पैसा, पैसा, पैसा। हर ओर इसे बटोरने की आपाधापी और कमाने की होड़ लगी हुई है। बहुते सारे लोग इसके लिए कुछ भी करने से गुरेज नहीं करते। पैसा कमाने के लिए गलाकाट प्रतिस्पर्धा है। किसी ने कहा था, ''यह सच है कि पैसा खुदा नहीं है, लेकिन खुदा कसम, खुदा से कम भी नहीं है।'' वर्तमान में यह बात सौ फीसदी सटीक लगती है। हालांकि, केवल पैसा आ जाना ही काफी नहीं है। पैसे को संभालकर रखना और उसका सदुपयोग करना भी उतना ही जरूरी है। आचार्य चाणक्य के अनुसार, अगर धनपति कुबेर भी अपनी आय से ज्यादा खर्च करें, तो कंगाल हो जाएं। ऐसे में पैसे की बचत करना बहुत जरूरी है।
समझिए महत्व
पैसा कमाने की होड़ में लोग इस कदर लगे हैं कि उनके जीवन से शांति दूर होती जा रही है। हर वक्त वे अपने पैसे को दोगुना-चौगुना करने के बारे में ही सोचते रहते हैं। इस चक्कर में रिश्ते-नाते भी पीछे छूट जाते हैं। क्या हम थोड़े में ही खुश नहीं रह सकते हैं? क्या आज सचमुच लोग भौतिक चीजों की बेदी पर अपने 'सच्चे जीवन' को भेंट चढ़ा रहे हैं? खाना, कपड़ा और सिर छुपाने के लिए कुछ जगह। बस इतना ही महत्व है पैसे का। याद रखिए कि पैसों से तमाम सुख सुविधाएं तो खरीद सकती हैं, लेकिन मन की शांति नहीं।
दाल में नमक जितनी
संत कबीर कहते हैं, ''साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाए॥''
यानी जिस प्रकार दाल में नमक कम होने से स्वाद नहीं आता और ज्यादा होने से स्वाद गड़बड़ा जाता है। ठीक उसी प्रकार जीवन में पैसे की दरकार होती है। पैसे से आलीशान घर, अच्छे-अच्छे कपड़े, चमक-दमकवाला साज-सज्जा का सामान खरीदा जा सकता है। पैसे में बस इतना ही देने की ताकत है। इससे ज्यादा पैसा आपको कुछ नहीं दे सकता है। जीवन में हमें जिन चीजों की ज्यादा जरूरत है, वे पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं।
सब कुछ और कुछ नहीं
जीवन में पैसे के महत्व के दो पहलू हैं, पैसा ही सब कुछ है, पैसे के बिना कुछ नहीं। इसे यूं समझिए। एक बार अमीर शख्स जंगल में फंस जाता है। उसे प्यास लग जाती है और आस-पास पानी का कोई स्रोत नहीं होता। उसे एक आदमी मिलता है, जिससे वह पानी मांगता है, परंतु वह पानी देने से इंकार करता है। अंत में अमीर आदमी उस राहगीर को पानी के बदले अपनी सारी दौलत देने को तैयार हो जाता है। पानी की प्यास ने एक ही क्षण में अमीर को रंक बना दिया व राहगीर को अमीर बना दिया। अमीर आदमी, जो पहले सोचता था कि पैसा ही सब कुछ है, उसे यह भी पता चल गया कि पैसा ही सब कुछ नहीं है। क्योंकि अगर पैसा ही सब कुछ होता तो वह पानी के लिए अपनी सारी दौलत उस राहगीर को नहीं देता।
क्यों करनी चाहिए पैसे की कद्र
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क्यों करते हैं पैसे की कद्र
पैसे का महत्व इस बात से बढ़ता है कि हमारी जरूरत कितनी बड़ी है। अगर हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, तो उस वक्त पैसा हमारे लिए सबसे बड़ी चीज हो सकता है। इसके बाद अगर हमारे पास पहनने के लिए कुछ नहीं है, तो पैसा थोड़ा घटे कद के साथ हमारे सामने आकर खड़ा होता है। हमारी जरूरतों की प्राथमिकता जिस हिसाब से बदलती जाती है, पैसे का महत्व भी उस हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है।
