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टीन-टर्निटी क्या है: मैटरनिटी लीव के बाद अब टीन-टर्निटी लीव की मांग, जानिए क्या है नया ट्रेंड

Sun, 20 Sep 2026 12:12 PM IST
Shruti Gaur लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

What is the 'Teen-Ternity' Trend: मैटरनिटी लीव के बाद अब ‘टीन-टर्निटी’ की बारी, किशोरावस्था में बच्चे को चाहिए आपका वक्त और साथ।
 
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टीन-टर्निटी क्या है? - फोटो : AI
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विस्तार
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What is the 'Teen-Ternity' Trend: मां बनने के बाद बच्चे के शुरुआती वर्षों में माता-पिता का उसके साथ रहना स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि 13-18 साल की उम्र में भी बच्चे को आपकी उतनी ही जरूरत होती है? दरअसल, किशोरावस्था में बच्चे का शरीर ही नहीं, उसका मन, सोच, रिश्ते और दुनिया को देखने का नजरिया भी तेजी से बदलता है। पढ़ाई और कॅरिअर का दबाव, दोस्ती, सोशल मीडिया और अपनी पहचान को लेकर उलझनें इस दौर को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। ऐसे में आज के कुछ माता-पिता अपने किशोर बच्चों के लिए काम की रफ्तार धीमी कर रहे हैं। नौकरी से ब्रेक या काम के घंटों में बदलाव कर रहे हैं, जिसे  कहा जा रहा है- ‘टीन-टर्निटी’।
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क्यों जरूरी आपकी मौजूदगी

पेरेंटिंग को अक्सर छोटे बच्चों की जरूरतों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन किशोरावस्था भी उतनी ही अहम होती है। इस उम्र में बच्चे धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से उन्हें माता-पिता के भरोसे और मार्गदर्शन की जरूरत बनी रहती है। शरीर में होने वाले बदलाव, पढ़ाई और कॅरिअर की चिंता, दोस्तों के साथ रिश्ते, सोशल मीडिया का प्रभाव और अपनी पहचान बनाने की कोशिश, ये सभी चीजें किशोर के मन पर असर डाल सकती हैं। कई बार बच्चा अपनी परेशानी सीधे शब्दों में नहीं कह पाता। उसके व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन, अचानक खुद को अलग कर लेना या बातचीत कम कर देना किसी अंदरूनी परेशानी का संकेत हो सकता है। यही वजह है कि इस उम्र में माता-पिता की सजग और संवेदनशील मौजूदगी महत्वपूर्ण हो जाती है।

‘टीन-टर्निटी’ का मतलब नौकरी छोड़ना नहीं

‘टीन-टर्निटी’ को सिर्फ नौकरी से लंबा ब्रेक लेने के तौर पर समझना सही नहीं होगा। इसका व्यापक अर्थ है- किशोर बच्चे की जरूरतों के अनुसार अपने समय और काम के तरीके में बदलाव करना। हर माता-पिता के लिए नौकरी छोड़ना या लंबे समय तक कॅरिअर से दूर रहना संभव नहीं है। ऐसे में काम के घंटे कम करना, कुछ दिनों के लिए वर्क फ्रॉम होम लेना, शिफ्ट में बदलाव करना या दिन में कुछ समय पूरी तरह बच्चे के लिए तय करना भी इसी सोच का हिस्सा हो सकता है। आखिर बच्चे के साथ बिताए गए घंटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उन पलों में माता-पिता वास्तव में उसके साथ मौजूद हैं या नहीं।
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डिजिटल दुनिया में ‘जासूसी’ नहीं, भरोसा

आज के किशोरों की जिंदगी मोबाइल और सोशल मीडिया से गहराई से जुड़ी है। इंटरनेट नए अवसरों के दरवाजे खोलता है, लेकिन ऑनलाइन बुलिंग और स्क्रीन की लत जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में जासूसी नहीं, भरोसा दिखाएं। टीन-टर्निटी माता-पिता और बच्चों के बीच खुला संवाद बढ़ाता है, डिजिटल सुरक्षा की समझ विकसित करता है और समय प्रबंधन व आत्म-नियंत्रण जैसे गुण सिखाने में मदद करता है। इससे बच्चे सुरक्षित और समझदारी से टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं।

कॅरिअर और परवरिश में संतुलन ऐसे बनाएं

किसी माता-पिता के लिए कॅरिअर की रफ्तार धीमी करना आसान फैसला नहीं होता। आर्थिक जिम्मेदारियां, पेशेवर लक्ष्य और व्यक्तिगत आकांक्षाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए ‘टीन-टर्निटी’ को हर परिवार के लिए एक तय फॉर्मूले के रूप में नहीं देखा जा सकता। किसी के लिए सप्ताह में एक दिन वर्क फ्रॉम होम पर्याप्त हो सकता है, तो कोई रोज शाम का एक घंटा बच्चे के लिए तय कर सकता है। कोई माता-पिता स्कूल की मीटिंग या बच्चे की किसी महत्वपूर्ण गतिविधि के लिए अपना शेड्यूल बदल सकता है। जरूरी यह है कि बच्चे को यह महसूस हो कि उसकी जिंदगी और उसकी बातें माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 आत्मविश्वास होगा मजबूत

डॉ. आरती आनंद (क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट) बताती हैं कि ‘टीन-टर्निटी’ में आपका कॅरिअर छोड़ना नहीं, बल्कि किशोर की जरूरतों के अनुसार अपनी उपस्थिति को प्राथमिकता देना है। माता-पिता को बच्चे को पर्याप्त समय, भावनात्मक उपलब्धता और स्वतंत्रता, तीनों का संतुलन देना चाहिए। बिना जजमेंट उसकी बात सुनें, समय दें और जरूरत से ज्यादा नियंत्रण से बचें। इससे बच्चे का आत्मविश्वास मजबूत होगा।
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