प्रतीकात्मक तस्वीर
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पिताजी के इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं था। दीदी और जीजाजी अलग से डांट रहे थे। बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, मानो मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म किया हो। जैसे कि किसी का खून। तीन दिन तक मेरे पिता जी ने मुझसे बात नहीं की और तीसरे दिन सीधे कहा, "तेरे लिए एक विधवा का रिश्ता है। उसका पांच साल का बेटा है लेकिन लड़की अच्छे घर से है।"
"लड़की के पिताजी को तेरी इन हरकतों के बारे में पता है, लेकिन वो शादी के लिए राजी है। बेटा, तेरी भी उम्र हो रही है। तू 31 साल का हो गया है। इस रिश्ते को हां कह दे।"
"अब तो तू कमाता भी अच्छा है। गृहस्थी बसा, हम भी खुश रहेंगे।"