रूबी शुक्ला
Dussehra 2024: भारत में दशहरा को प्रमुख त्योहार के रूप में मनाया जाता है। ये त्योहार असत्य पर सत्य की विजय के रूप में देशभर में मनाया जाता है। दशहरा पर रावण दहन की प्रथा है। भारत की जगहों पर इस दिन रावण दहन किया जाता है। पाप पर पुण्य की जीत के प्रतीक के रूप में रावण दहन किया जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं भारत में कुछ ऐसी भी जगहें हैं, जहां पर रावण का दहन नहीं किया जाता है। इन जगहों पर रावण की पूजा की जाती है और दशहरा के दिन शोक मनाया जाता है। तो चलिए आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताते हैं, जहां विजयादशमी का त्योहार नहीं मनाया जाता।
रावण की पूजा
भारत की कुछ जगहों पर रावण की पूजा करते हैं। रावण को एक महान योद्धा माना जाता है और एक महान राजा के रूप में , शिव जी के महान भक्त के रूप में और महान ज्ञानी के रूप में लंकापति को पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि रावण एक महान ज्ञानी था। रावण को धर्म ,राजनीति और नीति का भी ज्ञान था। इसलिए कुछ जगहों पर रावण को महान ज्ञानी के रूप में माना जाता हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि रावण के चरित्र में जो भी कमियां थीं वो उनके इंसान के रूप में दिखती हैं।
कहां नहीं नहीं होता रावण का दहन ?
मंदसौर, मध्य प्रदेश
मंदसौर को मंदोदरी का मायका कहा जाता है। कहा जाता है कि मंदोदरी मंदसौर की ही रहने वाली थीं। ऐसे में यहां रावण को अपना दामाद माना जाता है। इसी मान्यता के अनुसार यहां रावण का दहन नहीं होता है। यहां रावण को पूजा की जाती है।
कांकेर, छत्तीसगढ़
रावण को एक विद्वान के रूप में इनकी पूजा की जाती है। यहां के लोग दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है और उनके ज्ञान और उनका स्मरण करते हैं ।
बैंगलोर, कर्नाटक
यहां भी कुछ समुदाय ऐसा भी है, यहां रावण को पूजा जाता है। यहां रावण का दहन नहीं किया जाता है । उनकी पूजा अर्चना के साथ और उनकी महान ज्ञान और उनको शिव भक्त के रूप में रावण की पूजा की जाती है।