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Minimalist Lifestyle:कम चीजों और खर्च में कैसे मिलता है आरामदायक जीवन, जानें मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल के बारे में

Fri, 14 Feb 2025 05:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

कहते हैं, ‘कम इच्छाएं रखना और जो आपके पास है, उससे संतुष्ट रहना जीवन को सरल बनाता है।’ बस, इसी सरल जीवन की चाह में लोग अब मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल को अपना रहे हैं।
 
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मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल - फोटो : istock
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विस्तार
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विनीता

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अनुजा अभी-अभी सोसाइटी की सेक्रेटरी चुनी गई है। उसे अपनी इस उपलब्धि की बेहद खुशी है, जिस वजह से उसने घर पर एक छोटी-सी पार्टी भी रखी है। पार्टी में उसने सोसाइटी में रहने वाले सभी लोगों को बुलाया है। अनुजा की सोसाइटी की कई सहेलियां पहली बार उसके घर भी आई हैं।

सान्या भी उन्हीं में से एक है, लेकिन जैसे ही सान्या ने अनुजा का किचन देखा, वह हैरान रह गई। उसने देखा कि अनुजा का भरा-पूरा परिवार होने के बाद भी उसका किचन बहुत खाली है। उसके किचन में उतने ही बर्तन हैं, जितने लोग हैं। कोई भी बेफिजूल की चीज उसके किचन में नहीं है, जबकि सान्या के किचन में सब कुछ है, जैसे कि ब्लेंडर, आटा गूंथने के लिए मिक्सर, माइक्रोवेव ओवन ग्रिलर, टोस्टर, मसाला ग्राइंडर, कॉफी मेकर, इलेक्ट्रिक केतली, स्मूदी मेकर, काटने-छीलने-पीसने के लिए फूड प्रोसेसर, वैक्यूम सीलर, आयरन ग्रिल, तवा, स्लो कुकर और प्रेशर कुकर, साथ ही छोटे से लेकर बड़े तक हर साइज के बर्तन आदि।
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अनुजा का किचन देख सान्या से रहा नहीं जा रहा था कि कोई कैसे इतने कम सामान के साथ जीवन निर्वाह कर सकता है। इसलिए जैसे ही पार्टी खत्म हुई, सान्या ने अनुजा से पूछ ही लिया। सान्या के इस प्रश्न पर अनुजा ने कहा, “मैं भी तुम्हारी जैसी ही थी, लेकिन फिर मैंने मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल को अपना लिया।” सान्या अचरज में पड़ गई और धीमे से बोली, “आखिर यह मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल है क्या?”

क्या है मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल

मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल का मतलब है- कम चीजें, कम खर्च, कम काम, कम बोझ और आरामदायक जीवन। यह जीवन-शैली आपको जिंदगी में केवल आवश्यक और महत्वपूर्ण चीजें रखना सिखाती है, जिससे अव्यवस्था कम हो और मानसिक शांति मिले। इसमें अनावश्यक भौतिक वस्तुओं से बचते हुए अच्छे अनुभवों और रिश्तों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह जीवन को सरल, तनाव मुक्त और संतुलित बनाती है। मिनिमलिज्म यानी कम-से-कम का उद्देश्य केवल भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि विचार, समय और ऊर्जा का भी समझदारी से प्रबंधन करना है। यह सुरक्षा, व्यक्तिगत संतोष और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद करता है, जिससे आप को जीवन अर्थपूर्ण लगता है।

जब जागो, तभी सवेरा

प्रदर्शनप्रियता और फिजूल-खर्ची से होने वाले नुकसान के कारण अब लोग धीरे-धीरे यह समझने लगे हैं कि अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह करना समय और धन की बर्बादी है। आजकल लोग सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रहे हैं। वे महंगी और आकर्षक दिखने वाली चीजों से दूर होने लगे हैं और सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए इको फ्रेंडली वस्तुओं का इस्तेमाल करने लगे हैं।

अक्सर ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं कि कोई व्यक्ति लाखों के सैलरी पैकेज और महानगर के विलासितापूर्ण जीवन को छोड़कर गांव में जाकर बिना किसी खाद और कीटनाशक के ऑर्गेनिक खेती कर रहा है। यहां तक कि कुछ लोग पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी के घर भी बना है, जहां गर्मियों में एसी जैसे उपकरणों की जरूरत महसूस नहीं होती। लोग अब यह बात समझने लगे हैं कि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए सादगीपूर्ण जीवन-शैली अपनाना बहुत जरूरी है। इसलिए कुछ जागरूक लोग विवाह जैसे सामाजिक समारोहों में भोजन परोसने के लिए प्लास्टिक की डिस्पोजेबल प्लेट और ग्लास का इस्तेमाल करने के बजाय पत्तलों और मिट्टी के कुल्हड़ का इस्तेमाल करते हैं। आजकल शहरों के अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों में एक के बजाय दो गाड़ियां होती हैं, लेकिन सेहत के प्रति जागरूक लोग अब छोटी दूरी के लिए साइकिल का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे प्रदूषण नहीं होता और साथ ही ऊर्जा के संसाधनों की भी बचत होती है।

