वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत इस बार छह जून को है। हर साल यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को आता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था। सुहागिन स्त्रियां इस दिन वटवृक्ष का पूजन कर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती रहने, एक अच्छी संतान की प्राप्ति और बड़ों का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर की साफ-सफाई
बिना शुद्धि के भगवान प्रसन्न ही नहीं होंगे। ऐसा शास्त्रों में भी कहा गया है। हम सब भी हमेशा इस नियम का पालन करते आए हैं। इसलिए वट सावित्री व्रत के एक दिन पहले आप भी अपने घर और मंदिर को अच्छी तरह साफ कर लें, साथ ही पूरे घर को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें।
पूजन सामग्रियां
वट सावित्री व्रत की पूजा में पूजन सामग्रियों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि अधूरी सामग्री के बिना पूजा भी अधूरी मानी जाती है। वहीं व्रत का फल भी प्राप्त नहीं हो पाता है। इसलिए आप सभी सामग्रियों की व्यवस्था एक दिन पहले ही कर लें, ताकि आपको परेशानी न हो।
पकवानों की तैयारी
वट सावित्री व्रत के दिन आमतौर पर खीर, पूरी, हलवा, सब्जी और रायता जैसे पकवान बनाए जाते हैं, लेकिन इस दिन भीगे हुए काले चने और मालपुए विशेष रूप से बनाए जाते हैं। इस दिन इसका खास महत्व होता है, क्योंकि यम देवता ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में ही वापस किए थे। सावित्री ने चने को सत्यवान के मुख में रखा था और वह जीवित हो उठे थे। इसलिए चने को इस व्रत में शामिल करना बिल्कुल न भूलें।
व्रत का पूजन
इस दिन सुहागिन स्त्रियां सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद हरे, लाल या पीले रंग की साड़ी पहनकर अच्छी तरह सोलह श्रृंगार करें। पूजन सामग्री को वट वृक्ष के पास ले जाएं। वटवृक्ष के नीचे के स्थान को अच्छी तरह साफ करके जल चढ़ाएं। इसके बाद फूल, अक्षत फल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाएं तथा भगवान का आह्वान करें। फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर 7 बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में चने लेकर व्रत कथा सुनें और अंत में इस व्रत की आरती करना न भूलें। इसके बाद कुछ भीगे चने निकालें और उन पर कुछ पैसे रखकर अपनी सास को दें तथा उनका आशीर्वाद लें। पूजा के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र और फल आदि का दान करना भी न भूलें।
काले, नीले, सफेद वस्त्र बिल्कुल नहीं
ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय कहती हैं, इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए गरीब मजदूरों को भोजन अवश्य करना चाहिए पति के लिए व्रत रखने के साथ-साथ अपने वृद्ध माता-पिता की भी सेवा इस दिन अवश्य करनी चाहिए। इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ना, सुनना और कहना महिलाओं के लिए सौभाग्यशाली होता है। वहीं एक सफल पूजा के लिए पूरी पूजन सामग्रियों का होना भी जरूरी है। इस व्रत के दिन महिलाएं काले, नीले, सफेद वस्त्र बिल्कुल न पहनें। साथ ही इन रंगों की बिंदी या चूड़ी भी न पहनें। इस व्रत को मन, वचन और कर्म की शुद्धता के लिए रखा जाता है, इसलिए व्रत के दिन मन को शुद्ध रखें और किसी के भी प्रति मन में द्वेष की भावना न लाएं।