ऊपरी खोल को एक दिन खत्म हो जाना ही है, इसे जमीन के नीचे सड़ने देना
आने वाली नस्लों के काम का बनने देना
इसे बदल जाने देना किसी खदान के अयस्क में
मैं शान्ति की सम्मोहक खुशबू फैलाऊंगी
कांगलेई से, जहां मैं पैदा हुई थी
जो गुजरते वक्त के साथ
सारी दुनिया में फैल जाएगी
- इरोम शर्मिला
नर्म दिल लेकिन इरादे मजबूत। थोड़ी जिद्दी और थोड़ी जज्बाती भी। दुनिया के लिए लड़ने वाली भी और प्यार के लिए दुनिया से ही लड़ जाने वाली भी। आखिर भगवान इरोम शर्मिला जैसी सामग्री बनाते कैसे हैं?
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28 साल की उम्र में जब लड़कियां ब्यूटी केयर, करियर, डेटिंग और शादी जैसी चीजों में मशगूल रहती हैं, उम्र के उस अहम पड़ाव पर इरोम शर्मिला ने वो फैसला किया जिसे लेने के लिए सिर्फ जोश या जज्बात ही नहीं बल्कि पक्के इरादे और जुनून की जरूरत होती है।
16 साल की भूख हड़ताल, सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई, लोगों की कड़वी बातें और चुनाव में करारी शिकस्त के बावजूद इरोम शर्मिला के इरादे आज भी उतने ही फौलादी हैं जितने उस दिन थे जब उन्हें आयरन लेडी का सम्मान मिला था। लेकिन असफलता और तिरस्कार के बीच भी जिंदगी के मायने तलाशने और उसे जितना संभव हो जीने लायक बनाने की कोशिश बदस्तूर जारी है। मातृभूमि का प्यार हो या फिर किसी साथी का प्यार, दोनों के लिए इरोम शर्मिला को लंबी लड़ाई पड़ी है।
फिटनेस से लेकर डाइट तक और रिलेशनशिप से लेकर स्ट्रेस मैनेजमेंट तक, इरोम शर्मिला की जिंदगी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। यकीन मानिये ये उतना मुश्किल भी नहीं है।