अक्सर आपके दफ्तर में लोग झगड़ते होंगे कि एसी का तापमान कितना होना चाहिए। किसी को ज्यादा ठंडा चाहिए, तो किसी को तापमान कम होने पर ठंड लगने लगती है। अगर आपके दफ्तर में ऐसा होता है तो ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं।
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दुनिया भर के दफ्तरों में ये झगड़ा बहुत आम है। अमरीका में हाल में कई दफ्तरों में सर्वे हुआ। इस सर्वे में पता चला कि 42 फीसद लोगों ने अपने दफ़्तर के माहौल को ज्यादा गर्म बताया। वहीं 56 फीसद का मानना था कि उनका दफ्तर कुछ ज्यादा ही ठंडा रहता है। यानी 98 फीसद अपने दफ्तर के तापमान से नाखुश थे।
दिल्ली हो या मुंबई, लंदन हो या सिंगापुर, या फिर न्यूयॉर्क, अक्सर दफ्तरों में एसी के तापमान पर बहस छिड़ी रहती है। सिंगापुर में काम करने वाले एई लिंग चैंग को बड़े दिलचस्प तजुर्बे हुए हैं। उनके एक ऑफिस में एक महिला अपनी कुर्सी से तमाम कपड़े बांधकर रखती थी, ताकि उसे ठंड न महसूस हो।
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वहीं एक और साथी कर्मचारी था, जो हर थोड़ी देर के बाद शौचालय जाकर अपने सारे कपड़े उतारकर कुछ देर वहां बैठता था, ताकि दफ्तर के गर्म माहौल से राहत महसूस कर सके। दफ्तर में कर्मचारी अच्छा महसूस कर सकें, ये मामूली बात नहीं। इस बहस में हर साल दफ्तर का दो फीसद वक्त बर्बाद होता है।
एक तजुर्बे से पता चला है कि अगर दफ्तर का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस होता है
ऑफिस का उचित तापमान
- फोटो : BBC
ब्रिटेन में इस बहस से अर्थव्यवस्था को सालाना 13 अरब पाउंड का नुकसान होता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में हर साल भयंकर गर्मी में दफ्तर ठंडा रखने में छह अरब डॉलर से ज्यादा का खर्च आता है। दफ्तर में सही तापमान होने से कर्मचारियों का मूड अच्छा होता है।
वो सहयोग की भावना से अच्छा काम करते हैं। वहीं, तापमान सही न हुआ तो लोग मोटे हो जाते हैं। कई बार गंभीर रूप से बीमार भी पड़ जाते हैं। फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग को सर्द माहौल पसंद है। जहां वो मीटिंग करते हैं, वहां का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है।
वहीं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने दफ्तर को इतना गर्म रखते हैं कि कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि आप वहां ऑर्किड उगा सकते हैं। वैसे, दफ्तर का तापमान ऐसा कभी हो ही नहीं सकता जिससे सब खुश हों। किसी को ज्यादा गर्मी लगेगी, तो कोई तुरंत ठंडक महसूस करने लगेगा। बहुत सी कंपनियों ने ये पता लगाने में अरबों डॉलर खर्च किए, मगर नतीजा सिफर ही निकला।
कर्मचारियों को अच्छा महसूस कराना अलग बात है। उनसे बेहतर काम लेना अलग बात। कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ जाए, इसके लिए 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे सटीक माना जाता है। एक तजुर्बे से पता चला है कि अगर दफ्तर का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस होता है तो कर्मचारियों की टाइपिंग की रफ्तार कम हो जाती है और वो गलतियां ज्यादा करते हैं।
27 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर हमारा गणित गड़बड़ा जाता है
ऑफिस का उचित तापमान
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लेकिन इस नतीजे पर पहुंचना इतना आसान भी नहीं। कुछ बच्चों से 19 डिग्री सेल्सियस और 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में अलग-अलग पूछा गया कि सबसे अच्छा मोबाइल प्लान कौन सा होगा? तो उनका जवाब एकदम अलग था।
19 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले कमरे में बैठे छात्रों का जवाब ज्यादा सटीक निकला। वैसे सही तापमान आपके सोचने का तरीका बदल देता है। गर्म माहौल में आप ज्यादा क्रिएटिव हो जाते हैं। वहीं सर्द माहौल में आप चौकन्ने होकर काम करते हैं 27 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर हमारा गणित गड़बड़ा जाता है।
तापमान का हमारे बर्ताव पर असर पड़ता है। गर्म माहौल में हम एक दूसरे के प्रतिगर्मजोशी महसूस करते हैं। एक दूसरे से सहयोग करने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं। गर्म कॉफी का कप पकड़कर भी आप साथ काम करने वालों के बारे में अच्छा सोचने लगते हैं।
वहीं कोल्ड कॉफी का इसके उलट असर होता है। टाइप करने, ग्राहकों को कॉल करने, दस्तावेजों की पड़ताल करने के लिए दफ़्तर का सही तापमान 22 डिग्री सेल्सियस होता है। वैसे ये कोई सटीक दावा नहीं। अमरीका में हुए एक सर्वे के मुताबिक महिलाओं को मर्दों से ज्यादा गर्म माहौल में काम करना पसंद है।
महिलाएं जिस औसत तापमान में काम करना पसंद करती हैं, वो आदमियों से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा होता है। इसकी वजह महिलाओं के शरीर की बनावट होती है। महिलाओं के कम मांसपेशियां होती हैं। उनके बदन में वसा भी ज्यादा होती है, इसी वजह से वो ज्यादा गर्म माहौल पसंद करती हैं।
ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है, मोटापे को बढ़ावा देता है
ऑफिस का उचित तापमान
- फोटो : BBC
वैसे हमेशा नियंत्रित माहौल में रहना हमारी सेहत के लिए नुकसानदेह है। ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है, मोटापे को बढ़ावा देता है। हल्के गर्म और हल्के सर्द माहौल में रहकर आप एक तरह से वर्जिश करते हैं। जो आपके खाना पचाने की ताकत को बढ़ाता है और आपके दिल को भी मजबूत करता है।
वहीं बहुत गर्म या बहुत ठंडे माहौल में काम करना नुकसानदेह हो सकता है। अगर आपके दफ्तर में तापमान बहुत ज्यादा रहता है तो आप बाकी साथियों के साथ मिलकर इसकी शिकायत कर सकते हैं। जैसे कि ऑस्ट्रेलिया में अगर दफ़्तर का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है तो कर्मचारियों को हर घंटे आधे घंटे का ब्रेक लेने की छूट मिलती है।
तो आप भी अपने दफ्तर का तापमान कम करने की मांग कर सकते हैं। वैसे तकनीक की तरक्की के साथ हम एक ही दफ्तर में अलग-अलग तापमान वाले इलाके बना सकते हैं। तो आगे चलकर ये गर्मी या सर्दी का झगड़ा हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।
मगर, सवाल फिर वही है, कि दफ्तर के लिए आदर्श तापमान क्या होना चाहिए? सिंगापुर के पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू इसे 22 डिग्री सेल्सियस मानते थे। उन्होंने अपने देश की कामयाबी का श्रेय एयर कंडीशनर को दिया था। वैसे जानकार कहते हैं कि 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस का तापमान ऐसा है, जिसमें बहुत कम लोग शिकायत करेंगे।