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Maha kumbh 2025: ‘अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव’ का हुआ समापन, ज्योतिष विद्या समेत इन विषयों पर हुई चर्चा

Sat, 25 Jan 2025 06:07 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jyotish Mahakumbh Mahotsav 2025 Prayagraj: प्रयागराज में जहां एक ओर पर 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन हुआ है वहीं दूसरी ओर अमर उजाला ने भी त्रिवेणी संगम पर ज्योतिष महाकुंभ का आयोजन किया। 25 जनवरी को प्रयागराज की धरती पर अमर उजाला और इसके सहयोगी उपक्रम जीवांजलि तथा माय ज्योतिष द्वारा 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' का आयोजन किया गया था। इस महोत्सव में कई ज्योतिषाचार्य और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ भी शामिल हुए थे।
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'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Amar Ujala Jyotish Mahakumbh in Prayagraj 2025: आज यानी 25 जनवरी 2025 शनिवार के दिन भारत के भव्य मेले महाकुंभ में अमर उजाला और उससे जुड़े उपक्रम जीवांजलि और माय ज्योतिष एक अनोखी पहल कर रहा है। बता दें अमर उजाला प्रयागराज में 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' का आयोजन कर रहा है, जहां भारत के कौने-कौने से कई ज्योतिषाचार्य शामिल होने के लिए आए हैं, इस दौरान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने हैं। आपको बता दें 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' के इस भव्य आयोजन में  आए आचार्य ज्योतिष शास्त्र, ज्योतिष विज्ञान, लाल किताब और वास्तु से जुड़े नियमों पर अपने विचार रख रहे हैं........

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ज्योतिष महोत्सव में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा। उद्घाटन सत्र के पश्चात, ज्योतिष के सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा के लिए एक सत्र होगा। इस सत्र में, विषय विशेषज्ञ ज्योतिष और धर्म के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डालेंगे और यह भी बताएंगे कि ज्योतिष के साथ तालमेल बिठाकर इसे दैनिक जीवन में कैसे प्रयोग किया जा सकता है।

ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव के मुख्य अतिथि
इस ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव में उत्तर प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। 
 

महोत्सव में ज्योतिषाचार्य और विद्वान शामिल होंगे
'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' में वक्ता और विशेष अतिथि के तौर पर अनिल वत्स, जीडी वशिष्ठ, पंडित जयप्रकाश शर्मा, अजय लूथरा, संतोष 'संतोषी', आचार्य आनंद, सद्गुरु मां उषा, संजीव श्रीवास्तव, दामोदर बंसल, पारूल चौधरी, स्वामी नीरज जी महाराज जैसे कई गणमान्य ज्योतिषाचार्य और विद्वान सम्मिलित होंगे।

इन विषयों से जुड़े होंगे सत्र
  • वैदिक ज्योतिष
  • सामुद्रिक शास्त्र
  • लाल किताब
  • टैरो कार्ड
  • मंत्रों की शक्ति
  • स्त्री शक्ति और ज्योतिष
  • ज्योतिष और महाकुंभ 
  • ज्योतिष का भविष्य

अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ का शुभारंभ कुछ देर में होने वाला है। कुछ देर में यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने महोत्सव का उद्घाटन किया। - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने महोत्सव का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र में बतौर वक्ता मुख्य अतिथि नंदी के साथ-साथ ज्योतिषाचार्य जीडी वशिष्ठ, आचार्य आनंद और डॉ. संजीव कुमार श्रीवास्तव मौजूद हैं।

ज्योतिष महाकुंभ के मंच पर आसीन सभी विद्वानों और अतिथिगणों का अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक द्वारा स्वागत किया गया। 