बदल रहीं आदतें

पहले महिलाएं किसी विवाह या पार्टी में एक या दो बार पहनी गई ड्रेस को दोबारा पहनने से कतराती थीं, लेकिन अब नए तरीके से, नए स्टाइल के साथ उन्हें कई बार पहन रही हैं। यहां तक कि बॉलीवुड की कुछ सेलिब्रिटीज भी एक बार पहनी हुई ड्रेस को दोबारा पहनकर लोगों के सामने सादगी की मिसाल पेश कर रही हैं।

हाल ही में अभिनेत्री आलिया भट्ट ने मनीष मल्होत्रा की दिवाली पार्टी में मेहंदी का लहंगा दोबारा पहना तो लोगों ने न केवल उनकी इस पहल की प्रशंसा की, बल्कि निजी जीवन में भी इस अच्छी आदत को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। महानगरों में अधिकतर लोग फ्लैट्स में रहते हैं। उनके पास इतनी जगह नहीं होती कि वे एक साथ ज्यादा चीजें रख सकें। ऐसे में वे कपड़े, बर्तन और घरेलू उपकरण जरूरतमंदों के बीच बांट देते हैं। कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस नेक कार्य में लोगों की सहायता करती हैं।

हम कह सकते हैं कि अब वह जमाना धीरे-धीरे जा रहा है, जहां केवल दिखावे के लिए घर में अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह कर लिया जाता था। आज के समय में अधिकतर लोग ऐसी चीजें खरीदने लगे हैं, जिनकी उन्हें वाकई जरूरत होती है। यहां तक कि आज की नई पीढ़ी ब्राइडल ड्रेस से लेकर ज्वेलरी और सैंडल तक किराए पर लेने लगी है। वह माता-पिता की जीवन-शैली से सीख लेकर आगे बढ़ रही है और एक शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करना चाहती है।

कैसे करें खुद को तैयार

मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए खुद को तैयार करें और सबसे पहले अपनी प्राथमिकताओं को समझें। अनावश्यक चीजों और भावनाओं से मुक्त होकर सिर्फ वही रखें, जो आपको सच में जरूरी और उपयोगी लगे। सामान को कम करने के लिए मानसिक रूप से अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें और अव्यवस्था से दूर रहें। साधारण और शांत जीवन-शैली अपनाने की कोशिश करें, जिसमें कम चीजों के बावजूद खुशी और संतोष मिले। अपने समय को सही दिशा में निवेश करें और हर दिन की शुरुआत सकारात्मकता से करें। इसके अलावा शॉपिंग से पहले हमेशा जरूरी सामानों की एक सूची बनाएं और उसके अनुसार ही खरीदारी करें, ताकि आप बेफिजूल की चीजें न खरीदें।

जरूरतें घटाएं, खुश रहें

समाजशास्त्री डॉ. ऋतु सारस्वत कहते हैं, आज के दौर में बाजार लोगों की प्रदर्शन प्रियता की आदत को बखूबी पहचानता है। इसी का फायदा उठाते हुए लोगों के लिए कई तरह के ऐसे प्रॉडक्ट उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनकी वास्तव में कोई जरूरत नहीं होती। लेकिन सामाजिक दबाव में आकर केवल दिखावा करने के लिए लोग घर में अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह करते हैं। मगर अब धीरे-धीरे इस सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो रही है।

कुछ लोग यह समझने लगे हैं कि असली खुशी वस्तुओं और धन के संग्रह से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए मन का सुकून और संतुष्टि जरूरी है। इसलिए अगर आप भी अपने जीवन में सच्ची खुशी चाहती हैं तो धन के प्रदर्शन और अनावश्यक वस्तुओं को खरीदने से दूर रहें। जब आप एक मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अपनाती हैं तो आपको मानसिक शांति का अहसास होता है, क्योंकि आप बेफिजूल के खर्च नहीं करतीं और आपको अन्य योजनाएं बनाने में परेशानी नहीं होती है।

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