स्वामी जी पढ़ाई- लिखाई में औसत थे
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स्वामी जी पढ़ाई-लिखाई में औसत थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी एंट्रेंस लेवल पर 47 फीसदी, एफए में 46 फीसदी और बीए में 56 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। स्वामी विवेकानंद बेहद ही दयालु स्वभाव के थे। यहां तक कि उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई करने में समर्पित कर दिया था।
विवेकानंद जी चाय के बहुत शौकिन थे
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अगर विवेकानंद के खान-पान की बात की जाए, तो सबसे पहला नाम चाय का आता है, विवेकानंद जी चाय के बहुत शौकीन थे। एक समय ऐसा था कि सभी साधु-संत चाय के विरोध में थे। उस वक्त विवेकानंद ने अपने मठ में चाय को प्रवेश दिया था।
बाल गंगाधर भी चाय पीकर बेहद प्रसन्न लग रहे थे
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एक बार विवेकानंद महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक से मिलने बेलूर मठ गए और वहां जाने के बाद उन्हें पता चला कि वह भी चाय के खिलाफ है। तब उन्होंने बाल गंगाधर तिलक को चाय को बनाने के लिए मनाया, फिर विवेकानंद ने जायफल, जावित्री, इलायची, लॉन्ग और केसर लाए और सभी के लिए मुगलई चाय बनाई सभी ने खुश होकर चाय का आनंद उठाया तो वहीं बाल गंगाधर भी चाय पीकर बेहद प्रसन्न लग रहे थे।
एक बार विवेकानंद लंबे समय से बीमार चल रहे थे
स्वामी विवेकानंद के मठ में किसी महिला को जाने की अनुमति नहीं थी। एक बार विवेकानंद लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बहुत इलाज के बाद भी तेज बुखार ठीक नहीं हो रहा था। उनके एक शिष्य को उनकी यह हालत देखी नहीं जा रही थी और उसने उनकी मां को मठ में बुला दिया। इस बात से स्वामी विवेकानंद जी गुस्साएं और चिल्लाकर बोले कि मेरे बनाए गए नियम को मेरे कारण ही तोड़ रहे हो।