के चेयरमैन डॉ. अजय मुर्डिया ने कहा- नि:संतानता की समस्या से पीड़ित परिवारों को संतानों की सौगात देने देशभर में जगह-जगह आईवीएफ सेंटर खोल रहे हैं। क्योंकि, देश में नि:संतानता/बांझपन की दर 10-15 फीसदी तक है।
इंदिरा आईवीएफ इस बड़ी पीड़ा दर को अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और भ्रूण वैज्ञानिकों से लैस ज्यादा-से-ज्यादा सेंटर खोलकर कम करने का लगातार प्रयास कर रहा है। क्योंकि, संतान की इच्छा विवाहित जोड़ों सहित उनके परिजनों को होती है।
संतान के अभाव में अमूमन दंपती मानसिक-भावनात्मक तनाव में चले जाते हैं, क्योंकि, सामाजिक ताने-बाने की उलझनें भी परेशान करती हैं। उन्होंने बताया कि समस्या समाधान के लिए बुधवार को कोलकाता के ठाकुरपुर में 49वें और हरियाणा के गुरुग्राम 50वें इंदिरा आईवीएफ सेंटर की शुरूआत कर दी है। जहां दंपती बेहतरीन सुविधा के साथ संतान की सौगात प्राप्त कर सकेंगे।
इलाज सस्ता करने ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत
चेयरमैन डॉ. मुर्डिया ने बताया कि इस समस्या से सर्वाधिक ग्रामीण दंपती पीड़ित हैं। वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार देश-दुनिया में प्रजनन उम्र के 27.5 मिलियन दंपती नि:संतानता से ग्रस्त हैं। इनमें 40-50% नि:संतानता की वजह महिला में और 30-40% कारण पुरुषों में बढ़ा है।
हालांकि बड़ी बात यह है कि अब ग्रामीण दंपती भी इसके समाधान के लिए आईवीएफ तकनीक को बेहिचक अपनाने लगे हैं। लेकिन, आईवीएफ तकनीक की विशेषज्ञ सेवाओं से अभी-भी अमूमन गांव-कस्बे वंचित हैं।
इस फासले को पाटने के लिए आईवीएफ स्पेशलिस्ट और भ्रूण वैज्ञानिकों की संख्या में इजाफा करने की जरूरत है। कौशल को अपग्रेड करने के लिए भी अधिक ट्रेनिंग प्रोग्राम करने की जरूरत है। हमें अभिनव घरेलू ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत है ताकि आईवीएफ ट्रीटमेंट की लागत में कमी की जा सके।