महोत्सव में आने वाले विषय विशेषज्ञ वक्ता और उनके सत्र
  • जीडी वशिष्ठ: लाल किताब का रहस्यमय संसार
  • लीजा गुप्ता, डॉ. खुशी और नीता भेदा: टैरो की दुनिया, क्या कहते हैं कागज के पत्ते?
  • शुभेष शर्मन: इतिहास में छुपे ज्योतिष के राज: एक दिलचस्प संवाद
  • अनिल वत्स: वैदिक ज्योतिष के रहस्य: जीवन को दिशा देने वाले अद्भुत मंत्र
  • सद्गुरु मां उषा और आचार्य आनंद:    तंत्र, मंत्र और उपचार
  • डॉ. पूजा शर्मा और मान्या: स्त्री शक्ति और ज्योतिष
  • डॉ. संजीव श्रीवास्तव, कविता चैतन्य, अमित शर्मा, डीपी शास्त्री, डॉ. जीतू सिंह, पारूल चौधरी: क्या ज्योतिष सचमुच विज्ञान है?
  • अजय लूथरा और संतोष 'संतोषी': नए जमाने का ज्योतिष: आधुनिकता में छुपे प्राचीन रहस्य
  • दामोदर बंसल, नीलम शर्मा, सुमन कोहली, चेतना कालरा, बृजेंद्र मिश्रा, स्वामी नीरज जी महाराज, अनूप कुमार जायसवाल, गुरु गौरव आर्य के साथ चर्चा: भविष्य का ज्योतिष और ज्योतिष का भविष्य
  • नंद गोपाल नंदी, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार: ज्योतिष और महाकुंभ: संयोग और समय का मिलाजुला संदेश

ग्रहों की स्थिति व्यक्ति और उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है : नंदी
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने अपने भाषण में कहा कि अमर उजाला को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं। भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीनतम है। हमारे शास्त्रों ने हमें वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद जैसे अनेक बहुमूल्य उपहार दिए हैं। ज्योतिष शास्त्र इनमें सबसे महत्वपूर्ण है। सनातन धर्म में मुहूर्त का बड़ा ही महत्व है। हमारे यहां कहा गया है- माघ मकर गत रवि जब होई, तीरथ पतिहिं आव सब कोई। ...ग्रहों की स्थिति व्यक्ति और उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह प्रामाणिक बात है। इसलिए ज्योतिष को ज्योतिष विज्ञान भी कहा जाता है।

ज्योतिष ने ही में 144 साल बाद बने योग के बारे में बताया'
ज्योतिष ने ही हमें बताया है कि इस बार महाकुंभ पर जो योग बना है, वह 144 साल बाद आया है। 2019 में जब कुंभ हुआ था, तो 24 करोड़ लोग यहां आए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस बार यहां महाकुंभ हो रहा है। हाल ही में मेरी मोरारी बापू जी से यह चर्चा हुई कि लोग महाकुंभ में डुबकी लगाने आते हैं, लेकिन इतने संत भी यहां आते हैं, लोगों को उनके चरणों की धूल भी साथ लेकर जानी चाहिए। मोरारी बापू जी ने कहा कि गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर। ...यानी महापुरुषों के चरणों की धूल लेकर जाना चाहिए। अब तक 11 करोड़ लोग महाकुंभ में आकर स्नान कर चुके हैं।

नन्द गोपाल नंदी - फोटो : amar ujala
'ज्योतिष में समाधान मौजूद हैं'
ज्योतिष शास्त्र के बारे में मंत्री नंदी ने कहा कि कुछ लोग अपने-अपने तर्क देते हैं, लेकिन मेरा निजी अनुभव अच्छा रहा है। मेरे सामने कई संकट आए, लेकिन एक ज्योतिषी ने मेरे बारे में जो भविष्यवाणी की थी, वो सही साबित हुई। ज्योतिष की सबसे सुंदर बात है कि अगर कोई दोष है या ग्रहों की दिशा विपरीत है तो उसका समाधान भी मौजूद है। जैसे डॉक्टर दवा देता है, वैसे ही ज्योतिषाचार्य भी ग्रहों की दशा के हिसाब से निदान बताते हैं। जब रामलला के लिए भव्य-दिव्य मंदिर बना, तब काल गणना के अनुसार मुहूर्त निकालकर ही मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

जीडी वषष्ठ ने लाल किताब का जिक्र करते हुए कहा-लाल किताब का नाम इसीलिए लाल किताब रखा गया था की हमारे शरीर के अंदर में जो 2 तारे हैं सूर्य और चंद्रमा और पंचमहापुरुष ये  विराजमान रहते हैं। ये विराजमां रहते हैं शरीर के अंदर बहते हुये पानी के अंदर। 

एक किताब सबके लिए पाठ्यक्रम कैसे?
जीडी वशिष्ठ के अनुसार हर इंसान जो धरा पर पैदा हो गया  वो अपने अलग अलग ग्रह मतलब की अलग अलग घरों को लेकर पैदा होता है। मतलब चंद्रमा का तो फरक पड़ ही जाता है। उसके अनुसार उसकी सोच अलग प्रकार की बन जाती है। 

