Yoga Tips: योग कई बीमारियों का स्थाई उपचार है, जिसे हर उम्र, शारीरिक क्षमता का व्यक्ति कर सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए बच्चों को तो बचपन से ही योगासन के अभ्यास की आदत होनी चाहिए। योग बच्चों के लिए स्वास्थ्य और मानसिक विकास की दृष्टि से बहुत लाभकारी है। यह उनकी एकाग्रता, लचीलापन और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। लेकिन हर आसन बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होता। कुछ कठिन योगासन उनकी हड्डियों, मांसपेशियों और नाजुक अंगों पर दबाव डालते हैं, जिससे नुकसान की आशंका रहती है। ऐसे में माता-पिता को यह जानना जरूरी है कि कौन-से आसन बच्चों के लिए बचने योग्य हैं।
बच्चों को किन योगासन से बचना चाहिए
शीर्षासन
इसमें शरीर का पूरा भार सिर और गर्दन पर होता है। बच्चों की हड्डियां और स्पाइन पूरी तरह मजबूत नहीं होतीं, इससे चोट लग सकती है। सिर पर दबाव बढ़ने से चक्कर या चोट की संभावना रहती है।
सर्वांगासन
इसमें पूरा शरीर कंधों और गर्दन पर टिकता है। बच्चों में संतुलन की कमी होती है, जिससे गिरने और गर्दन में खिंचाव का खतरा रहता है। थायरॉयड ग्रंथि पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
चक्रासन
इस आसन में पीठ को पूरी तरह पीछे की ओर मोड़ना पड़ता है। बच्चों की रीढ़ लचीली जरूर होती है, लेकिन बार-बार करने से स्पाइनल इंजरी हो सकती है। हाथ-पैर की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
पद्मासन में लंबा ध्यान
छोटे बच्चों के घुटनों और टखनों की हड्डियां विकसित हो रही होती हैं। लंबे समय तक पद्मासन में बैठने से घुटनों में दर्द और अकड़न हो सकती है।
कर्णपीड़ासन
इस आसन में पैरों को सिर के पीछे मोड़कर कानों तक लाना होता है। बच्चों के लिए यह खतरनाक है क्योंकि यह रीढ़ और गर्दन को नुकसान पहुंचा सकता है। सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है।
बच्चों को कौन से योगासन करने चाहिए?
अगर आप चाहते हैं कि बच्चे की जीवनशैली में योग शामिल हो तो किसी बड़े या विशेषज्ञ की निगरानी में योगाभ्यास कराएं। साथ ही बच्चे को कुछ सुरक्षित और प्रभावी योगासन सिखाया जा सकता है। बच्चे ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, बालासन और शवासन जैसे हल्के योगासन कर सकते हैं, ये उनके लिए बेहतर और सुरक्षित हैं।