Krishna Janmashtami 2025: जन्माष्टमी का नाम लेते ही सबसे पहले मन में मथुरा-वृंदावन की छवि उभर आती है। वहां के भव्य मंदिर, झूमते-गाते भक्त और कान्हा की झांकियां, ऐसी ही तो होती है मथुरा-वृंदावन की जन्माष्टमी। लेकिन अगर आप जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन नहीं जा पा रहे हैं और वैसा ही नजारा देखना चाहते हैं या उसी उत्साह और कृष्ण भक्ति के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाना चाहते हैं तो राजधानी दिल्ली जाएं। दिल्ली में भी कई ऐसे मंदिर हैं जहां आप जन्माष्टमी का वही भव्य माहौल और श्रद्धा का अनुभव कर सकते हैं। इस जन्माष्टमी पर राजधानी के इन खास स्थानों की यात्रा पर निकलते हैं, जो कान्हा के जन्मोत्सव को यादगार बना देंगे।
इस्कॉन मंदिर
दिल्ली के पूर्वी कैलाश में इस्काॅन मंदिर स्थित है, जहां भक्ति और विदेशी रंग का संगम देखने को मिल सकता है। यह मंदिर जन्माष्टमी मनाने की सबसे प्रसिद्ध जगह है। यहां पर सुंदर झांकियां, रासलीला, भजन संध्या और महाआरती का आयोजन होता है। विदेशी और भारतीय भक्त एक साथ नृत्य और भक्ति में लीन हो जाते हैं।
बिरला मंदिर
कनॉट प्लेस के पास स्थित बिरला मंदिर अपनी भव्य सजावट और पारंपरिक आयोजन के लिए जाना जाता है। यहां जन्माष्टमी पर हजारों श्रद्धालु आते हैं और कान्हा के भजन गाते हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है और यहांं वर्षों से जन्माष्टमी पर भव्य उत्सव का आयोजन हो रहा है।
गीता मंदिर
पहाड़गंज में स्थित गीता मंदिर में शास्त्र और भक्ति का मेल होता है। जन्माष्टमी पर यहां गीता पाठ, भजन-कीर्तन और झांकियां देखने के लिए शहरभर से लोग आते हैं। अगर आपको आध्यात्मिक शांति और भक्ति का अनुभव चाहिए तो यह जगह बेहतरीन है।
द्वारकाधीश मंदिर
यह मंदिर पुरानी दिल्ली की रौनक है। चांदनी चौक के पास स्थित द्वारकाधीश मंदिर जन्माष्टमी पर रोशनी और फूलों से जगमगा उठता है। यहां की मध्यरात्रि महाआरती और झांकियां अद्भुत होती हैं।
पंजाबी बाग का श्री कृष्ण मंदिर
मथुरा-वृंदावन के मंदिरों की तरह की भव्य सजावट का आनंद लेना चाहते हैं तो पंजाबी बाग स्थित श्रीकृष्ण मंदिर जाएं। यह मंदिर जन्माष्टमी पर रंग-बिरंगी लाइट्स, फूलों और भोग से सजाया जाता है। यहां बच्चों की रासलीला और भजन संध्या भी आकर्षण का केंद्र होती है।