फॉर्मूला आधारित है ज्योतिष : जीडी वशिष्ठ
लाल किताब विशेषज्ञ जीडी वशिष्ठ ने कहा कि इस समय आकाश में ग्रहों की स्थिति इस प्रकार की है कि महाकुंभ की धरती पर जो पानी है, वह अमृततुल्य है। यहां त्रिवेणी है। ...जब इंसान ग्रहों की अलग-अलग स्थिति में जन्म लेता है तो इससे उसकी सोच दूसरों से अलग हो जाती है। ज्योतिष विज्ञान में कई लोग यह गलती कर देते हैं कि वे एक घर के अंदर बैठे ग्रह के फल को पढ़ देते हैं। ज्योतिष असल में विज्ञान, गणित और फॉर्मूला आधारित है। जो इस फॉर्मूला को समझ जाए, वह भविष्य बता सकता है। ज्योतिष विज्ञान है, लेकिन इसे समझने के लिए आपके पास वैज्ञानिकों जैसा दिमाग भी होना चाहिए। 

'ग्रहों की दशा से अलग एक महत्वपूर्ण चीज है- संस्कार'
जीडी वशिष्ठ ने कहा कि वे सात फरवरी को 'वशिष्ठ ज्योतिष' की शुरुआत करने जा रहे हैं। जब तक हम किसी चीज की गहराई में नहीं उतर जाते, तब तक उसके बारे में पूरा ज्ञान नहीं मिल पाता। ऋषि-मुनियों ने ग्रहों की दिशा से अलग हमें एक महत्वपूर्ण चीज बताई, जिसका नाम है संस्कार। आजकल लोग व्यसनों से जूझ रहे हैं, बच्चे बिगड़ रहे हैं। ऐसा न हो, इसके लिए ही संस्कार बनाए गए थे। जिनके ग्रह खराब हैं, उनके आचार-विचार को भी नियंत्रण में रखा जाए, इसी के लिए संस्कार बने थे। दुनिया में बड़ी सोच वाले लोग सिर्फ 20 फीसदी है, उनमें भी श्रेष्ठ विचार रखने वालों की संख्या एक-दो फीसदी ही है। दुनिया में आज नासमझों की भीड़ बहुत ज्यादा है।

ज्योतिष की जड़ें कितनी प्राचीन? 
आदिकाल में कोई भी ग्रहण लगता था उस समय जीव जन्तु अलग व्यवहार कर रहे हैं।  तो लोगों का लगा कुछ बात तो है जो प्रभाव डाल रही है। उस समय सूर्य ग्रहण लगता है। ज्योतिष के 2 भाग होते हैं एक गणितीय पक्ष और एक होता है फलित पक्ष। गणित के बेगैर फलित अधूरा है। मानव के हितों के लिए कैसे ज्योतिष शास्त्र का कैसे सदुपयोग हो इसके लिए इस परिकल्पना को आगे बढ़ाया।  

ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद, डॉ. संजीव कुमार श्रीवास्तव और समीर उपाध्याय ने 'इतिहास में छुपे ज्योतिष के राज' विषय पर परिचर्चा की।

'विज्ञान की सरहद जहां खत्म होती हैं, ज्योतिष वहां से शुरू होता है'

ज्योतिषाचार्य समीर उपाध्याय ने कहा कि ज्योति और शास्त्र मिलकर बना है ज्योतिष। यानी प्रकाश दिखाने वाला शास्त्र। जब ग्रहण आता था, तो जीव-जंतु अलग तरह का व्यवहार करते थे। हमारे ऋषि-मुनियों ने जब इस पर अनुसंधान किया, तब ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्योतिष की चर्चा ऋगवेद के समय से हो रही है। जीवन की योजना बनाने में एक कारक ज्योतिष बनता है। 

नौ ग्रहों को तीन समूहों में विभाजित किया जाता है। जब कुंडली बनती है, तब आपके जीवन की महत्वपूर्ण बातें तय हो जाती हैं। पूर्व जन्मों का प्रारब्ध (पूर्व जन्म के कर्मों का फल) इस जन्म के सत्कर्मों से ही ठीक हो पाता है। ज्योतिषी-खगोलशास्त्री वराह मिहिर के बनाए सिद्धांत को सौ फीसदी सही माना जाता है, लेकिन लोगों ने एक समय उनके फलित विज्ञान को सिरे से नकार दिया था। 

