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सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहना बना सकता है फोमो का शिकार, जानें क्या है ये बला

Sat, 20 Oct 2018 10:10 AM IST
नंद राम प्रजापति
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फेसबुक खोलती हैं और बंद कर देती हैं। इंस्टाग्राम में लोगों की स्टोरी देखती रहती हैंं। पता नहीं चलने पर निराश हो जाती हैं, तो हो सकता है आप फोमो की शिकार हैं...फियर ऑफ मिसिंग आउट (फोमो) यानी दुनिया की दौड़ में पीछे छूट जाने की भावना। अगर आपके मन में भी अक्सर इस प्रकार का ख्याल आता है, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। दूसरे लोग क्या कर रहे हैं, इसके बारे में कल्पना करते रहना फोमो का प्रमुख लक्षण है।

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यह एक प्रकार की चिंता संबंधी स्थिति है, जो अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को बार-बार देखना, दोस्त क्या कर रहे हैं, आदि चीजों के बारे में पता करने के बाद शुरू होती है। कुछ पता नहीं चलने पर हम निराशा महसूस करते हैं। हमारी चिंता का अंत इस सोच पर खत्म होता है कि क्या हमारे जीवन में अच्छी चीजें कहीं छूट तो नहीं रहीं। भटकाने वाली इस स्थिति से आपको मुक्त होने की आवश्यकता है। 

आपके लिए यह महत्वपूर्ण है
आपको यह समझना और इस पर विचार करना होगा कि आपके लिए क्या जरूरी है। अपने आप से पूछें, आप क्यों सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों की तांक-झांक करती रहती हैं? क्या यह आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक है? अपना एक स्पष्ट स्व-मूल्यांकन करने से आपको पता चलेगा कि इस प्रकार की चिंता पूरी तरह से निरर्थक है। यह न सिर्फ आपके लिए जरूरी है, बल्कि इससे आपको कोई फर्क भी नहीं पड़ना चाहिए।

सोशल मीडिया से दूरी
सोशल मीडिया पर आज लोग घंटो बिता देते हैं। आप आज जो समय सोशल मीडिया को दे रही हैं, उससे थोड़ा आराम लेने की जरूरत है। हफ्ते में एक बार सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की कोशिश करें। उसके बाद सोशल मीडिया को दे रहे अपने समय को धीरे-धीरे कम करें। यदि आपको अपने कार्य के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना पड़ता है, तो इन प्लेटफार्म का उपयोग केवल प्रोफेशनल चीजों के लिए ही करें।  

जब फोमो का असर हो...
जब कभी फोमो का असर हो, तो अपने मोबाइल फोन आदि को दूर रखें। यदि आप दोस्तों के साथ हैं, तब उनके साथ अपनी बातचीत पर अपना ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें। यहां तक कि यदि आप अकेली हैं और फोमो अपना प्रभाव दिखाता है, तो खुद को अन्य गतिविधियों में उलझाने की कोशिश करें। किताब पढ़ें या टीवी देखें, जो कुछ भी आपके मन को व्यस्त रखता है, उसमें खुद को व्यस्त रखने और सोशल मीडिया से दूर रहने की कोशिश करें।   

एकाग्र मन
मन को एकाग्र रखने का अभ्यास करें। इससे आपको वर्तमान में रहने में मदद मिलेगी और किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में घट रही चीजों का असर आपके मन पर न पड़े, इसकी कोशिश करें। इसको इस प्रकार कर सकती हैं। किसी शांत जगह पर जाएं और अपनी श्वसन प्रणाली पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करें। और जब आपके मन में यहां वहां के विचार आएं, तो दोबारा अपनी सांस को केंद्रित करने की कोशिश करें। रोजाना दो मिनट से इसकी शुरुआत करें और धीरे-धीरे इसकी अवधि बढ़ाएं।
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कृतज्ञ बने रहें
लोगों द्वारा दी गई दुआएं और आशीर्वाद को गिनने से बहुत मदद मिलती है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि आपके जीवन में छोटी-छोटी चीजों के प्रति भी कृतज्ञता की भावना आपके दृष्टिकोण को बदल सकती है। जिस समय आप अलग तरह की जीवनशैली को पाने संबंधी अपनी इच्छा को छोड़ देंगी और अपने जीवन का आनंद उठाएंगी, तब आप अपने अंदर बदलाव महसूस करेंगी।
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