रंग पंचमी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में खासकर धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन रंगों की बौछार, गुलाल उड़ाने और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। अगर आपका मन होली खेलने से भरा नहीं है तो रंग पंचमी का पर्व मना सकते हैं। आइए जानते हैं कि देश में कहां-कहां रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इसे किस तरह से मनाने की परंपरा है।
मध्य प्रदेश में फाग यात्रा
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में रंग पंचमी के मौके पर गेर उत्सव का आयोजन होता है। इसमें हजारों लोग एक साथ सड़कों पर उतरते हैं और टैंकरों से रंग की बारिश की जाती है। खासतौर पर राजवाड़ा, मालवा मिल और कृष्णपुरा छत्री जैसे स्थानों के आसपास यह आयोजन सबसे भव्य रूप में देखने को मिलता है। इसे फाग यात्रा भी कहा जाता है, जिसमें डीजे, ढोल-नगाड़े और बैंड-बाजों के साथ रंगों की मस्ती होती है। इंदौर क अलावा उज्जैन, महेश्वर और मालवा क्षेत्र के अन्य शहरों में भी रंग पंचमी का विशेष महत्व है।
महाराष्ट्र में गोविदाओं की टोली
महाराष्ट्र में रंग पंचमी भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। मुंबई, पुणे और नासिक में इस दिन लोग गोविंदा मंडलियां बनाकर उत्सव मनाते हैं। इस दौरान गुलाल और अबीर उड़ाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और पानी से होली खेलते हैं। मंदिरों में श्रीकृष्ण और राधा की झांकी सजाई जाती है।
राजस्थान में फूलों की होली
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहरों में रंग पंचमी बड़े ही राजसी अंदाज में मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों और गली-मोहल्लों में गुलाल और फूलों की होली खेली जाती है। मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्र में शाही परिवारों द्वारा रंग पंचमी पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कान्हा की नगरी में रंग पंचमी
उत्तर प्रदेश में रंग पंचमी खासतौर पर मथुरा-वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और गोकुल के मंदिरों में विशेष रंग उत्सव होते हैं। इस दिन गुलाल और अबीर से भगवान को रंग अर्पित किए जाते हैं और भजन-कीर्तन होते हैं।