शास्त्र अपनी जगह पर एकदम ठीक थे। शास्त्रों को मानने वालों की संख्या घटती चली गई। जहां विज्ञान की सरहद खत्म होती है, ज्योतिष वहां से शुरू होता है। ज्योतिष धोखेबाजों का धंधा नहीं है। यह प्रतिष्ठित हुनर है। जीवन को बेहतर तरीके से जीने की पद्धति में ज्योतिष मदद करता है। ज्योतिष में अंधविश्वास की कोई जगह नहीं है। वैदिक काल में एक समय ऐसा आया, जब कर्मकांड का प्रभाव बहुत बढ़ गया। फिर अंधविश्वास शुरू हुआ।

'पहले राजा-महाराज नक्षत्रों की गणना देखते थे'
नाड़ी और नक्षत्र विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ज्योतिष एक तरह से जीवन का जीपीएस है। इतिहास में बहुत से ऐसे राज हैं, जो अब तक पूरी तरह सामने नहीं आ पाए हैं। पहले राजा-महाराजाओं को नक्षत्रों की गणना से पता चल जाता था कि कब युद्ध होने के आसार हैं और कब अकाल पड़ने वाला हैं। आजकल हम ग्रहों और राशियों पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन नक्षत्रों पर ध्यान नहीं देते। 27 नक्षत्र हैं। जब इन्हें भी देखा जाता है तो भविष्य बताना और सटीक हो जाता है। हर धर्म में ज्योतिष शास्त्र को लेकर सम्मान का भाव रहता है। ज्योतिष अंधविश्वास नहीं है, विशुद्ध विज्ञान है। जहां तक काल सर्प दोष, मांगलिक दोष और पितृ दोष की बात है तो इस पर मंथन करने और अनुसंधान करने की जरूरत है। सिर्फ एक दोष होने से आपकी किस्मत नहीं बदल जाती, और भी बहुत से कारण होते हैं।

'ज्योतिष को व्याप्त है, श्वास है'
ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद ने कहा कि ज्योतिष वेदों का अंग है। ज्योतिष वेदों का नेत्र है। तिथिर्वारश्च नक्षत्र योगः करण मेव च यानी ज्योतिष पांच अंगों को मिलकर बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ज्योतिष को आगे बढ़ने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष तो व्याप्त है। यह श्वास की तरह है। इसे प्रचार-प्रसार की आवश्यकता नहीं है। ज्योतिष तो सनातन है। ऋगवेद में ज्योतिष के बारे में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यह ज्योतिष विद्या 83 हजार वर्ष पुरानी है।

उपाय के लिए जरूरी है मूलांक 
ज्योतिष नीलिमा जोशी ने कहा कि वह जातक के मूलांक को देखर उपाय बताती है। आजकल आप जहां भी देखते हैं, वहां समस्याओं के उपाय बताए जाते है, लेकिन हमेशा यह देखना चाहिए कि उपाय बता कौन रहा है।

9 नंबर होता है खास
ज्योतिष नीलिमा जोशी ने कहा कि भविष्य जानने के लिए आपकी जन्म की तिथि का पता होना बेहद जरूरी होता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि 9 एक ऐसा नंबर है कि जो दुनिया को बदलने की ताकत रखता है।
 

फोन नंबर का जीवन पर क्या होता है प्रभाव ?
ज्योतिष नीलिमा जोशी ने कहा कि जीवन में आपका फोन नंबर बेहद खास होता है, इसके आधार पर कई शुभ परिणामों की प्राप्ति होती हैं। इस दौरान उन्होंने नाम को लेकर कहा कि आपके नाम की पूरी स्पेलिंग का प्रभाव आपके ऊपर होता है। वहीं अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिन लोगों के ऊपर शनि का साढेसाती चल रही है वह उपाय जरूर करें।  

'वायरल नुस्खों से फायदा नहीं मिलेगा'
ज्योतिष विशेषज्ञ चेतना कालरा ने कहा कि अगर युवा ज्योतिष से नहीं जुड़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी हमारी है। सही ज्योतिषी को पहचानना मुश्किल है। जो प्रश्न पूछ रहा है, वह तय करता है कि उसके प्रश्नों का सही उत्तर उसे मिल सका या नहीं। इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हजारों ज्योतिषीय नुस्खों से आपको कोई फायदा नहीं मिलने वाला। नुस्खा कौन बता रहा है, किस तरह बता रहा है, क्या देखकर बता रहा है, यह मायने रखता है। टैरो कार्ड में दो-दो दिन की क्लास हो रही है और लोग टैरो कार्ड रीडर बन जा रहे हैं। इन विद्याओं को पूरी तरह सीखने के लिए तो एक जन्म भी कम है।

