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शुरुआती दौर के नक्शे दुनिया की आधी-अधूरी तस्वीरें पेश करते थे। उस दौर में नक्शा बनाने का केंद्र इटली के शहर हुआ करते थे। इटली और स्पेन के कारोबारी और अन्वेषक पूरे हौसले से दुनिया की खोज को निकलते थे। फिर ये जो जानकारी लेकर लौटते थे, उनके आधार पर नक्शे बनाए जाते थे। पुराने नक्शों में सुधार किया जाता था।
यूरोप में दुनिया का पहला नक्शा 1448 में तैयार किया गया था जो कि खूबसूरत और दिलकश था। इसे वेनिस के मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो ने चमड़े पर तैयार किया था। इसका नाम था प्लेनिस्फेरो।.
इस नक्शे की बुनियाद थे यूनानी-रोमन विद्वान टॉलेमी का भूकेंद्रीय मॉडल, बुत परस्तों के निशान, ईसाइयों की श्रद्धा, अरबी भौगोलिक सिद्धांत और वैज्ञानिक फॉर्मूले शामिल थे। इस नक्शे में तमाम प्रायद्वीपों को उन्हीं नामों से रेखांकित किया गया है, जिस नाम से उस दौर में यूरोप के लोग इन्हें जानते थे।
नक्शे में दुनिया के चारों तरफ छह दायरे बने हैं, जिनमें छोटे-छोटे नंबर और अक्षर लिखे हैं। इन नंबरों और दायरों से जमीन के चारों तरफ चांद की चाल, मौसमों और त्यौहारों का चक्र समझाया जाता था।
प्लेनिस्फेरो, लैटिन भाषा का शब्द है। प्लेनस मतलब चपटा और स्फेरस मतलब गोला। मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो के दस्तखत वाले सिर्फ तीन ही नक्शे आज मौजूद हैं।
सबसे पुराना नक्शा 1442 का है, जो इटली के मध्यकालीन शहर वेरोना की बिबलियोटेका कम्यूनेला नाम की लाइब्रेरी में सुरक्षित है। लिआर्दो का आखिरी मानचित्र 1452 का है, जो अमरीकन ज्योग्राफिकल सोसाएटी लाइब्रेरी में है।