हम अपने आसपास के माहौल को जिस रूप में देखते हैं, उसमें हमारे अंदर की भावनाओं की भूमिका प्रमुख होती है। साइकोलॉजिकल विज्ञान जर्नल में प्रकाशित शोध बताता है कि नियमित सामाजिक सक्रियता पर हमारी भावनाएं प्रमुख प्रभाव डाल सकती हैं।
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया की मनोविज्ञानी इरिका सीगल कहती हैं, 'हम आसपास के माहौल के प्रति अपनी धारणाएं अपने अनुभव के अनुसार बनाते हैं।' वह कहती हैं कि समाज को लेकर हमारे विचार या भावनाएं केवल बाहरी समझ पर ही आधारित नहीं होते। जब हम इस दुनिया को अलग-अलग तरह से देखते या समझते हैं, तब यह इस पर निर्भर करता है कि हम खुश हैं या दुखी। इससे पहले के शोधों में पाया गया था कि लोगों की भावनाओं पर उनकी बाहरी सतर्कता प्रमुख रूप से जिम्मेदार होती है।