‘एक सामान्य शिक्षक आपको बताता है, अच्छा शिक्षक एक्सप्लेन करता है और महान शिक्षक आपको प्रेरित करता है।’ अमेरिकी लेखक विलियम आर्थर कि ये लाइन पढ़ी तो लगा सच के कितने करीब है उनकी ये बात। मेरी निजी डायरी जिसमें आपकी कही न जाने कितनी बातें कलमबद्ध हैं जब भी खोलती हूं लगता है जिंदगी का एक नया सूत्र मिल गया। हां, सच है प्रेरणा ही तो हैं आप मेरी।
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मैं सर-सर कहते हुए जब भी अपनी शिकायतें लेकर आपके पीछे आती आप इतने ध्यान से मेरी बातें सुनते कि लगता आप मेरे दुख में बिल्कुल शरीक हो गए हैं। फिर अचानक से आपकी भारी सी आवाज आती और कहते तुम अगर इन छोटी-छोटी बातों से घबराओगी तो जिंदगी के जंगल में गुम हो जाओगी। और फिर उठाकर एक किताब मेरी तरफ उछाल देते लो इसे ले जाकर पढ़ना। जिंदगी कुछ डिग्रियों या फिर कुछ थ्योरीज में सिमटी हुई नहीं है। मैं खीझ जाती, और मन ही मन कहती, समाधान चाहिए था ज्ञान नहीं! और फिर जब घर लौटती तो थकान के बाद भी उस किताब के पन्ने पलटने लगती।
पढ़ते-पढते उसमें डूब जाती। न जाने कितनी किताबें यूं आपने मुझे पढ़ा डालीं। मुझे याद है आपने कहा था नंबरों की दौड़ मत लगाओ। हर विषय को जिंदगी से जोड़कर पढ़ो। गुत्थियां खुद ब खुद सुलझ जाएंगी। किन गुत्थियों की बात आप करते थे, तब समझ से परे था। मगर अब समझ आता है किन सवालों की बात आप करते थे। जब सब इंपोर्टेंट सवालों की खोज में इधर-उधर भटक रहे होते तब आप मुझे किसी एक टॉपिक को विस्तार से पढ़ने की सलाह देते। सलाह ही नहीं बल्कि उस विषय को पढ़ने की लिए मेरे मन में ललक पैदा कर देते।
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मैं आपका लिखा दस दस बार पढ़ती। लेखक भी तो हैं आप। आपकी हर कहानी, हर किताब पढ़ती और फिर सोचती शब्दों में जादू है या आपकी कलम कोई जादू की छड़ी है। क्या कहानियों का कोई खजाना है जिसकी चाभी सिर्फ आपके पास है। या वो अलीबाबा और चालीस चोर की कहानी की तरह सिमसिम का मंत्र बस आपको पता है।
आज एक बताऊं आपको पता भी नहीं होगा, मैंने आपकी कही कई बातों को अपनी डायरी में चुपचाप नोट कर लिया था। आज पढ़ती हूं तो समझ आता है, विषय पढ़ाते-पढ़ाते आपने तो जिंदगी जीने का तरीका ही डाला। साइकोलॉजी, एनाटॉमी के सवालों को सॉल्व करते-करते कब आप जिंदगी के गंभीर प्रश्नों का उत्तर दे गए पता ही नहीं चला।
मुझे याद है एक दिन मुझे घबराया हुआ देखकर आपने कहा था, ‘जिंदगी जब तुम्हें डराने लगे तो स्थिर होकर आंखों से आंखे मिलाकर उसे देखना। तब तक देखना जब तक वो अपनी आंखें नीची न कर ले।’ कैसे भूल सकती हूं आपका ये कहना, ‘ खुद की क्षमताओं और कमियों का आंकलन करने वालों को जिंदगी कभी धोखा नहीं देती।’ और आपने कहा था ‘मौके का इंतजार मत करो अपने हुनर को लगातार तराशो क्योंकि मौका दरवाजा खटखटाकर नहीं अचानक आता है। आपकी तैयारी हुई तो ठीक नहीं तो वो किसी और के पास बेधड़क चला जाता है।’