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Ramadan 2018: रमजान में रोजा रखने से शरीर पर क्या पड़ता है असर

Mon, 21 May 2018 09:25 AM IST
BBC हिंदी
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फाइल फोटो
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हर साल रमजान के दिनों में लाखों मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक 30 दिनों के लिए रोजा रखते हैं। हाल के दिनों में, उत्तरी गोलार्ध में रमजान गर्मियों के दिनों में पड़ा, जो बहुत लंबे और गर्म होते हैं। इसका मतलब है कि नॉर्वे जैसे कुछ देशों में लोग हर दिन 20 से अधिक घंटे रोजा करते देखे जाएंगे।
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क्या रोजा आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है? चलिए देखते हैं कि जब आप 30 दिनों के लिए रोजा रखते हैं तो आपके शरीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। 

तकनीकी रूप से अंतिम बार भोजन करने के आठ घंटे या उसके भी कुछ समय बाद तक आपका शरीर उपवास की दशा में नहीं आता है। यह आपकी आंत के भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने का समय है।

इस अवधि के तुरंत बाद, हमारा शरीर लीवर में जमा ग्लूकोज और मांसपेशियों से ऊर्जा पाने लगता है। उपवास के दौरान या बाद में, ग्लूकोज के भंडार खत्म होने के बाद, शरीर के लिए ऊर्जा का अगला स्रोत वसा बन जाता है।
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फाइल फोटो
जब शरीर से वसा कम होना शुरू होता है, तो इससे वजन घटता है, कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटती है और यह डायबिटीज के जोखिम को भी कम करता है। हालांकि, ब्लड शुगर का स्तर कम होना कमजोरी और सुस्ती का कारण बन सकती है। आपको सिर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी और सांस की कमी जैसा भी अनुभव हो सकता है।

यह तब होता है जब आपकी भूख अपने सबसे तीव्र स्तर पर होती है। जैसे ही आपका शरीर रोजा का अभ्यस्त होने लगता है, वसा टूटने लगते हैं और यह ब्लड शुगर में बदल जाते हैं। 

रोजा के दौरान तरल पदार्थ नहीं लिया जाता है। लिहाजा शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए दो रोजों के बीच के वक्त में इस कमी को पूरा कर लिया जाना चाहिए नहीं तो पसीने की वजह से शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकता है। 

रमजान के आखिरी आधे हिस्से के दौरान, आपका शरीर उपवास प्रक्रिया के अनुरूप ढल जाता है। इस दौरान आपके मलाशय, लीवर, किडनी और त्वचा डीटॉक्सिफिकेशन के दौर से गुजरते हैं। 

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डॉ. महरूफ कहते हैं, स्वास्थ्य के मामले में इस चरण में शरीर के अंगों को कार्य करने की अधिकतम क्षमता पर लौट आना चाहिए। आपकी याददाश्त और एकाग्रता बढ़ सकती है और आपमें और अधिक एनर्जी आ सकती है। 

ऊर्जा के लिए आपके शरीर को प्रोटीन का रुख नहीं करना चाहिए। ये वो वक्त है जब वह भुखमरी के मोड़ में आने लगता है और ऊर्जा के लिए आपकी मांसपेशियों का इस्तेमाल करने लगता है। यह तब होता है जब आपका उपवास कई दिनों या हफ्तों तक चलता रहता है। 

चूंकि रमजान में रोजा केवल सुबह से शाम तक चलता है, इसलिए हमारे पास ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों और तरल पदार्थों से खुद को भरने का पर्याप्त अवसर होता है। यह मांसपेशियों को बरकरार रखता है लेकिन साथ ही वजन घटाने में भी मदद करता है। 

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डॉ. महरूफ कहते हैं, हां, लेकिन एक शर्त के साथ। उपवास हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है क्योंकि इससे हमें क्या और कब खाते हैं, इस पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। हालांकि, एक महीने का रोजा तो ठीक हो सकता है लेकिन इसे लंबी अवधि के लिए करते रहने की सलाह देना उचित नहीं है। 

लगातार उपवास रखना लंबे समय तक वजन घटाने के लिए अच्छा साधन नहीं है क्योंकि अंत में आपका शरीर वसा को ऊर्जा में बदलने के प्रक्रिया को रोक देगा और इसके बजाय उन्हें मांसपेशियों में बदल देगा। यह अस्वास्थ्यकर है और इसका मतलब है कि आपका शरीर अब 'भुखमरी मोड' में जा रहा है। 
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डॉ. महरूफ सलाह देते हैं कि रमजान के अलावा कुछ अवधि का उपवास या 5:2 डाइट (स्वस्थ खाने के दिनों के बीच, हफ्ते में कुछ दिनों के लिए उपवास) एक स्वस्थ विकल्प होगा।

वो कहते हैं, रमजान के दौरान सही तरीके से किया गया रोजा, आपको हर दिन अपने शरीर में ऊर्जा भरने की अनुमति देता है, जिसका मतलब यह हो सकता है कि आप अपने शरीर में महत्वपूर्ण मांसपेशियों को जलाए बिना अपना वजन कम कर सकते हैं।
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