मसूरी का खुशनुमा वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर बहुत आकरि्षत करता है। यहां जब आप घर के दरवाजे खोलते हैं, तो कंधे-कंधे तक की ऊंचाई पर फूल लगे नजर आते हैं। मैं बचपन में अपने दोस्तों के साथ इन फूलों के बगीचों में लुका-छिपी का खेल खेला करती थी, क्योंकि ऊंचे-ऊंचे फूलों में हमें एक-दूसरे को ढूंढ पाना आसान काम नहीं होता था। कुछ वक्त पहले ही हमने वह घर बेच दिया, क्योंकि उसकी देखभाल में मुश्किल पेश आ रही थी, हालांकि उस घर को अब सरकार ने टेकओवर कर लिया है।
मॉल रोड पर टहलना, झूला घर घूमना व वहां जाकर गुलाब जामुन खाना, पुस्तकालय में जाकर पुरानी किताबें पढ़ना मेरा पसंदीदा शगल हुआ करता था। मॉल रोड पर मैंने बहुत घुड़सवारी भी की है। सिनेमाघर के सामने आलू टिक्की बहुत खाई है। यहां की झीलें मन मोह लेती हैं। झड़ीपानी फाल व तिब्बती मंदिर भी देखने लायक हैं। आज भी ये यादें मेरी नजरों के सामने चलचित्र-सी घूमती हैं। बेहद ऊंचाई पर स्थित लाल टिब्बा तक पैदल चलने का अलग ही मजा है। वहां एक ऊंची चोटी पर चार दुकान नाम की एक जगह ऐसी भी है, जहां छोटी-छोटी सिर्फ चार ही दुकानें हैं।
इन दुकानों में केवल चार-पांच लोग अंदर और चार-पांच लोग बाहर बैठ सकते हैं। दुकानों के मालिक खुद बनाएं परांठे, आमलेट, नूड्ल्स वहां आने वाले लोगों को बड़े प्यार से परोसते हैं। यहां लोग खुली फिजा में बैठकर इन दुकानों के खाने का आनंद लेने आते हैं। कई बार तो यहां इतना कोहरा छा जाता है कि चारों दुकानें कोहरे से ढंक जाती हैं। मसूरी में कैमल बैक
रोड भी है।
इस रोड का नाम कैमल बैक रोड इसलिए पड़ा, क्योंकि यहां एक पत्थर पड़ा हुआ है, जिसकी बनावट ऊंट की पीठ की तरह है। इसी रोड पर अंग्रेजों के जमाने का पुराना कब्रिस्तान भी बना हुआ है। एक समय था, जब मसूरी में गाड़ियां लाने पर प्रतिबंध था, लेकिन अब तो मॉल रोड पर सरकार ने वाहनों का आना-जाना शुरू करवा दिया है। यहां पैदल घूमने का अलग ही मजा है। यहां आज भी हाथ रिक्शा चलते हैं, जो अपने आप में यूनीक हैं। कभी हम लोग सोचते थे कि हाथ रिक्शा में न जाएं। बुरा लगता था कि कोई हमारा बोझ उठाने के लिए अपने हाथों को इतना कष्ट दे रहा है।
लेकिन हाथ रिक्शा वाला कहता है कि यदि आप हाथ रिक्शा नहीं करोगे, तो उसकी रोजी-रोटी नहीं चलेगी। फिर हम हाथ रिक्शा कर लेते थे। इन दिनों मैं सोनी टीवी के 'द कपिल शर्मा' शो में व्यस्त हूं। जब कभी वक्त मिले तो मेरा मन बाली (इंडोनेशिया) घूमने का है, वहां के बारे में मैंने बहुत सुना है।
जगदीश जोशी से हुई बातचीत पर आधारित