो तो इतने वर्षों से कमेंट्री में हैं। इंसान गलतियों का पुतला है। थोड़ी बहुत गलती हो जाती है। हमारा उद्देश्य यही रहता है कि जो आप लोग खेल देख रहे हो अगर उसे हम लोग ठीक तरह से बयां कर सकें वो ही हमारा उद्देश्य होता है। बहुत बार लोग हमें लिखते हैं कि हिंदी कमेंट्री न शेरों शायरी का अड्डा बन गया है। वहां शेरों शायरी ज्यादा हो रही है। मैंने उसकों गंभीरता से लिया कि बिल्कुल यार ऐसे नहीं होना चाहिए। क्रिकेट देखने वाला प्रेमी है जो उसे वह जानने में दिलचस्पी है कि क्या हो रहा है खेल में। मेरा और कुछ हमारे कलीग का प्रयास यही रहता है कि हम खेल पर ज्यादा फोकस करें और खेल पर ही बात करें। ज्यादा से ज्यादा बात वो करें जो दर्शक सुनना चाहते हैं। शैरी पा (नवजोत सिंह सिद्धू) करते हैं और उनके मुंह पर जचती है। अगर हर कोई उनकी तरह करने जाएगा वो कोई कर नहीं पाएगा।
हरभजन ने सुनाया गांगुली से जुड़ा मजेदार किस्सा
हमारी टीम में मैं, युवी और आशीष नेहरा थे। हमारा गुट था जो टीम में मस्ती करता था। हमने एक बाद गांगुली को अप्रैल फूल बनाया था। हमने पेपर कटिंग्स तैयार किए थे जिसमें लिखा था कि युवराज बहुत पार्टी करता है, हरभजन सिंह गंभीर नहीं है, नेहरा अभ्यास सत्र में नहीं आता। हमने सभी को साथ में लिया और बताया कि हम आज ये मुद्दा रखेंगे। हमन बात की ड्रेसिंग रूम में कि दादा (गांगुली) आप ये क्या बोल रहे हो पब्लिक में जाकर हमारे लिए। ये क्या-क्या छपा है। दादा ने कहा कि मैंने इस तरह की बात ही नहीं की।
उन्होंने आगे कहा, मैंने कहा कि अगर आपने बात नहीं की तो ये अखबार में कैसे छपा। हमने इस मामले में सचिन तेंदुलकर को भी लिया। मैंने कहा कि पाजी ये गलत बात है। मैंने कहा कि हम ऐसे नहीं खेलेंगे। मैंने फिर बैग उठाया और चल दिया, उधर से राहुल ने भी बोला कि दादा ये सही नहीं है। सचिन ने भी यही कहा। मैंने बैग उठाया, मैंने चलना शुरू किया, युवी ने भी ऐसा ही किया। दादा घबरा गए। जैसे ही हम रूम से बाहर निकले, दादा पीछे से आए और बोले कि भगवान कसम मैंने ऐसा नहीं किया है। अगर मैंने ऐसा कहा होगा तो क्रिकेट छोड़ दूंगा। मैंने फिर दादा से कहा कि सॉरी हम मजाक कर रहे थे, लेकिन हमारे सीनियर खिलाड़ी इतने अच्छे थे कि वे हमें छूट देते थे कि हम मजाक कर सकें। ये एक परिवार की तरह था।
ऐसा कहा जा रहा है टी20 क्रिकेट में ऑफ स्पिनर की जगह बहुत कम है। जो मुरलीधरन थे, जो सकलेन थे, जो आप रहे, अब इस तरह के स्पिनर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि टी20 क्रिकेट बहुत हो रही है। आप क्या कहेंगे?
