Sawan 2024 : भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और उनका बाल जीवन मथुरा-वृंदावन से जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश में स्थित ये शहर देश विदेशों तक मशहूर हैं। यहां भारतीय और विदेशी सैलानी घूमने के लिए आते हैं। मथुरा वृंदावन में कई प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक स्थल और यमुना घाट है, जहां आप पूजा पाठ के साथ ही शांत और सुकून माहौल पा सकते हैं।
मथुरा वृंदावन की सैर कभी भी कर सकते हैं लेकिन सावन के महीने में यहां की कुछ जगहों पर जाना आपके लिए मुसीबत का सबब बमन सकता है।
अगर आप भी सावन में मथुरा वृंदावन जाने की योजना बना रहे हैं तो यहां कि कुछ जगहों पर जाने से साथ मना कर दें। आइए जानते हैं मथुरा-वृंदावन के उन स्थानों के बारे में जहां सावन में भूल से भी नहीं जाना चाहिए।
कंस टीला
मथुरा में स्थित कंस टीला यमुना नदी के किनारे से सटा हुआ है। इसके अलाना वृंदावन का चीर घाट, कैसी घाट आदि कई घाट भी हैं जो यमुना के किनारे बसे हैं, जहां सावन के महीने में बरसात के कारण यमुना का जल स्तर काफी बढ़ जाता है। ऐसे में यहां आने वाले यात्रियों से प्रशासन सावधानियां बरतने की अपील कर रहा है।
विश्राम घाट
मथुरा के विश्राम घाट पर भी बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने के कारण यमुना में वाम की सवारी करना मुसीबत बन सकता है। इसलिए इस मौसम में यहां आना व्यर्थ हो सकता है।
किन बातों का ध्यान रखें
सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस महीने पर्यटकों के साथ ही आसपास के भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। सावन में अधिक भीड़ का दबाव वृंदावन और मथुरा में बढ़ जाने के कारण सही से दर्शन नहीं हो पाते हैं।
सावन में मथुरा जाएं तो यमुना के किराने किसी घाट या मंदिर पर ज्यादा समय नहीं रुकना चाहिए।