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Krishna Janmashtami 2025: बरसाना-नंदगांव में जन्माष्टमी का अलग रंग, जानें क्यों 5 दिन पहले शुरू होता है पर्व

Wed, 30 Jul 2025 04:48 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Krishna Janmashtami 2025: अगर आप भी कृष्ण लीलाओं को लाइव देखना चाहते हैं और जन्माष्टमी तक का इंतजार नहीं कर सकते हैं तो पांच दिन पहले से ही जन्माष्टमी पर्व का अनुभव लेने के लिए वृंदावन-बरसाना जा सकते हैं। आइए जानते हैं कृष्ण का वृंदावन और बरसाना से नाता और कैसे मनाई जाती हैं यहां पांच दिन पहले जन्माष्टमी।
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe
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विस्तार
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Krishna Janmashtami 2025: भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का इंतजार देशभर में किया जाता है। जन्माष्टमी की धूम और उत्सव केवल भारत में ही नहीं, दुनिया के कई देशों में देखने को मिलती है। जगह-जगह पर कृष्ण लीलाएं होती हैं, कृष्ण भजन और भागवत कथाओं का आयोजन होता है तो वहीं श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से संबंधित कान्हा की नगरी मथुरा, वृंदावन और बरसाना का नजारा ही कुछ अलग होता है। जब देशभर में कृष्ण भक्त जन्माष्टमी का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं तो वृंदावन की पवित्र धरती पर बरसाना और नंदगांव में त्योहार कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। यहां न केवल श्रीकृष्ण की झांकियां सजती हैं, बल्कि पूरे गांव में लीला, भजन, रास और रंग की ऐसी छटा बिखरती है कि लगता है, भगवान स्वयं पधार गए हों। अगर आप भी कृष्ण लीलाओं को लाइव देखना चाहते हैं और जन्माष्टमी तक का इंतजार नहीं कर सकते हैं तो पांच दिन पहले से ही जन्माष्टमी पर्व का अनुभव लेने के लिए वृंदावन-बरसाना जा सकते हैं। आइए जानते हैं कृष्ण का वृंदावन और बरसाना से नाता और कैसे मनाई जाती हैं यहां पांच दिन पहले जन्माष्टमी।

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बरसाना और कान्हा

भले ही कान्हा का जन्म मथुरा में हुआ लेकिन उनका बचपन गोकुल और वृंदावन की गलियों में बीता। हालांकि बरसाना राधा रानी की भूमि है जो भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं। वहीं नंदगांव में कन्हैया के पिता नंद बाबा का घर है। इन दोनों जगहों पर जन्माष्टमी त्योहार नहीं, एक आध्यात्मिक अनुभव है। यहां श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य सब कुछ जीवंत नजर आता है। यहां जन्माष्टमी का उत्सव पांच दिन पहले ही शुरू हो जाता है। 

जन्माष्टमी 5 दिन पहले क्यों शुरू होती है?

इस वर्ष अष्टमी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त की रात को हो रही है और यह 16 अगस्त को शाम तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 17 अगस्त की सुबह होगा। परंपरा के अनुसार, व्रत और पूजा उदया तिथि को करना उचित माना जाता है। ऐसे में इस बार जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। बरसाना और नंदगांव में पांच दिन पहले से ही जन्माष्टमी उत्सव इसलिए शुरू हो जाता है क्योंकि यहां हर दिन श्रीकृष्ण की किसी न किसी लीला का मंचन होता है। बालकृष्ण की शरारतों से लेकर राधा-कृष्ण के मिलन तक, सब कुछ भक्तिभाव से प्रस्तुत किया जाता है।
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कब करें बरसाना और नंदगांव की यात्रा

जन्माष्टमी से 5-6 दिन पहले यहां पहुंचना सबसे अच्छा होता है। बरसाना और नंदगांव में छोटे धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस मिल जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए निकटतम स्टेशन मथुरा है, जहां से गोकुल, बरसाना, नंदगांव या वृंदावन के लिए टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं। कृष्ण जन्म के दिन इन गांवों में मंदिरों में विशेष श्रृंगार होता है, झूला उत्सव होता है और कन्हैया को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है। बरसाना की गलियों में झांकियां सजाई जाती हैं, मंदिरों में कीर्तन और भक्तों के साथ नृत्य करके धार्मिक उत्सव मनाया जाता है।

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