ऐसा कहा जाता है कि ऑफ स्पिनर बहुत आसान है खेलने के लिए, लेकिन जिन लोगों को ये लगता है, वो आइए जरा मैदान में। सामना तो मैदान में ही होगा न। वीरेंद्र सहवाग ने कई बार बोला कि मैं ऑफ स्पिनर को गेंदबाज नहीं मानता। मैंने कहा भाई ऐसा है तू बल्लेबाज बहुत बड़ा है, लेकिन जिस दिन मैदान में मुकाबला हुआ देख लेंगे। एक बार तू जीतेगा एक बार मैं जीतूंगा। ये अब आईपीएल में नहीं हो रहा है। ऑफ स्पिनर का नहीं आना मेंटैलिटी पर निर्भर है। अब कप्तान सोचते हैं कि ऑफ स्पिनर से नहीं कराना है। हम उन्हें इतना विश्वास ही नहीं दे रहे कि आप कर सकते हो। एक लड़का है जो अंडर 19 में बहुत अच्छा कर रहा है। पंजाब से ही है। हम उसको देखेंगे भारत के लिए खेलते हुए दो चार साल में। सरदार जी ही है। बहुत बढ़िया गेंदबाज है। अभी वह भारतीय अंडर-19 में इंग्लैंड दौरे के लिए भी सेलेक्ट हुआ है। उनको देखेंगे भारत के लिए खेलते हुए, वह ऑफ स्पिनर हैं।
भारतीय टीम बेहतर होती गई। 2001 की सीरीज के बाद भरोसा जगा कि हम अच्छा कर सकते हैं। तो आने वाली जनरेशन देख रही है कि हमें बेहतर करना है। जो विराट कोहली की टीम ने किया, जो हमने ऑस्ट्रेलिया में किया पूरी दुनिया ने उसे देखा। विराट कोहली की कप्तानी वाला दौर टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए सबसे बेहतरीन दौर में से एक रहा है। इस दौर में भारत ने शानदार क्रिकेट खेली। क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट पर खड़ा है। स्तंभ है, क्योंकि इसमें पांचों दिनों तक आपकी परीक्षा होती है। हर तरह की परीक्षा इसमें होती है, मानसिक तौर पर शारीरिक तौर पर परीक्षा होती है और ऐसे में भारतीय टीम ने डोमिनेट किया।
जब आप टीम में आए सौरव गांगुली कप्तान थे। गांगुली ने एक टीम बनाई। फिर आपने द्रविड़ के साथ खेला। फिर एमएस धोनी आए। इन कप्तानों के कैसे आंकते हैं? कैसी रही इनकी कप्तानी?
क्रिकेट इतना बड़ा स्पोर्ट्स है इस देश में, हम सब क्रिकेट की वजह से हैं और आप सब लोगों की वजह से हैं। आप लोग इस गेम को इतना देखते हो, इससे प्यार करते हो तभी तो यह खेल बढ़ता है। आज जब भी कोई मैच होता है और आप जुड़ते हो तो ये दिखाता है कि हम एक हैं। एकजुट हम प्रार्थना करते हैं कि भारत जीत जाए। वहां न तो कोई धर्म है, क्योंकि हर कोई भारत की जीत चाहता है। इसी तरह आम जिंदगी में भी अगर हम एक हो जाएं तो भारत तो जीतेगा ही। अब मैं आपके सवाल पर आता हूं। क्रिकेट का वो दौर जो था वहां मैच फिक्सिंग वाला स्कैंडल हुआ। आप सभी निराश हुए कि क्रिकेट में ये सब होता है। लोगों को दोबारा मैदान में लाने के लिए आपको उनका भरोसा जीतना होगा और यह दिखाना होगा कि आप जीतोगे। कहां जीतोगे, जब आप अपने से बड़े पहलवान को हराओगे। जब हमने ऑस्ट्रेलिया को हराया तो लोगों को लगा कि हमारी टीम में दम है। ये वो वाली टीम नहीं है। कुछ व्यक्तिगत लोग थे जो गलत काम करके पैसे बनाना चाहते थे, लेकिन अगर इसे ठीक तरीके से खेलें तो इससे बढ़िया कुछ नहीं है। इसमें नाम शोहरात सबकुछ है। जब देश के लिए खेलते हो तो साफ पाक रहकर खेलना है। अपनी जमीर को नहीं बेचना है। 2001 की वह सीरीज ने लोगों में यकीन जगाया कि यह टीम जीत सकती है। गांगुली ने वह टीम बनाई थी। धोनी ने इसे आगे बढ़ाया। आज 14 साल का लड़का वैभव सूर्यवंशी ने शतक लगाया, यह कितनी बड़ी बात है। आपने देखा या नहीं, स्टेडियम में वैभव का बैनर लिए एक लड़का बैठा था और उस पर लिखा था कि 2030 मैं आपका बैटिंग पार्टनर बनूंगा। वो कितना बड़ा ख्वाब देख रहा है। मैंने कहा न ख्वाब सच होते हैं और उनके होते हैं जो इसे देखते हैं। यह हर उस बच्चे के लिए है जो कुछ बड़ा करने का ख्वाब देखता है। जब वैभव किसी गांव से निकलकर खेल सकता है तो सिर्फ लगन होनी चाहिए और रास्ता होना चाहिए।
हरभजन से कार्यक्रम के दौरान पूछा गया, बचपन में हर कोई कुछ खेल खेलता है। ऐसे में एक समय ऐसा भी आता है जब आपको लगता है कि ये खेल मेरे सपने को पूरा कर सकता है। आपकी जिंदगी में वो मौका कब आया?
