स्कूल में बच्चों का प्रदर्शन 70 फीसदी उनके जीन से तय होता है। बाकी 30 फीसदी प्रदर्शन उनकी मेहनत और आसपास के लोगों से मिलने वाली सीख पर तय होता है। यह नतीजा लंदन के ‘किंग्स कॉलेज’ के हालिया शोध से निकला है।
इसके लिए शोधकर्ताओं ने जुड़वा बच्चों के करीब छह हजार जोड़ों को बुलाया। शोध में पाया गया कि प्राइमरी से कॉलेज स्तर तक बच्चे की क्षमता बनती-बिगड़ती रहती है और यह प्रक्रिया जींस से तय होती है। इसका असर बच्चे के अंकों पर भी दिखता है।
यहां पर जींस के असर का मतलब इस बात से नहीं है कि माता-पिता कितने पढ़े-लिखे हैं, बल्कि जींस का अर्थ उनकी स्किल से है। बच्चे के प्रदर्शन पर जीन का असर प्राइमरी स्तर तक चार से 10 फीसदी तक रहता है। मिडिल स्कूल के स्तर तक यह बढ़कर 30 से 40 और कॉलेज तक बढ़ते-बढ़ते 70 फीसदी तक हो जाता है।