रेखा भारद्वाज एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं। रेखा ने जब अपनी पढ़ाई पूरी की तो उनकी सबसे पहली प्राथमिकता उनका करियर था और इसी के चलते उन्होंने कभी भी शादी के बारे में नहीं सोचा। करीबन 33 वर्ष की उम्र में रेखा ने शादी की और अब उनकी एक बेटी भी है। वह अपने छोटे से परिवार में बेहद खुश हैं। देरी से शादी करने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। हालांकि वह यह अवश्य मानती हैं कि 30 की उम्र तक आते-आते उनके ऊपर विवाह का सामाजिक व मानसिक दबाव बनने लगा था। वह अपने पति अजय के साथ बेहद खुश हैं, लेकिन रेखा यह भी मानती हैं कि कभी-कभी देर से शादी करना घाटे का सौदा हो सकता है, क्योंकि कई बार आपको अच्छे विकल्प नहीं मिलते। रेखा अपने ही ऑफिस में ऐसे कई लोगों को जानती है, जो उम्र अधिक होने के कारण एक अच्छा जीवनसाथी पाने के कई असफल प्रयास कर चुके हैं।
वहीं, महज 24 साल की उम्र में अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने वाली किरण शर्मा की कहानी इससे थोड़ी अलग है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद किरण की राजीव से मुलाकात हुई और उन्होंने एक होने का फैसला किया। हालांकि दोनों ने यह भी सुनिश्चित किया कि विवाह के बाद वह अपने करियर पर भी पूरा ध्यान देंगे और जब तक आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होते, तब तक फैमिली प्लान नहीं करेंगे। किरण का मानना है कि करियर की महत्वाकांक्षा का कोई अंत नहीं होता। जब व्यक्ति कुछ पा लेता है, तो उससे अधिक पाने की चाह रखने लगता है। इस तरह शादी की सही उम्र वही होती है, जब व्यक्ति मानसिक रूप से उसके लिए तैयार हो। पारंपरिक रूप से तो भारत में लड़कियों के लिए 20 से 25 साल की उम्र में ही शादी को सही समझा जाता है, लेकिन आज की भागती दौड़ती जिंदगी में जब हर व्यक्ति करियर की आपाधापी में लगा है, तो देर से शादी करने का चलन काफी बढ़ता जा रहा है। हालांकि इसके अपने फायदे व नुकसान हैं।
देर से शादी करने वाली महिलाओं पर जल्द ही मां बनने का दबाव बना रहता है
देर से शादी करने वाली महिलाओं पर जल्द ही मां बनने का दबाव बना रहता है, जिसके कारण वह शादी के बाद उन पलों को महसूस ही नहीं कर पातीं, जो पति-पत्नी के रिश्ते में खाद का काम करते हैं। इतना ही नहीं, लेट मैरिज करने वाले कपल्स को कभी-कभी कंसीव करने में कुछ मेडिकल समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। बहुत से कपल्स तो देर से शादी करने के कारण बच्चे की हसरत करते ही रह जाते हैं। वहीं इसके उलट, जो लोग जल्दी शादी करते हैं, उन्हें जल्दी बच्चा पैदा करने का दबाव कम ही रहता है। ऐसे में वह अपनी शादीशुदा जिंदगी का ज्यादा आनंद ले पाते हैं। प्रेम व विवाह भले ही पैसे पर आधारित न हो, लेकिन पैसा इन रिश्तों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
अमूमन देखने में आता है कि देर से शादी करने वाले व्यक्ति आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक स्थिर होते हैं
अमूमन देखने में आता है कि देर से शादी करने वाले व्यक्ति आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक स्थिर होते हैं और यही आर्थिक स्थिरता रिश्ते से अनिश्चितताओं के सभी बादलों को हटा देती है। कोई भी ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी बनाना चाहेगा, जो आर्थिक रूप से स्थिर हो। शादी के बाद दोनों को एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय चाहिए होता है, लेकिन कई बार दोनों ही पार्टनर्स अपने-अपने गोल्स को अचीव करने में लग जाते हैं, जिसके कारण रिश्ते की नींव कमजोर ही रह जाती है। क्योंकि न तो वह एक-दूसरे को क्वालिटी टाइम दे पाते हैं और न ही वह अपने पार्टनर को समझ पाते हैं। इस प्रकार जल्दी शादी करने वाले कपल्स के बीच का रिश्ता उस प्रकार नहीं फलता-फूलता, जितना वास्तव में मजबूत बनना चाहिए। जिन लड़कियों की शादी ग्रेजुएशन के तुरंत बाद या पढ़ते-पढ़ते ही कर दी जाती है, उन्हें अक्सर अपनी पूरी पढ़ाई करने का मौका ही नहीं मिलता। ऐसे में करियर बनाना तो दूर, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी तरसती रह जाती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले उनके अरमान कहीं दब जाते हैं और इसका अफसोस उन्हें ताउम्र रहता है।
(रिलेशनशिप काउंसलर पूनम नागपाल से बातचीत पर आधारित)