इस पर उन्होंने कहा, मैंने क्रिकेट इसलिए खेलना शुरू किया था क्योंकि यही मेरा सपना था। पढ़ने में मैं बहुत ज्यादा होशियार था नहीं और जितना मन खेल में लगता था, उतना पढ़ाई में लगता भी नहीं था। मैं क्रिकेट से पहले जूडो खेलता था, उसमें बहुत मार खाई क्योंकि दुबला-पतला था। देखा कि इसमें तो रोज पिटाई हो रही है तो वो छोड़ दिया। बैडमिंटन खेला, लेकिन उसमें भी मन नहीं लगा। मन क्रिकेट खेलने में था और जिस दिन से मैदान जाना शुरू किया, बस एक ही सपना देखा कि कपिल देव जैसा बनना है।
सर, आपने कहा कि एक शब्द में अगर जिंदगी को पिरोना है, तो मेरे जिंदगी के सबसे शानदार पल मैदान पर रहे हैं। जब मैदान पर जाता हूं तो मुझे खुशी होती है। टीम इंडिया की जर्सी पहनने से बड़ी चीज मेरे लिए कुछ नहीं है। बहुत कम लोगों को ऐसा मौका मिलता है, जब वो देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैं खुद को सौभाग्यशाली समझता हूं कि मुझे देश को क्रिकेट के जरिये सर्व करने का मौका मिला। मैंने हर बार कोशिश की है कि हमारा झंडा हमेशा ऊपर रहे। उसमें कभी कभी हम पीछे रह जाते हैं। प्रयास हमने पूरा किया। मेरे लिए सबसे बेहतरीन लम्हा विश्व कप जीतना और उस टीम का हिस्सा रहना सबसे बड़ा पल था। किसी भी खिलाड़ी के लिए विश्व कप जीतना एक गोल होता है। उससे बड़ा कुछ नहीं है, उससे ज्यादा सुकून देने वाला कुछ नहीं है। वो आप लोग की जीत है। आप सब बस टीवी पर देखते हो, लेकिन दुआ करते हो कि हरभजन अच्छा खेल जाए, जहीर अच्छा खेल जाए...तो ये दुआएं कौन किसके लिए करता है। हमारे लिए इतने सारे लोग दुआ करते हैं। जहां पर चीजें खत्म होती हैं वहां से दुआएं शुरू होती हैं। शुक्रिया आपका मेरे लिए दुआ करने के लिए।
ये हैरानी वाली बात है कि श्रेयस अय्यर जैसा खिलाड़ी टीम में नहीं है। मुझे नहीं पता कि उसे टीम में आने के लिए और क्या क्या करना चाहिए। जहां जहां उसे मौका मिला, उसने रन बनाए हैं। 2023 विश्व कप में श्रेयस का प्रदर्शन शानदार रहा था। जिस गति से उन्होंने रन बनाए थे, वो जीत वाले रन थे। इस लिहाज की बल्लेबाजी की थी। इसके बाद उन्हें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला, मुझे नहीं पता कि क्या वजह है। इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी में श्रेयस ने वापसी की और मैच विनिंग पारियां खेलीं। फिर उन्हें कॉन्ट्रैक्ट तो मिला और अभी आईपीएल में उन्होंने अपने दम पर टीम को फाइनल तक पहुंचाया। कहीं न कहीं उनको भी लिया जा सकता था। शायद चयनकर्ता की सोच अलग है। हम सीमित ओवर में अलग कप्तान सोच रहे हैं और टेस्ट में अलग कप्तान सोच रहे हैं, मेरे लिहाज से जिसका फॉर्म अच्छा है, जो जब अच्छा खेल रहा है उसे तब खिलाना चाहिए। मेरे ख्याल से श्रेयस को होना चाहिए था।
इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया ये तीनों दौरे बहुत मुश्किल होते हैं। युवा कप्तान हैं शुभमन गिल और उनके साथ जो टीम है वो भी युवा है। अब तो विराट कोहली भी नहीं हैं और रोहित शर्मा नहीं हैं। बहुत सारे खिलाड़ी जिनके पास अनुभव था वो टीम के साथ नहीं हैं। अनुभव की कमी थोड़ी से खलेगी, क्योंकि ये आसान टूर होता नहीं है। ये सबसे चैलेंजिंग टूर होता है। एक बात तो है कि हमारे लड़के बहुत टैलेंटेड हैं। यही ऋषभ पंत और शुभमन गिल की जोड़ी ने गाबा का घमंड तोड़ा था। और मैं उम्मीद करता हूं कि हमारे खिलाड़ी जिंदादिल प्रदर्शन करेंगे। युवा हैं, लेकिन प्रतिभा बहुत है तो और अपने आप को बैक करेंगे तो स्काई इज द लिमिट। जिम्मेदारी मिली है तो शुभमन अच्छा करेंगे। ये टीम नहीं भी जीते तो भी हमें जल्दी से जज नहीं करना चाहिए कि ये हो गया वो हो गया। यहां पर एक रिवाज है, जीत गए तो वाह वाह हार गए तो खिलाड़ियों की बैंड बज जाती है। ये युवा टीम है और वह इस सीरीज से काफी कुछ सीखेंगे। जीत के आएं तो सोने पर सुहागा, लेकिन अगर जीत नहीं भी पाए तो सीखने को बहुत कुछ मिलेगा। टीम इंडिया का भविष्य उज्जवल है। भारत का भविष्य उज्जवल है।