'हर अंक कुछ न कुछ कहता है'
अंक ज्योतिष के बारे में नीलिमा जोशी ने कहा कि जब भी कोई जन्म लेता है तो उसकी एक तिथि होती है। जीवन में अंक हमारा पीछा नहीं छोड़ते। हमारे नाम में भी अंक छुपा होता है। हर अंक का जोड़ मूलांक है। आपकी पूरी जन्म तिथि का जोड़ आपका भाग्यांक माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में जिस तरह कहा जाता है कि हर कुंडली में सकारात्मक-नकारात्मक गुण-दोष होते हैं, वैसे ही हर अंक का अपना महत्व और अपनी ऊर्जा है। यह वर्ष नौ अंक का है। यह बदलाव का अंक है। यह अग्नि तत्व से जुड़ा है। वहीं, वैदिक ज्योतिष अपने आप में संपूर्ण है। उसमें बताए गए उपायों से जीवन बदल सकता है।

मैनीफेस्टेश आपकी शक्ति है
ज्योतिष नीलिमा जोशी ने कहा कि मेनिफेस्टेशन आपकी ही शक्ति है, इसलिए हमेशा अच्छा बोलें। अगर आप मन में अच्छा विचार रखते हैं तो जीवन में अच्छे परिणाम ही मिलते हैं।

क्यों जरूरी है शादी से पहले कुंडली मिलान ?
ज्योतिष नीलिमा जोशी ने कहा कि शादी से पहले कुंडली मिलाने से व्यक्ति के ग्रहों का पता चलता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार और गुणों का पता लगता है। यदि कुंडली न मिलाई जाए तो अक्सर समस्याएं होती हैं।

क्या है टैरो कार्ड
टैरो कार्ड रीडर लीजा गुप्ता ने बताया कि टैरो कार्ड भविष्य बताने का एक टूल है, जो व्यक्ति को यूनिवर्स से कनेक्ट करता है।
 

लव मैरिज के लिए उपाय नहीं विलींग पावर है जरूरी
लव मैरिज को लेकर टैरो कार्ड रीडर लीजा गुप्ता ने कहा कि उपाय करना सही नहीं है, उनका मानना है कि यदि दो लोग साथ में रहना चाहते हैं, तो उनकी विलींग पावर मजबूत होनी चाहिए। टैरो कार्ड रीडर ने आगे कहा कि व्यक्ति को उपाय नहीं हमेशा अपने कर्म पर भरोसा रखना चाहिए।

मन में रखें विश्वास
टैरो कार्ड रीडर लीजा गुप्ता कहा कि यदि हमारे मन में भरोसा है और हमें खुद पर विश्वास है, तो सभी कार्य समय पर अपने आप पर पूरे होते चले जाते हैं। 

ज्योतिष में बहुत शक्ति है
आचार्य शुभेष शर्मन ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान जैसा ज्ञान किसी के पास नहीं हैं। भारत में हर दिन एक नया त्योहार होता है, आज एकादशी है और महाकुंभ चल रहा है, ये सभी ज्योतिष गणना के आधार पर होता है, उन्होंने कहा कि ज्योतिष में बहुत शक्ति है। आचार्य शुभेष शर्मन ने बताया कि जब भी गुरु ग्रह वृषभ में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तब महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।

महाकुंभ है पुण्य स्थान 
आचार्य शुभेष शर्मन ने कहा कि महाकुंभ पाप धोने नहीं बल्कि पुण्य कमाने का स्थान है। यहां व्यक्ति स्नान करके पुण्य फल प्राप्त करता है।

महाकुंभ में कहां करें स्नान ?
आचार्य शुभेष शर्मन ने कहा महाकुंभ में आने वाले लोगों को गंगा, यमुना और सरस्वती नदी या उसके किनारे के पास कहीं भी जगह मिल जाए, वहां स्नान कर लेना चाहिए, क्योंकि यह सभी पवित्र स्थान है। उन्होंने कहा जो व्यक्ति महाकुंभ आ गया उसे वैसे ही पुण्य फल मिल गया है।

