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World Heritage Day 2025: कब और क्यों मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस, जानिए इतिहास और इस साल की थीम

Tue, 15 Apr 2025 01:29 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

तमाम देशों के इतिहास, उनकी संस्कृति और कला के सबूत को जीवित रखने वाले इन स्थलों को विरासत या धरोहर कहा जाता है और इनके संरक्षण व प्रचार प्रसार के लिए विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। 
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विश्व धरोहर दिवस 2025 - फोटो : Freepik
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विस्तार
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World Heritage Day 2025 : किसी भी देश के लिए उसकी धरोहर या विरासत वह होती है जो उसके अतीत और गौरव गाथा को बयां करती हो। तात्कालिक समय में स्मारक और स्थल थे जो स्थान के अतीत की कहानी को आज तक समाहित किए हुए हैं। युद्ध, महापुरुष, कला और संस्कृति आदि को इतिहास के पन्नों पर दर्ज करने के साथ ही उनके सबूत के रूप में इन स्मारकों व स्थलों का सदैव जीवित रहना जरूरी है। इसी कारण विश्व धरोहर दिवस मनाने की जरूरत को महसूस किया गया। तमाम देशों के इतिहास, उनकी संस्कृति और कला के सबूत को जीवित रखने वाले इन स्थलों को विरासत या धरोहर कहा जाता है और इनके संरक्षण व प्रचार प्रसार के लिए विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। 

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विश्व धरोहर दिवस कब मनाया जाता है?

हर साल विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इस विश्व विरासत दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व स्मारक दिवस के तौर पर हुई थी। हालांकि बाद में यूनेस्को ने इस को विश्व धरोहर दिवस या विश्व धरोहर दिवस के रूप में बदल दिया।

विश्व धरोहर दिवस का इतिहास

पहली बार 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने विश्व की सभी प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा का प्रस्ताव रखा था, जिसे स्टाॅकहोम में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पारित किया गया। बाद में जब यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना हुई तो 18 अप्रैल 1978 में विश्व स्मारक दिवस मनाने की शुरुआत की गई। तब सिर्फ 12 स्थलों को ही विश्व स्मारक स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।
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पहली बार कब मनाया गया धरोहर दिवस

चार साल बाद 18 अप्रैल 1982 को ट्यूनीशिया में 'इंटरनेशनल काउंसिल आफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स' ने सबसे पहले विश्व धरोहर दिवस मनाया। एक साल बाद 1983 नवंबर महीने में यूनेस्को ने स्मारक दिवस को विश्व धरोहर दिवस के तौर पर मनाने की मंजूरी दी। उसके बाद हर साल 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस दुनियाभर में मनाया जाने लगा।

विश्व धरोहर दिवस 2025 की थीम

हर साल धरोहर दिवस की एक खास थीम होती है। साल 2024 में विश्व विरासत दिवस की थीम विविधता की खोज और अनुभव थी। वहीं इस साल विश्व धरोहर दिवस 2025 की थीम है आपदाओं और संघर्षों से खतरे में पड़ी विरासत: ICOMOS की 60 वर्षों की कार्रवाइयों से तैयारी और सीख।

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क़िला - फोटो : Adobe
विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने का लाभ

जब यूनेस्को किसी स्मारक या स्थल को धरोहर घोषित करता है तो उसके बाद उस जगह का नाम विश्व में काफी मशहूर हो जाता है। जिस वजह से वहां विदेशी पर्यटकों का आवागमन भी काफी बढ़ जाता है, जिसका लाभ सीधा देश की अर्थव्यवस्था को मिलता है। विश्व धरोहर घोषित होने के बाद उस जगह का खास ध्यान रखा जाता है और उसकी सुरक्षा भी बढ़ा दी जाती है। यदि ये स्मारक ऐसे देश में है, जिसकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है, तो यूनेस्को ही स्मारक की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है। 

विश्व धरोहर का चयन कैसे होता है?

शुरुआत में विश्व स्मारक दिवस मनाया गया, जिसमें 12 स्मारकों को शामिल किया गया लेकिन आज धरोहरों की सूची में कई स्मारक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों का नाम है। अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद और विश्व संरक्षण संघ ये दो संगठन है, जो इस बात का आकलन करते हैं, कि स्थल विश्व धरोहर बनने लायक है या नहीं। साल में एक बार इस विषय के लिए समिति बैठती है और जगहों का चयन करती है। जगह का चयन करने के बाद दोनों संगठन इसकी सिफारिश विश्व धरोहर समिति से करते हैं। फिर ये फैसला लिया जाता है कि जगह को विश्व धरोहर बनाना है या नहीं।

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