शरीर को फिट रखने के लिए योग और आसनों का अपना ही अलग महत्व होता है। कई ऐसे योगसन हैं, जिनका नियमित अभ्यास करने से शरीर फिट और स्वस्थ बना रहता है। गोरक्षासन भी ऐसे ही एक आसनों में से एक है। इसके नियमित अभ्यास करने से बवासीर और पेट के रोगों में भी लाभ मिलता है।गोरक्षासन से शरीर की स्थूलता समाप्त होती है। शरीर की कमजोरी से होने वाले बवासीर, धातुक्षय आदि जैसे रोग दूर होते हैं। मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, पाचन क्रिया सही होती है।
आसन को करने का सही तरीका-
इस आसन को करने के लिए सांस लेते हुए दोनों घुटनों को मोड़ें और तलवों को आपस में सटा लें। अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथ जमीन पर टिकाकर शरीर ऊपर उठाएं और दोनों पैरों के पंजों पर इस प्रकार से बैठें कि शरीर का वजन एड़ी के ठीक बीच में पड़े। पुनः श्वास भरते हुए दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें। अंत में सांस रोककर ठोढ़ी को छाती से सटाएं। कुछ पल बाद सहज श्वास के साथ सामान्य स्थिति में लौट आएं। घुटने, एड़ी का दर्द या चोट होने पर न करें। मोटे लोग भी न आजमाएं।
किन लोगों को नहीं करना चाहिए गोरक्षासन
-जिन लोगों के घुटनों में दर्द की समस्या है उन्हें गोरक्षासन नहीं करना चाहिए।
-अगर एड़ी में दर्द की समस्या है, तो ये योगासन न करें।
-आंतों के रोगों और थायरॉइड के कारण मोटापा है, तो ये योगासन न करें।