जो पौराणिक है, वही प्रामाणिक है'
आचार्य शुभेष शर्मन ने 'ज्योतिष शास्त्र और इतिहास' विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संसार में किसी भी कालखंड के बारे में सटीकता से जानना ज्योतिष के अलावा किसी वैदिक गणना के माध्यम से संभव नहीं है। देव गुरु बृहस्पति जब वृषभ राशि में होते हैं, तब प्रयागराज में कुंभ होता है। जो पौराणिक है, वह स्वयं ही प्रामाणिक है। मंगल की पृथ्वी से दूरी कितनी है, यह वैदिक गणित के माध्यम से संभव है। हमारे यहां शताब्दियों से तीर्थ यात्री आते रहें हैं।

आज प्रयागराज में 65 देशों से लोग आए हुए हैं। उनके लिए महाकुंभ जिज्ञासा और अनुसंधान का विषय है। लोग यहां पाप धोने नहीं आते, बल्कि पुण्य प्राप्त करने आते हैं। यह पुण्य अर्जित करने का अवसर है। संसार में भारतीय दर्शन से बड़ा कोई और दर्शन या सामाजिक सौहार्द का आयोजन नहीं है। जब आप महाकुंभ में स्नान करने आते हैं तो कोई आपका जाति-धर्म नहीं पूछता। प्रयाग वह भूमि है, जहां संस्कृति से लेकर स्वतंत्रता तक हर मुद्दे पर चर्चा होती थी। जो भी व्यक्ति भारतीय दर्शन में विश्वास रखता है, वह ज्योतिष से अपने आप जुड़ा होता है। एकादशी का उपवास करने वाले, मुहूर्त देखकर शुभ कार्य करने वाले और गर्भ संस्कार से लेकर अंतिम संस्कार को मानने वाले अपने आप ही ज्योतिष से जुड़े होते हैं।

'ज्योतिष और महाकुंभ में गुरुत्वाकर्षण है'
आचार्य शुभेष शर्मन ने कहा कि ज्योतिष हो या महाकुंभ, सारा विश्व इसके प्रति आकर्षित है। यही इसका गुरुत्वाकर्षण है। उन्होंने आगे कहा कि प्रयागराज तो गंगा जी का क्रीड़ा क्षेत्र है। यहां अमृत की बूंदें गिरी थीं। त्रिवेणी में अमृत बिंदु गुप्त रूप से मौजूद है। सरस्वती यहां अंतर्वाहिनी है। सरस्वती नदी कई जगहों पर गुप्त रूप से मौजूद है। हमने जो कुछ जाना है, हमारे वेदों-पुराणों से जाना है। ज्योतिष में दो बातें प्रमुख हैं। गणित और फलित। किसी विषय के विस्तार में उसके प्रचार का महत्वपूर्ण स्थान है।

एक छोटे से पंचाग ने हमें बताया कि महाकुंभ कब होने जा रहा है। अगर आपने किसी विषय को ठीक तरह से नहीं समझा तो उसके बारे में ठीक से नहीं बता पाएंगे। जब हम कुछ खरीदने के लिए जाते हैं तो उच्च गुणवत्ता वाली वस्तु ही लाते हैं। इसी तरह ज्योतिष शास्त्र में भी इस बात को समझना होगा। कौन ज्योतिष शास्त्र का श्रेष्ठ ज्ञाता है, यह समझना होगा। जब हम खराब वस्तु नहीं खरीदते तो खराब ज्ञान को भी ग्रहण न करें। ज्योतिष शास्त्र से बड़ा पर्यावरण हितैषी कुछ नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में फूलों-वृक्षों का भी उल्लेख है।

नक्षत्रों के पास होता है कर्मों का लेखा-जोखा
आचार्य अनिल वत्स ने कहा जब व्यक्ति अपना शरीर छोड़ता है, तो उसका पूरा डाटा नक्षत्रों के पास होता है। उन्होंने कहा नक्षत्रों पर हमारे इस जन्म के साथ-साथ पिछले जन्म के कर्म का भी हिसाब होता है। 

