World Population Day 2025: विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों, संसाधनों पर बढ़ते दबाव, परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, गरीबी और मानवाधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। 2023 के अनुमान के अनुसार, भारत की जनसंख्या 1.4 अरब के करीब है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, और 2030 तक भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश बनने की संभावना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े और घनी आबादी वाले देशों में से एक है। जनसंख्या के मामले में भारत केवल चीन से पीछे है, लेकिन भविष्यवाणी की जाती है कि आने वाले वर्षों में हम चीन को भी पीछे छोड़ सकते हैं। इसके कारण होने वाली गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। लेख में बढ़ती आबादी के असर, जनसंख्या के नियंत्रण से जुड़े तथ्य और विश्व जनसंख्या दिवस मनाने के महत्व और इस वर्ष की थीम के बारे में जानिए।
विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा की गई थी। 11 जुलाई, 1987 को वैश्विक जनसंख्या 5 अरब तक पहुंच गई थी। इसे 'पांच अरब दिवस' के रूप में याद रखा गया। इसी की प्ररेणा से 11 जुलाई1987 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत हुई। तब से हर साल 11 जुलाई को यह दिन मनाया जाता है ताकि जनसंख्या वृद्धि के कारण होने वाली समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
विश्व जनसंख्या दिवस 2025 की थीम क्या है?
विश्व जनसंख्या दिवस 2025 की थीम है "Empowering young people to create the families they want in a fair and hopeful world." यानी युवा लोगों को एक निष्पक्ष और आशापूर्णा दुनिया में अपनी मनचाही फैमिली बनाने के लिए सशक्त बनाना है।
विश्व जनसंख्या दिवस का महत्व
- परिवार नियोजन की जागरूकता को बढ़ावा देना।
- महिलाओं और युवाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देना।
- बढ़ती जनसंख्या के प्रभाव पर नीति-निर्माताओं और आम जनता का ध्यान खींचना।
- प्राकृतिक संसाधनों की सीमितता और उनका संरक्षण।
- स्थायी विकास लक्ष्यों की ओर जागरूकता बढ़ाना।