मैं एक ही चीज देना चाहूंगा। हिल स्टेशन पर सारी सुविधा नहीं होती हैं। युवाओं से कहना चाहूंगा कि आप खूब मेहनत करें और लॉयल्टी के साथ मेहनत करें। अगर आप पूरी लगन के साथ मेहनत करते हैं तो इसका सफल नतीजा जरूर मिलेगा।
मुझे प्रैक्टिस के लिए 30 35 किमी दूर जाना पड़ता था। तीन बस बदलना पड़ता था। 2006-07 में इतनी अच्छी ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी नहीं थी। तो ये कि अपने मेहनत पर ध्यान दें। ये भी कहना चाहूंगा बच्चों से कि अगर कोई भी इंसान आप से थोड़ा सा भी ज्यादा खेला हो तो उनसे मदद लें।
यूट्यूब पर आने की सलाह कुछ साथियों ने दीं। वो बच्चे जो किसी एकेडमी में नहीं जा सकते या उन तक मदद नहीं पहुंच रही तो मैं चाहता हूं कि मैं उन्हें ऑनलाइन माध्यम से कोचिंग दूं। बस इसके पीछे यही मोटिव है।
मैं एक ऐसे परिवार से हूं जहां हमने लोगों की हमेशा से मदद करने की कोशिश की है। राजनीति के सवाल पर यही कहूंगा कि हमेशा क्रिकेट तो खेलना नहीं है, और आगे देखना है कि क्या करना होगा। बस सही समय का इंतजार है। मुझे आप कहीं भी ले जाओ, लेकिन आप में दम होना चाहिए। दो चार लोगों की मदद कर सकें।
कुछ लोगों की ऐसी सोच हो सकती है। ये वो लोग हैं जिनके लिए पैसा अहम है। कुछ लोग होते हैं जिन्हें लीग क्रिकेट पसंद है, लेकिन अगर उसके मन में देश के प्रति सम्मान है तो आप ऐसा नहीं करेंगे। मुझे लगता है कि अपने स्किल पर ध्यान दीजिए और उसके जरिये पैसे कमाइए। ऐसा नहीं है कि पैसा जरूरी नहीं है, लेकिन अपनी स्किल पर ध्यान दीजिए। और पैसा कमाना है तो और अच्छा खेलिए।
फ्यूचर होता नहीं है। उसे बनाया जाता है। इंडियन क्रिकेट टीम की बात करें 90 या 80 के दशक में इतनी जानकारी किसी को नहीं थी। 1983 से 2010 तक भारतीय टीम बल्लेबाजी के लिए जानी जाती थी। हर इंसान बैटिंग को लेकर बात करता था। हर कोई कहता था कि अगर सामने वाली टीम 400 बनाती है तो इंडिया बना लेगी। मतलब ये कि भारत 400 रन देता है। अब ये नहीं सुनते होंगे। अब कहा जाता है कि सामने वाली टीम 200 बनाए तो भी हमारे गेंदबाज रोक देंगे। जो टीम अभी है हमने ये विश्वास कायम किया है। अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
ये पॉलिटिक्स है। ऐसा हो ही नहीं सकता। जब किसी को जलन होती है या दुख होता तो वो पॉइंट आउट करते हैं। जब आप किसी चीज को हासिल करते हैं तो वो स्किल है, लेकिन दूसरा करे तो बेईमानी है। मुझे उधर से कोई जवाब नहीं आया। जवाब आए तो मैं उसके लिए तैयार बैठा हूं। आपको दूसरे की कामयाबी पर खुश होना चाहिए। आप महान तभी बन सकते हैं।
एक स्पोर्ट्समैन की लाइफ में होता है कि वह देश के लिए कब खेलेगा। दूसरा होता है कि आप परिवार के लिए क्या करेंगे और कैसे मैनेज करेंगे। एक होता है रोलमॉडल। मेरे लिए मेरे पिता रोलमॉडल रहे हैं। जब मेरे पिता गुजर गए तो मेरे लिए वह सबसे बड़ा नुकसान था। आजतक मेरे घरवालों ने मुझे किसी चीज के लिए रोका नहीं न टोका। सबने टोका कि सब शमी को बिगाड़ रहे हैं, लेकिन जब मैं टीम इंडिया के लिए खेला तो वो ही सबसे ज्यादा रो रहे थे। बोल्ड मोमेंट वह था जो लोग मुझसे जलते थे और मुझे वापसी करते देखा तो रोने लगे।
जितनी बार यह सवाल पूछा जाता है, उदास हो जाते हैं। वो जीत का सिलसिला था, किसी के मुंह से नहीं निकला था कि इस टीम को कोई हरा सकता है। शायद यही तकदीर है। उस दिन अच्छा नहीं खेल सकता। मैं इसके लिए लक को अहम मानता हूं।