'पिछले जन्मों की यात्रा के रहस्यों को जानना जरूरी'
जीवन को दिशा देने वाले अद्भुत मंत्र' विषय पर कहा कि ज्योतिष को वेदों का निर्मल नेत्र कहा गया है। नेत्र यानी जो देख सके, जो अंधकार को मिटा सके। सत्य-झूठ का निर्णय कर सके। शुभ-अशुभ, पाप-पुण्य का बोध करा सके। जिस जीव ने शरीर धारण किया, वह पहले 27 तत्वों का होता है। मृत्यु 10 तत्व छीन लेती है। इनमें पांच तो पंचतत्व हैं और बाकी पांच पंचप्राण हैं। 17 तत्व तय करते हैं कि उनके माता-पिता कौन होंगे। 17 तत्वों से बना सूक्ष्म जीव मां के गर्भ में आता है। अपने पिछले जन्मों की यात्रा के रहस्यों को जानना जरूरी है। थॉमस अल्वा एडिसन भी अपने आविष्कारों को अपने साथ नहीं ले जा सके। यहीं पर ज्योतिष महत्वपूर्ण हो जाता है। ज्योतिष पिछले जन्मों की याद दिलाने वाला महाग्रंथ है।

'पिछले जन्मों की यात्राओं के कर्म नक्षत्रों में सुरक्षित रहते हैं'
अनिल वत्स ने कहा कि सूर्य संपूर्ण ब्रह्मांड की आत्मा है। गुरु यदि ज्ञान है तो उसे प्रस्तुत करने की व्यावहारिक क्षमता बुध है। शुक्र स्वतंत्र है, स्वच्छंद है, परपोषक है। बृहस्पति यम-नियमों का पोषक है। जब जीव अपना शरीर छोड़ता है तो उसके कर्मों की समस्त रूपरेखा नक्षत्रों के पास होती हैं। चंद्रमा मन है। यही मन नक्षत्रों के पास से गुजरता है। आपके पिछले जन्मों की यात्राओं के कर्म नक्षत्रों में सुरक्षित रहते हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव में पहुंचे। उन्होंने इस महोत्सव में हिस्सा लेने वाले ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया अभिनंदन
सम्मान समारोह के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस महोत्सव के आयोजन के लिए अमर उजाला समूह का अभिनंदन। प्रयागराज की धरती पर ज्योतिषियों का महाकुंभ होना और इतने प्रतिष्ठित ज्योतिषियों का यहां आगमन होना हमारे लिए गर्व की बात है।

वर्ष 2025 में महाकुंभ के अवसर पर जो संयोग बना है, वह 144 वर्ष बाद आया है। इसकी गणना ज्योतिषियों ने ही पंचांगों के माध्यम से की थी। यह संयोग अब 144 वर्ष बाद ही आएगा। इस महाकुंभ में कल्पवासी कठोर अनुष्ठान करते हैं। सभी अखाड़ों के शिविर यहां लगे हुए हैं। संत परंपरा से जुड़े सभी संत यहां पधारे हुए हैं। सभी का स्वागत है। तीसरा स्नान पर्व मौनी अमावस्या के दिन 29 जनवरी को होगा। दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी यहां आए थे और उन्होंने कई योजनाओं का लोकार्पण किया। फिर प्रयागराज में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई दौरे किए। पिछले दिनों उनके नेतृत्व में संपूर्ण कैबिनेट की बैठक प्रयागराज में ही हुई।

'अमर उजाला से ही मिली डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गौरव पथ की प्रेरणा'
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अमर उजाला इस तरह के प्रयास करता रहता है। इनमें रक्तदान और मेधावी छात्रों को अवसर देने की पहल शामिल है। मेधावी छात्रों के लिए अमर उजाला की पहल के बाद ही उत्तर प्रदेश सरकार की योजना डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गौरव पथ की प्रेरणा मिली। इसके तहत मेधावी छात्रों के घर-गांवों तक पक्की सड़क बनाई जाती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अब अमर उजाला मौजूद है। जीवांजलि और माय ज्योतिष के जरिए अमर उजाला ने डिजिटल पर अपनी पहल को आगे बढ़ाया है। ज्योतिष में समुद्र जैसी गहराई है। जितना जान पाएं, उतना कम है। भारतीय संस्कृति में ज्योतिष विज्ञान का बहुत महत्व है। अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव एक शुरुआत है।

'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' में आए वक्ता ने बताया ज्योतिष सनातम धर्म का और देश का बहुत बड़ा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हमें विश्व ज्योतिष दिवस मनाना चाहिए।

योग से लगता है महाकुंभ
आचार्य नीलम शर्मा ने कहा जब ज्योतिष के साथ नई पीढ़ी जुड़ती हैं, तो हमारा दायित्व बढ़ जाता है। उन्होंने कहा जब भी गुरु वृषभ में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तब ही महाकुंभ लगता है, क्योंकि योग बनता है, इसलिए योग का बड़ा योगदान होता है।