बेमोल को भी प्रभावित
पैसे के बारे में एक आम राय है कि हर चीज पैसे से नहीं खरीदी जा सकती। हालांकि, जो चीजें पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं, उन्हें भी पैसा कहीं न कहीं प्रभावित करता ही है। उदाहरण के लिए मां का प्यार पैसे से नहीं खरीदा जा सकता, लेकिन मां भी अपने बेरोजगार बेटे को लानत-मलानत देती रहती है। बेशक, ऐसा वह उसके भले के लिए करती है, लेकिन यह भला भी पैसा कमाने से ही शुरू होता है।
एक बहुत ही मशहूर फिल्म के नायक ने कहा था, "लालच कामयाबी की सीढ़ी है। लालच करना फायदेमंद है।" बरसों से पैसे के प्रति लोगों के रवैये में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। ऐसा देखा गया है कि दुनिया भर के लोग, अपना अधिकतर समय और ताकत ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने और भौतिक चीजों को बटोरने और इस्तेमाल करने में लगा देते हैं। कई सामाजिक अध्ययन भी कुछ इस तरह के दिलचस्प नतीजे पर पहुंचे हैं।
पैसों के प्रति आपकी सोच
पैसे को संजोती रहती हैं? वर्तमान में जीती हैं? कंजूस हैं? बजट बनाती हैं? फिजूलखर्ची का सोचती तक नहीं? तवज्जो देती हैं कि पैसा कैसे चौगुना हो? बैंक बैलेंस का पूरा मजा लेती हैं? सिर्फ मुसीबत के समय से निपटने के लिए बचत करती हैं? पैसों के लिए जोखिम उठाती हैं? कम पैसे होते हुए भी दिलेर हैं?
जवाब हां या नहीं। दोनों ही परिस्थिति में आपका पैसा आपके बारे में बहुत कुछ बताता है। पैसों को खर्च करने के तौर-तरीके अथवा बचत करने की प्रवृत्ति आपके व्यक्तित्व के कई राज खोलती है। जानते हैं एक क्विज के जरिए कि पैसा खर्चने की आदत आपके व्यक्तित्व के बारे में क्या कुछ बताती है और कैसा वित्तीय जानवर आपके भीतर छिपा है। यह क्विज एक कंपनी ने तैयार किया है।
1. अगर आपको खजाना मिलता है, तो इतने पैसे का क्या करेंगी?
हॉलीडे पर खर्च करेंगी (ए) बचत में रखेंगी (बी)
अधूरी इच्छाओं को पूरा करेंगी या शॉपिंग करेंगी (सी) इसे निवेश करेंगी (डी)
2. क्या आप अक्सर दोस्तों और परिवार पर पैसा खर्च करती हैं?
हां, सिर्फ जिनसे मैं प्यार करती हूं (ई) कभी-कभी (डी)
नहीं। मेहनत से कमाती हूं, तो सिर्फ नहीं। लेकिन पैसा होने पर उनपर
स्वयं पर खर्च करती हूं (एफ) खर्च करना चाहती हूं (जी)
3. यदि सड़क पर 100 रुपया पड़ा दिखे, तो क्या करेंगी?
उठा लेंगी और जेब में डालेंगी (एफ) अनदेखा कर देखेंगी (जी)
जिसके पैसे गिरे होंगे उसे खोजेंगी (ए) बिना सोचे-समझे दान कर देंगी (ई)
4. वित्तीय सुरक्षा आपके लिए क्या मायने रखती है?
चिंता की कमी (बी) खुशी (एच)
पावर (एफ) कुछ भी खरीदने में सक्षम (पी)
5. क्या अपने बैंक बैंलेंस की विधिवत जानकारी होती है?
हां, अंतिम पैसे तक (एफ) हां, मोटे तौर पर (आई)
नहीं, बैलेंस की तरफ देख तक नहीं सकती (जी) नहीं और यह मुझे परेशान नहीं करती है (सी)
6. क्या आप स्वयं को जोखिम लेने वाली मानती हैं?
हां, जोखिम लेना रोमांचक है (ए) कहीं बीच में (डी)
नहीं, जोखिम लेना भयभीत कर देता है (पी)
7. अपनी आर्थिक स्थिति पर दोस्तों के साथ चर्चा करती हैं?