शुक्रिया अमर उजाला। आपने मुझे इस लायक समझा कि आपके सामने आ सकूं और अपनी कहानियां साझा करूं। बंगलूरू में जीत के बाद जो भगदड़ हुआ जिसमें बहुत सारी जानें गईं। एक बहुत दुख देने वाली घटना। जो किसी भी तरह की जीत को पीछ छोड़ जाती हैं। जो जिंदगियां चली जाती हैं वो वापस नहीं आएंगी। उसका कारण लोग ढूंढने लगे कि क्या कारण है, किस वजह से हुआ और लोग अपनी अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। मेरी समझ में यह बहुत गलत हुआ। जो जानें गई हैं। वो परिवार जिनके सदस्य चले गए हैं, वो वापस नहीं आने वाले हैं। ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर सियासत नहीं होनी चाहिए। दोषी ठहराना इसको या उसको सही नहीं है। मुझे लगता है जो हुआ वो बहुत गलत हुआ, लेकिन मैं यही कह सकता हूं आगे से ऐसी दुर्घटनाएं न हों उसका ध्यान में रखते हुए इंतजाम करना चाहिए।
संवाद के मंच पर पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह पहुंच चुके हैं।
भज्जी भारत के दिग्गज गेंदबाजों में से एक रहे हैं। वह 2007 में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम और 2011 में वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। हरभजन ने भारत के लिए डेब्यू मार्च 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु में टेस्ट से किया था। इसके बाद अप्रैल 1998 में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ शारजाह में पहला वनडे खेला था। भज्जी ने अपना पहला टी20 मैच 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहानिसबर्ग में खेला था। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 103 टेस्ट, 236 वनडे और 28 टी20 खेले हैं।
साल 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में भारत पर हार का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में भज्जी ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ 163 रनों की साझेदारी कर मैच बचाया था। इस मैच में उन्होंने अपने करियर का पहला शतक लगाया था और भारत को हारने से बचाया था। उन्होंने 193 गेंद में 11 चौके और तीन छक्कों की मदद से 115 रन बनाए थे। इस मैच की दूसरी पारी में भारत के छह विकेट सिर्फ 82 रन पर गिर गए थे, लेकिन भज्जी और लक्ष्मण ने टीम इंडिया का स्कोर 266 तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने टेस्ट में दूसरा शतक भी बनाया।
हरभजन सिंह अपने करियर की शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करके चर्चा में आ गए। इसके बाद तो मानों जैसे ही ऑस्ट्रेलिया टीम के साथ भारत मैच होता तो उस मैच में हरभजन सिंह का प्रदर्शन और भी बढ़िया हो जाता है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया मीडिया ने हरभजन सिहं को टर्बनेटर नाम दिया। क्योंकि वह सिख हैं और पग बांधते हैं। वहीं टर्मनेट का मतलब होता है तहस नहस कर देने वाला। इन दोनों शब्दों को जोड़कर हरभजन सिंह को टर्बनेटर नाम मिला।
हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच से की थी। टेस्ट मैच में डेब्यू करने के बाद से हरभजन सिंह कई शानदार टेस्ट जीत का हिस्सा रहे। हरभजन सिंह ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में अब तक 103 टेस्ट मैच खेलें हैं जिसमें उन्होंने 417 विकेट लिए हैं। वह 400 विकेट लेने वाले पहले भारतीय ऑफ स्पिनर हैं। हरभजन सिंह ने टेस्ट में 5 बार एक टेस्ट मैच में 10 विकेट लिए हैं औक 25 बार एक पारी में 5 विकेट चटकाएं हैं।
Harbhajan Singh in Amar Ujala Samwad Live : नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज उत्तराखंड के देहरादून में संवाद का आयोजन हो रहा है। इस कार्यक्रम में देश की जानी मानी शख्सियतों, नीति नियंताओं, विचारकों और विशेषज्ञों के विचार जानने और उनसे रूबरू होने का मौका मिल रहा है। इस कार्यक्रम में खेल और फिल्म जगत की हस्तियों से लेकर राजनीति के पुरोधा भी शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर और क्रिकेट कमेंटेटर हरभजन सिंह भी हिस्सा लेंगे। वह भारतीय टेस्ट के नए कप्तान और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज पर अपनी राय रखेंगे।