टेक्नोलॉजी से तालमेल रखें ज्योतिषाचार्य 
अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' में आए वक्ता ने कहा कि ज्योतिषियों की जिम्मेदारी है कि वह टेक्नोलॉजी से तालमेल बनाकर रखें।

सप्तशती का करें पाठ
आचार्य संतोष 'संतोषी'  ने कहा यदि कोई व्यक्ति अच्छा नहीं कमा पा रहा है, तो उसे एक बार अपनी कुंडली दिखा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षमता और कीमत खुद तय करनी चाहिए। साथ ही पूजा के समय हमेशा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यह देवी को प्रसन्न करने का पाठ है।

राह-केतु से डरने की नहीं है जरूरत 
आचार्य युवराज राजौरिया ने कहा राहु-केतु छाया ग्रह है, इनके प्रभाव से डरने की जरूर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई बार दूसरे ग्रह भी अच्छे परिणाम नहीं देते हैं, लेकिन राहु-केतु से वह फल प्राप्त होता है। इसलिए राहु-केतु ग्रह से भयमित होने की आवश्यकता नहीं है।

जो सोचा जाए वह भाग्य है 
आचार्य संतोष 'संतोषी' ने व्यक्ति के भाग्य को लेकर कहा कि जो सोचा जाए वह भाग्य है, और जो न सोचा जाए वही दुर्भाग्य है।

रेखाएं हमेशा सच बोलती हैं- आचार्य युवराज राजौरिया 
आचार्य युवराज राजौरिया ने बताया कि व्यक्ति के जीवन में तिलों का खास महत्व होता है। लेकिन तिल हाथ में किस जगह पर है, यह जानना भी जरूरी है। वहीं उन्होंने कहा कि हस्तरेखाएं व्यक्ति के जन्म से आती हैं, इनमें कोई गुंजाइश नहीं होती हैं, यह हमेशा सच बोलती हैं। 

क्या है पंच महापुरुष योग ?
आचार्य जीडी वशिष्ठ ने कहा कि राहु हमारी सोच है और केतु कर्म है। वहीं उन्होंने पंच महापुरुष के विषय में बताया कि मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र व शनि के कारण पांच विशिष्ट योग बनते हैं, जिन्हें 'पंच महापुरुष' योग कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे भाग्यशाली माना गया है।

सूर्य और चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय
आचार्य अनिल वत्स ने कुंडली में ग्रहों की स्थिति को मजबूत करने के लिए उपाय बताए। उन्होंने कहा यदि किसी जातक को कुंडली में चंद्रमा मजबूत करना है, तो वह अपनी माता के चरण स्पर्श करें। वहीं सूर्य को मजबूत करना है तो पिता के पैर छुएं, यह एक आसान तरीका है। 

पत्नी सुख के लिए करें ये उपाय
आचार्य अनिल वत्स कहते हैं कि एक कटोरी में जल लेकर उसमें दो इलायची डाल दें। अब एक मंत्र का जाप करें। मंत्र का जप करने के बाद उसमें फूंक मार दें और फिर उस जल को पी लें। ऐसा करने पर उस जल में मंत्र का प्रभाव उतर जाता है और जातक को अच्छे परिणाम मिलते हैं।
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आचार्य शुभेष शर्मन ने बताया दान का महत्व
आचार्य अनिल वत्स ने कहा कि ग्रहों का अपना औरा और विद्युत चक्र है। जलाशय में जैसे पत्थर फेंकते हैं तो भंवर उठकर अंतिम छोर तक जाता है। इसी तरह ग्रहों के लिए उपाय करने से समाधान मिलता है। चंद्रमा मां, सूर्य पिता, शुक्र पति या पत्नी का रूप होते हैं। शनि घर के कर्मचारी जैसे होते हैं।  इसी पर शुभेष शर्मन ने कहा कि या तो हम ग्रहों की वस्तुओं को अपनाते हैं या दूर करते हैं। वस्तुएं यानी रत्न, धातुएं या सजीव संबंधी। वस्तुओं को अपने से दूर करना यानी दान करना। जैसे- गोशाला में जाकर चारा दान करना या चने की दाल के साथ गुड़ खिलाना या बछड़े की सेवा करना। वैदिक ज्योतिष कहता है कि दान करें, लेकिन सही जगह करें और सही पात्र को दान करें।

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