हां, आर्थिक स्थिति को छिपाता नहीं हूं (एफ) हां, असहज महसूस करती हूं (बी)
नहीं, बातचीत के लिए इससे इतर कई विषय हैं (जी) नहीं, मेरा निजी मामला है (सी)
8) आप तांबे के साथ क्या करती हैं?
कूड़े में फेंक देती हैं (एच) किसी सुरक्षित जगह पर संजोकर रख देती हैं (डी)
बेचकर मिले पैसों को खर्च कर देती हैं (आई) दान कर देती हैं (ई)
9) आप पैसा बचाने में जुटी हैं। किसी जरूरी मीटिंग में पहुंचने में लिए देर हो रही है। तब क्या करेंगी?
बस से ही सफर करेंगी। कारण बस से पैसे कम खर्च होंगे। (बी)
भले ही थोड़ी देर हो जाए। लोकल ट्रांसपोर्ट का इंतजार करेंगी। (एल)
मौके की नजाकत को समझेंगी और कैब बुक करेंगी। (सी)
बेमोल को भी प्रभावित
गिलहरी की तरह आपको सिर्फ बचत पसंद है
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परिणाम
अधिकांश ए: यह प्रवृत्ति कंगारू जैसी मानी जाती है। यानी पैसा कमाने में अधिक विश्वास रखती हैं, बचाने में कम। आपके लिए पैसा मौज-मस्ती का साधन है। अपनी इच्छाओं की पूति करती हैं। साथ ही पैसों के साथ जोखिम लेने में घबराती नहीं हैं।
अधिकांश बी: आप आर्थिक मामलों में बोंगो जानवर जैसी हैं। यानी हर पल अपने बैंक बैलेंस पर पैनी नजर रखती हैं और अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार ही खर्च करती हैं।
अधिकांश सी: आप कैसोवरी जानवर के जैबेमोल को भी प्रभावितसी मस्तमौला हैं। दिल खोलकर जीती हैं। दिल खोलकर पैसा खर्च करती हैं। अपना पैसा खर्च करते समय मन मसोसती नहीं हैं। बजट जैसे शब्द का आपसे कोई लेना-देना नहीं है।
अधिकांश डी: गिलहरी की तरह आपको सिर्फ बचत पसंद है। और तो और, संजोई वस्तु का आनंद लेने में आपकी दिलचस्पी नहीं।
अधिकांश ई: आर्थिक मामलों में आपकी प्रवृत्ति चिंपाजी जैसी है। आप बैंक बैलेंस को भारी भरकम तो बना लेती हैं, पर किसी से शेयर नहीं करतीं।
अधिकांश एफ: जिस प्रकार से लंबी नाक, लंबी पूंछ और पीयर बॉडी शेप वाला छोटा-सा फेरेट अपने शिकार के लिए चौकन्ना रहता है। ठीक उसी प्रकार से आप भी पैसों के लिए चौैकन्ना रहती हैं। पैसों को अनमोल खजाना बनाने में जुटी रहती हैं।
अधिकांश जी: सबसे वजनदार पक्षी है शुतुरमुर्ग। शुतुरमुर्ग उड़ता नहीं, बल्कि दो टांगों पर चलता है। आपका वित्तीय व्यवहार इसी तरह का है। यानी आप वर्तमान में जीती हैं। जितना है, उसे खर्च करने में हिचकती नहीं। या कहें कि आपको वित्त प्रबंधन पसंद नहीं है।
अधिकांश एच: शेर अपना शिकार स्वयं खोजता है और ताजा खून पीता है। बासी मांस उसके लिए नहीं होता। शेर के ये गुण ही उसे दुर्लभ बनाते हैं। आर्थिक मामलों में आपकी प्रवृत्ति शेर के दुर्लभ गुणों से मेल खाती है। आप पैसा स्वयं कमाती हैं और अपनी गाढ़ी कमाई को बिंदास उड़ाती हैं।
अधिकांश आई: आर्थिक मामलों में आपकी प्रवृत्ति वफादार जानवरों जैसी है। यानी आप प्रलोभन में नहीं आतीं। अपने पैसों सुरक्षित तरीके से ही निवेश करती हैं। आपके लिए वित्तीय मामलों में सुरक्षा सबसे ऊपर है।
-डॉ. भावना बर्मी सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट व रिलेशनशिप थेरेपिस्ट की दीप्ति अंगरीश से बातचीत पर आधारित