आपका हार्डवर्क बना कर रखना पड़ता है। वही आपकी मदद करती है। जन्मा यूपी में हुआ है और खेल बंगाल से रहा हूं, लेकिन हूं तो भारत का। अपना स्किल इतना हाई करो कि सामने वाला सवाल नहीं उठा सके।
रिकवरी का सिलसिला जुड़ा रहता है। बहुत सवाल सुनने को मिलते हैं कि आप कब वापस आ रहे हैं। कोशिश यही है कि जितने भी फैंस हैं उनको अपडेट देता रहा हूं। एक एक आदमी 10 10 बार कमेंट करते हैं और मिस यू लिखते हैं। वह बहुत प्यारा लगता है।
शमी को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय खेल पुरस्कार के दौरान अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वह भारत के 58वें क्रिकेटर बने थे जिन्हें यह सम्मान मिला है।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में तीन सितंबर 1990 को जन्मे मोहम्मद शमी ने छह जनवरी 2013 में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था। वह अब तक 101 वनडे मैच खेल चुके हैं और उन्होंने 195 विकेट अपने नाम किए हैं। इसी तरह 64 टेस्ट मैचों में उन्होंने 229 विकेट झटके हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय की बात करें तो शमी ने 23 मैचों में 24 विकेट चटकाएं हैं।
मोहम्मद शमी का जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ था, लेकिन यह खिलाड़ी प्रथम श्रेणी में बंगाल टीम का प्रतिनिधित्व करता है। शमी ने कुछ समय पहले इस बारे में खुलासा किया था कि आखिरी क्यों उन्हें उत्तर प्रदेश की जगह बंगाल का प्रतिनिधित्व करना चुना। शमी ने बताया था कि उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश की रणजी टीम के लिए ट्रायल दिए, लेकिन फाइनल राउंड में हमेशा उन्हें बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने बंगाल का रुख किया और वहीं के लिए खेलने लगे।
शमी ने पिछले साल भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में कमाल का प्रदर्शन किया था। शमी ने इस टूर्नामेंट के शुरुआती कुछ मैच नहीं खेले थे और बांग्लादेश के खिलाफ हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के कारण उन्हें मौका मिला था। शमी ने विश्व कप 2023 के अपने पहले ही मैच में कमाल की गेंदबाजी की थी जिसके बाद फाइनल तक वह प्लेइंग-11 के सदस्य बने रहे। इतना ही नहीं शमी वनडे विश्व कप में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बने थे। उन्होंने सात मैचों में 5.26 की इकॉनोमी रेट से 24 विकेट लिए थे और सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में ऑस्ट्रेलिया के एडम जांपा को पीछे छोड़ा था।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहने वाले शमी ने पिछले साल वनडे विश्व कप में खूब चमक बिखेरी थी, लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के बाद वह चोटिल हो गए और फरवरी में उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। शमी अब तक इस चोट से पूरी तरह नहीं उबर सके हैं जिस कारण उनकी टीम में वापसी होने में देरी हो रही है।
नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। देहरादून में जारी आज अमर उजाला संवाद में कई शीर्ष हस्तियां शिरकत कर रही हैं। इसी कड़ी में भारत के दिग्गज गेंदबाज मोहम्मद शमी भी पहुंचेंगे और वह कई दिलचस्प सवालों का जवाब देते दिखेंगे। शमी 2023 वनडे विश्व कप के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे। हालांकि, उसके बाद चोट की वजह से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं और रिहैब में हैं।