मूड किसी का भी खराब हो सकता है। एंग्जायटी कभी भी हो सकती है। सिमरन कुछ ऐसे ही अनुभवों से गुजर रही थीं। वह बताती हैं, ‘मैंने नई-नई नौकरी ज्वाइन की थी और मेरा दो साल पुराना रिश्ता अचानक टूट गया। मैं काफी अकेला महसूस कर रही थी। खराब मूड और एंग्जायटी ने अलग से परेशान कर रखा था। तब मेरी सबसे अच्छी सहेली ने मेरी मदद की। हम साथ घूमने गए, कई मजेदार काम किए और खुद को हर तरह से व्यस्त रखने की कोशिश की। धीरे-धीरे मन की नकारात्मकता कम होने लगी और मैंने पुरानी यादों को भुलाकर नए सिरे से जीने का फैसला किया।’
कमाल की बात यह रही कि सिमरन ने कभी अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर सहेली से बात नहीं की, लेकिन उनकी सहेली को अहसास था कि वह अंदर से उदास है। दोस्ती दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता है। जीवन में दोस्त हों तो हर मुश्किल आसान लगने लगती है। दोस्त न हों तो दुनिया के सारे रंग बेरंग हो जाते हैं। दोस्तों संग जिंदगी का अपना एक अलग आनंद है। मगर गहरी दोस्ती भावनात्मक खुशी देने के साथ ही शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
खुशी का स्रोत
आप स्वस्थ रहने के लिए क्या कुछ नहीं करतीं? हरी सब्जियों और फलों का सेवन, नियमित एक्सरसाइज और पूरी नींद जैसी तमाम बातों का ध्यान रखती हैं। लेकिन अच्छी सेहत के लिए एक प्रभावशाली नुस्खा ऐसा भी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और वह है दोस्ती। जिस प्रकार किसी की मदद करने पर आप अच्छा महसूस करती हैं, वैसे ही जब आप दोस्तों के काम आती हैं, तो आपके दिमाग में ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे अच्छा महसूस कराने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं। इससे सकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं।
साल 2025 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट कहती है कि उदार व्यवहार का संबंध बेहतर सेहत से है। दयालुता के काम आपके समाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं, जो आपकी खुशी के लिए बहुत जरूरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक संबंध इंसान की सेहत, खुशी और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं। जो लोग सामाजिक रूप से जुड़े होते हैं, वे अधिक खुश व संतुष्ट रहते हैं। उनमें तनाव व डिप्रेशन कम होता है। इस तरह प्रोफेशनल व्यवहार निराशा को कम कर देता है।
उम्र भी बढ़ाती है
मजबूत सोशल रिश्ते लंबी जिंदगी से भी जुड़े होते हैं। इसके संकेत अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से सामने आए हैं। इस अध्ययन के अनुसार, जीवन भर में लोग जो मजबूत रिश्ते बनाते हैं, माता-पिता से लेकर करीबी दोस्तों तक, वे शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि ये सोशल फायदे बायोलॉजिकल एजिंग मार्कर (एपिजेनेटिक क्लॉक) पर असर डाल सकते हैं, जो डीएनए मिथाइलेशन में होने वाले बदलावों को ट्रैक करते हैं।
अध्ययन से साफ हुआ कि जो लोग ज्यादा सपोर्टिव और लोगों से जुड़कर जीवन जीते हैं, वे अक्सर अपनी असल उम्र से बायोलॉजिकली छोटे दिखते हैं। बेहतर सोशल नेटवर्क से शरीर में मौजूद सूजन, दिल की बीमारी और न्यूरोडिजनरेशन का स्तर कम होता है। अमेरिका की ही ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी द्वारा कुछ वर्ष पूर्व किए गए एक अध्ययन से यह भी पता चला था कि जिन लोगों के समाजिक रिश्ते मजबूत थे, उनके कमजोर सोशल कनेक्शन वाले लोगों की तुलना में जिंदा रहने की संभावना 50 फीसदी तक अधिक थी।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य
आज जब आभासी दुनिया का संवाद आमने-सामने की बातचीत की जगह ले चुका है, अकेलापन बहुसंख्य लोगों को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है। इससे हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे बढ़ रहे हैं। ऐसे में विज्ञान ने सोशल कनेक्शन, फिजिकल और मेंटल हेल्थ के बीच के संबंध पर दिलचस्प प्रकाश डाला है। विभिन्न अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिन लोगों के मजबूत समाजिक संबंध होते हैं, उनमें दिल की बीमारी, मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां बढ़ने की आशंका कम होती है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। यानी दोस्ती में निवेश करना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
इस पर दिल्ली की स्कूल प्रिंसिपल इप्शिता चौधरी कहती हैं, “सच्ची दोस्ती सिर्फ साथ में हंसने या सुविधा तक सीमित नहीं होती। इसमें एक-दूसरे को जज नहीं किया जाता। बिना किसी नियंत्रण और शर्त के साथ मिलता है और बिना जजमेंट के सच कहने का दम होता है। इसका फायदा तब होता है, जब हमारे पास एक सच्चा दोस्त हो, क्योंकि वही हमें वह स्पेस देता है, जहां हमें दिखावा नहीं करना पड़ता। हम कितने ही कमजोर, अनिश्चित या अधूरे हों, इसके बावजूद वह हमें स्वीकार करता है।
दोस्त हमारी उपलब्धी का जश्न मनाते हैं और धीरे से हमारी कमियों की ओर इशारा भी करते हैं। इतना ही नहीं, नाकामियों, दुख या बदलाव के समय सच्चे दोस्त हमें सब कुछ ‘ठीक’ करने की जल्दी नहीं करते, बल्कि हमारे साथ रहते हैं। उनकी मौजूदगी मात्र से सुकून मिलता है। सच्ची दोस्ती जलन से आजाद, आपसी सम्मान और ईमानदारी पर टिकी होती है। अब खुद से पूछें कि क्या हम वैसे दोस्त बन रहे हैं?”