योग करते समय सांस लेने और छोड़ने का सही तरीका
1. शरीर को फैलाते समय सांस अंदर लें
योग के कई आसनों में जब शरीर को ऊपर उठाया जाता है, छाती को फैलाया जाता है या रीढ़ को लंबा किया जाता है, तब आमतौर पर सांस अंदर लेना सहज रहता है। उदाहरण के लिए, ताड़ासन में हाथों को ऊपर उठाते समय सांस अंदर ली जा सकती है। इससे शरीर की गति और सांस के बीच तालमेल बनाने में मदद मिलती है। हालांकि, हर आसन में यही नियम लागू नहीं होता, इसलिए प्रशिक्षक के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
2. आगे झुकते समय सांस बाहर छोड़ें
खड़े होकर या बैठकर आगे झुकने वाले कई आसनों में झुकते समय सांस बाहर छोड़ना उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए, उत्तानासन में धीरे-धीरे आगे झुकते समय सांस छोड़ सकते हैं। इससे शरीर को बिना जल्दबाजी के गति देने और तनाव कम रखने में मदद मिल सकती है। ध्यान रखें कि झुकते समय सांस को जबरदस्ती बाहर न निकालें और अपनी क्षमता से अधिक खिंचाव न करें।
3. पीछे की ओर झुकते समय सांस अंदर लें
भुजंगासन जैसे कई बैकबेंड आसनों में छाती को ऊपर उठाते समय सांस अंदर लेना सामान्य अभ्यास है। इससे छाती के फैलाव और शरीर की गति के बीच तालमेल बना रहता है। इस दौरान गर्दन पर अनावश्यक दबाव न डालें और कमर को जरूरत से ज्यादा पीछे न मोड़ें।
4. योग करते समय सांस रोकने की गलती न करें
कई लोग कठिन आसन करते समय अनजाने में सांस रोक लेते हैं। इससे असहजता, तनाव या चक्कर आने जैसी परेशानी हो सकती है। सामान्य योगाभ्यास के दौरान सांस को सहज और नियमित रखें। सांस रोकने की विशेष तकनीकें केवल उचित प्रशिक्षण और जरूरत के अनुसार ही अपनाएं।
योग में सांस से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान
योग करते समय नाक से धीरे-धीरे सांस लेना और छोड़ना सामान्यतः उपयोगी रहता है, बशर्ते आपको सांस लेने में कोई परेशानी न हो और अभ्यास के निर्देश कुछ अलग न हों। सांस को बहुत तेज करने, जबरदस्ती लंबा खींचने या शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचें।
अगर आप शुरुआती हैं, तो आसान आसनों से शुरुआत करें और किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में अभ्यास करें। गर्भावस्था, हृदय या फेफड़ों से जुड़ी समस्या अथवा अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार योग करें। चक्कर, सीने में दर्द या असामान्य सांस फूलने पर अभ्यास रोक दें।