लंबे समय से गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की मांग उठ रही थी। सोमवार, 8 जून को इस पर मुहर लगी गई है। इससे पहले इसे उत्तराखंड की अस्थाई ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त था। गैरसैंण उत्तराखंड के मध्य में स्थित बेहद ही खूबसूरत जगह है। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले में स्थित गैरसैंण से उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून की दूरी करीब 260 किलोमीटर है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से गैरसैंण की दूरी 450 किलोमीटर है। आइए आज जानते हैं उत्तराखंड की ग्रीषमकालीन राजधानी गैरसैंण के बारे में....
विज्ञापन
2 of 6
गैरसैंण
- फोटो : अमर उजाला
गैरसैंण का अर्थ
गैरसैंण "गैर" तथा "सैंण" दो स्थानीय बोली के शब्दों से मिलकर बना है। गैर का पर्याय गहरे स्थान से है और सैंण पर्याय मैदानी भू-भाग से है। गैरसैंण का अर्थ है 'गहरे में समतल मैदान'।
विज्ञापन
3 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
गैरसैंण का इतिहास
गढ़वाल क्षेत्र में स्थित गैरसैंण को प्राचीन कथाओं तथा ग्रंथों में केदार क्षेत्र या केदारखंड कहा गया है। प्राचीन कथाओं के अनुसार इस जगह का पहला शासक यक्षराज कुबेर था।
4 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Instagram
बेहद ही सुंदर है गैरसैंण
समुद्र तल से 5750 फुट की ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण बेहद ही सुंदर जगह है। भौगोलिक दृष्टि से यहां की जलवायु को तरगर्म माना जाता है। 7.53 वर्ग किलोमीटर में गैरसैंण फैला हुआ है और 2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या 7138 है जिसमें पुरुषों की संख्या 3,582 तथा महिलाओं की संख्या 3,556 है। यहां की साक्षरता दर 87.27 प्रतिशत है।
विज्ञापन
5 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
दुधाटोली पहाड़ी पर स्थित है गैरसैंण
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के चमोली में स्थित गैरसैंण दुधाटोली पहाड़ी पर स्थित है और इसे उत्तराखंड की पामीर के नाम से भी जाना जाता है। रामगंगा नदी का उद्भव भी यहीं हुआ है।