चारों तरफ बड़े-बड़े खूबसूरत पहाड़, और उनसे टकराते बादल, घाटी के बीच से निकलती सड़कें और सड़क के समानंतर बहती नदी काफी मनमोहक नजारा पेश करती है। मैं जिस फील्ड में हूं, उसकी बदौलत मुझे देश-विदेश घूमने का मौका मिलता रहता है। मुझे कुछ समय पहले ही जम्मू-कश्मीर जाने का मौका मिला। कश्मीर के बारे में सिर्फ सुना था, लेकिन जब वहां पहुंचा तो चारों तरफ प्राकृतिक सुंदरता देखकर मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। मैं सोच रहा था कि इतनी सुंदरता भला सच में कैसे हो सकती है। मैंने सोनमर्ग और गुलमर्ग के साथ-साथ पहलगाम के बारे में भी बहुत सुना था, तो वहां की यात्रा करना भी किसी सपने से कम नहीं रहा।
पहलगाम जाने के लिए सीधी हवाई यात्रा नहीं की जा सकती, इसलिए हमने श्रीनगर तक की हवाई यात्रा करने के बाद टैक्सी ली। जब मैं पहलगाम पहुंचा, तो तेज बहती नदी, बर्फ से ढके पहाड़, शुद्ध और प्रदूषण मुक्त आबोहवा, सुंदर बगीचे, घने जंगल यह सब देखकर मन कर रहा था कि यहीं ठहर जाऊं। मैंने वहां रोमांचक ट्रेकिंग का आनंद भी लिया। यह मेरे लिए एकदम नया अनुभव था। मेरे ख्याल से हर जगह की अपनी एक खास बात होती है। मैं विदेश भी घूमा हूं, लेकिन अपने देश की बात ही अलग है।
कश्मीर जैसी जगह का नाम सुन लोग अक्सर यह सोचने लगते हैं कि यहां आना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैंने अपने सबसे अच्छे पलों को पहलगाम में जिया। जहां तक नजर जाएं, वहां आपको बस खूबसूरती ही दिखेगी। यहां के लोग भी बहुत अच्छे हैं। बहुत मिलनसार हैं। किसी भी मदद के लिए तत्पर रहते हैं और सबसे खास बात कि आपको यह महसूस नहीं होने देते कि आप किसी अलग जगह पर हैं। यहां वह सब कुछ है, जिसकी जरूरत एक सच्चे प्रकृति प्रेमी होती है।
यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य अनुपम तो है ही, साथ ही साथ किसी को भी पल में मंत्रमुग्ध करने की पूरी क्षमता रखता है। यह पर्यटन स्थल विश्व प्रसिद्ध है और जम्मू-कश्मीर का एक छोटा कस्बा है, जो अनंतनाग जिले में आता है और अनंतनाग से 43 किलोमीटर दूर स्थित है। यह लिद्दर नदी के किनारे बसा है। पहलगाम की खूबसूरती में चार चांद लगाती है, कस्बे के मध्य से बहती हुई लिद्दर नदी और घाटी में बने खूबसूरत बाग-बगीचे। चारों तरफ बड़े-बड़े खूबसूरत पहाड़, पहाड़ से टकराते बादल, घाटी के बीच से सर्पिलाकार सड़कें और सड़क के समानंतर बहती लिद्दर नदी, सोचिए कितना मनमोहक नजारा रहा होगा। मैंने यहां के सभी पलों को अपने कैमरे में भी कैद किया है, ताकि कभी मुंबई में थकान महसूस करूं, तो इन्हें देखकर सुकून पा सकता हूं। यहां के भोजन, कपड़े, और स्थानीय लोगों की जीवनशैली में इस जगह की समृद्ध संस्कृति की झलक पा सकते हैं।
यहां के व्यवस्थित बगीचे और घास का मैदान देखकर आंखों को बड़ी ठंडक मिली। सब एकदम परफेक्ट था। इसके बाद हम बेताब वैली और चंदनवाड़ी गए। बेताब वैली से चंदनवाड़ी का रास्ता बेहद खूबसूरत था, रास्ते में कई जगह पहाड़ो पर बर्फ जमी हुई थी। घाटी में चारो तरफ भरपूर हरियाली फैली हुई थी, ये समस्त दृश्य आंखों और मन को एक अलौकिक शांति पहुंचाने के लिए काफी थे। इसके अलावा, पहलगाम में गोल्फ और मछली को पकड़ने का शौक भी जोरों पर रहता है। गोल्फ खेलने के लिए यहां प्रॉपर लॉन है, जहां गोल्फ सिखाने के पार्ट टाइम प्रोग्राम भी चलते रहते हैं।