Swami Vivekananda
जब गुरु को हुआ कैंसर
स्वामी विवेकानन्द के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शरीर त्यागने से कुछ दिन पहले विवेकानन्द ने खुद की परवाह किए बिना गुरु सेवा में अपना तन-मन लगा दिया। उनके गुरु को कैंसर होने की वजह से उनका गले से थूंक, रक्त, कफ आदि निकलता था। लेकिन विवेकानन्द सबकी सफाई बहुत मन लगाकर करते थे। एक बार परमहंस के एक शिष्य ने उनकी सेवा करते समय घृणा दिखाई। जिसे देखकर विवेकानन्द क्रोध से भर गए और उन्होंने गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर पूरी पी गए।