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Paenting Tips: अब बच्चों को बार-बार डांटना नहीं पड़ेगा, अपनाएं FAFO पेरेंटिंग

Mon, 27 Oct 2025 12:45 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Parenting Tips: FAFO Parenting सिखाती है कि हर काम का एक परिणाम होता है, और उसे झेलकर ही समझ आती है। इस तरीके में प्यार भी है और अनुशासन भी। अगर सही संतुलन के साथ अपनाया जाए, तो यह बच्चों को आत्मनिर्भर और समझदार बना सकता है।
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parenting tips - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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Parenting Tips: आजकल सोशल मीडिया पर एक नया शब्द खूब चर्चा में है FAFO Parenting। नाम थोड़ा अजीब है, पर इसका मतलब बहुत ही दिलचस्प है। FAFO का मतलब है “Fool Around and Find Out”, यानी "गलती करो और खुद जानो कि उसका नतीजा क्या होता है"। यह तरीका बच्चों को डांटने या समझाने से ज्यादा, उन्हें उनके किए के परिणाम से सिखाने पर जोर देता है। FAFO पैरेंटिंग बच्चों को “गलती से सीखने” का मौका देती है। यह सिखाती है कि हर काम का एक परिणाम होता है, और उसे झेलकर ही समझ आती है। इस तरीके में प्यार भी है और अनुशासन भी। अगर सही संतुलन के साथ अपनाया जाए, तो यह बच्चों को आत्मनिर्भर और समझदार बना सकता है।

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FAFO Parenting कैसे काम करती है?

FAFO पैरेंटिंग में माता-पिता बच्चों को हर गलती पर रोकते नहीं हैं। बल्कि उन्हें थोड़ा आज़ाद छोड़ते हैं ताकि वे खुद अनुभव से सीख सकें। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा बार-बार कहता है कि उसे ठंड नहीं लग रही और स्वेटर नहीं पहनना चाहता, तो पैरेंट्स कहते हैं, "ठीक है, तुम खुद देख लो क्या होता है"। जब बच्चे को ठंड लगती है, तो वह खुद समझता है कि मम्मी-पापा की बात क्यों सही थी। यह तरीका बच्चों को जिम्मेदारी, समझदारी और फैसले लेने की क्षमता सिखाता है।


क्यों हो रहा है यह तरीका लोकप्रिय?

आज के माता-पिता बच्चों को बहुत समझदारी से पालना चाहते हैं, लेकिन हर बात पर समझाना, रोकना और सिखाना कभी-कभी बहुत थका देता है। ऐसे में FAFO पैरेंटिंग उन्हें एक बैलेंस्ड रास्ता देती है, जहां बच्चे को आज़ादी भी मिलती है और सिखावन भी। यह तरीका “गुस्सा या सजा” नहीं देता, बल्कि बच्चों को नेचुरल रिजल्ट से सिखाता है।

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FAFO Parenting फायदे और सावधानियां

फायदे:

  • बच्चे खुद से सीखते हैं, जिम्मेदार बनते हैं।

  • बार-बार डांटने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • बच्चों में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की समझ बढ़ती है।

सावधानियां:

  • छोटे बच्चों पर यह तरीका बहुत सख्ती से न अपनाएं।

  • बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि माता-पिता उसके साथ हैं, भले गलती हो गई हो।

  • बाद में बच्चे से बात करें कि उसने क्या सीखा।

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