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Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti: सरदार पटेल की जयंती पर जानें ये रोचक बातें, ऐसे बनें देश के लौह पुरुष

Tue, 31 Oct 2023 11:45 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
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Sardar Vallabhbhai Patel Birth Anniversary 2023 : आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है। 31 अक्तूबर को सरदार पटेल का जन्म हुआ था। उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। सरदार पटेल का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने आजाद भारत में बिखरी हुई रियासतों का विलय करते हुए एकता के सूत्र में बाधा। इस कारण 31 अक्तूबर के दिन प्रतिवर्ष उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाते हैं।

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सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री थे। वह त्याग और बलिदान की मिसाल भी थे। अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए भारत में सरदार पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जाने लगा था। कांग्रेस पार्टी में सभी चाहते थे सरदार पटेल प्रधानमंत्री बने लेकिन दावेदारी में जवाहर लाल नेहरू का भी नाम था। महात्मा गांधी के कहने पर सरदार पटेल ने प्रधानमंत्री की रेस से अपना नाम वापस ले लिया।

लौह पुरुष पटेल काफी दूरदर्शी थे, उन्होंने जवाहर लाल नेहरू को भारत और चीन के रिश्ते पर पहले ही आगाह कर दिया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर उनके जीवन से जुड़े रोचक किस्सों के बारे में जानिए, जिन्होंने उन्हें लौह पुरुष बना दिया।
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सरदार पटेल का परिचय

गुजरात के खेड़ा जिले में 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म हुआ था। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पटेल ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भविष्य में खास बन गया। वह आजादी की जंग का हिस्सा बने। इस दौरान उन्होंने शराब, छुआछूत और स्त्री अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई। हिंदू मुस्लिम एकता को बनाए रखने का प्रयास जारी रखा और आंदोलन के दौरान कई बार जेल गए।

पटेल बन सकते थे पहले प्रधानमंत्री

जब भारत को आजादी मिली तो देशवासी अपनी नई सरकार बनाने के लिए तैयार थे। पूरे देश की निगाहें कांग्रेस के नए अध्यक्ष के नाम पर टिकी थीं। माना जा रहा था कांग्रेस नया अध्यक्ष ही भारत का पहला प्रधानमंत्री होगा। सरदार पटेल की लोकप्रियता के चलते कांग्रेस कमेटी ने नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया और पटेल पूर्ण बहुमत से पार्टी के अध्यक्ष बन गए लेकिन पार्टी में विच्छेद की संभावना को खत्म करने के लिए गांधी जी ने सरदार पटेल को प्रधानमंत्री पद से पीछे हटने को कहा। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गांधी जी की बात का मान रखते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया।

रियासतों का भारतीय संघ में विलय

पटेल को देश का पहला उप प्रधानमंत्री बनाया गया। उन्हें कई और जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उस समय पटेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती देसी रियासतों का भारत में विलय था। छोटे बड़े राजाओं, नवाबों और रजवाड़े खत्म करते हुए उन्हें भारत सरकार के अधीन करना आसान नहीं था लेकिन बिना किसी जंग के सरदार पटेल ने 562 रियासतों का भारत संघ में विलय कराया।

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