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भारत में ही मौजूद हैं वो चार झील, जहां महज नहाने से दूर हो जाती हैं बीमारियां

Mon, 12 Aug 2019 01:04 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
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सफर पर निकलने की सबसे पहली वजह शांति की तलाश होती है ताकि घर, रिश्तेदार और ऑफिस के किसी भी तनाव से दूर एक खुशनुमा जगह जाकर शांत माहौल में दिमाग को आराम दिया जा सके। भारत में ऐसी तमाम जगह हैं जहां आप सुकून भरे चार पल बिता सकें लेकिन आज हम आपको उन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पहुंचकर तनाव ही नहीं आपकी बीमारियां भी दूर हो जाएंगी। 
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गंगनानी
ये छोटा-सा गांव प्रसिद्ध गंगोत्री रूट पर पड़ता है जिसकी वजह से श्रद्धालु इस गरम पानी के में डुबकी लगा लेते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि इस सोते में डुबकी लगाने से गंगोत्री की चढ़ाई के लिए वे तरोताजा तो हुए, साथ ही उनके शारीरिक विकार भी दूर हो गए।
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मणिमहेश झील 
रहस्यमयी मणिमहेश, कैलाश चोटी की तलहटी में बनी ये ऊंची झील अपनी जादुई शक्तियों के लिए जानी जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां का पानी मांसपेशियों को तो मजबूत करता ही है, साथ ही शारीरिक घावों को ठीक करता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस पवित्र झील की ओर तीर्थ यात्रा करने आते हैं। श्रद्धालु झील में डुबकी लगाकर इसके चारों ओर तीन बार परिक्रमा भी लगाते हैं। 

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भीमकुंड 
साधारण सी दिखने वाली प्राकृतिक गुफा के बीच बना ये कुंड भारत के सबसे रहस्यमयी जल स्त्रोतों में से एक है। कहावतों के अनुसार ये कुंड महाभारत काल से यहां मौजूद है और इसकी गहराई आज तक कोई नहीं माप पाया। डिस्कवरी चैनल भी इस काम में असफल रहा। प्राकृतिक आपदा आने से पहले यहां का जलस्तर भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भीमकुंड में लगाई हुई एक डुबकी, खासकर मकर संक्रांति के दिन आपका स्वास्थ्य सुधार सकती है। 
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गुरुडोंगमार झील 
भारत की सबसे ऊंची झीलों में से एक सिक्किम की गुरुडोंगमार झील को पवित्र माना जाता है। कहते है कि गुरु नानक देव जी ने एक बार झील के एक हिस्से को जैसे ही छुआ, वह हिस्सा वैसे ही जम गया। तब से स्थानीय लोग ये दावा करते हैं कि गुरुडोंगमार के पवित्र जल को पीने से लोगों को ताकत मिलेगी।
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