फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

मैंने क्यों सेक्स-वर्करों के पास जाना शुरू किया?

Sat, 02 Nov 2019 10:17 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
1 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वो बहुत ही यादगार रात थी। 28 साल में मैंने पहली बार किसी महिला को स्पर्श किया था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि वो मेरी बीवी नहीं बल्कि एक सेक्स वर्कर थी। मेरी इच्छाएं पूरी हो रही थीं, इसलिए मैं खुश था। वो अनुभव एक सप्ताह तक मेरे जेहन में जीवित था। लग रहा था मानो मैं एक अलग ही दुनिया में हूं। और ऐसा होता भी क्यों न? मेरी शादी अब तक नहीं हो पाई है।

2 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
गुजरात के मेरे शहर में पुरुषों के मुकाबले औरतों की तादाद कम है। और इस खाई ने मेरे जैसे तमाम युवकों को शादी से महरूम रखा है। मेरे मां-बाप को बहुत कुछ सुनना पड़ता है। जैसे, अगर आपका बेटा सरकारी नौकरी कर रहा होता तो बात कुछ और थी। लेकिन निजी कंपनी की नौकरी का क्या भरोसा? और आपके पास ज्यादा जमीन भी तो नहीं है। उस समय मैं महीने में 8,000 रुपये कमाता था। मैं घर में बड़ा बेटा था और शादी कहीं भी तय नहीं हो पा रही थी। मुझे लगता था कि अगर कहीं भी रिश्ता हो जाता है तो समाज में इज्जत रह जाएगी।

3 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हद तो तब हो गई जब मेरे दोस्त नीरज (बदला हुआ नाम) की शादी हो गई, जबकि वह मुझसे कम पैसे कमाता था। शायद इसलिए कि नीरज के पिताजी 20 एकड़ जमीन के मालिक थे। हम चार दोस्त थे जो अक्सर शराब पीने के लिए पास के शहर जाया करते थे। शायद मेरे दोस्त को उस दिन मेरी परेशानी नजर आ गई थी। ग्लास में बीयर डालते हुए उसने कहा, "अबे इतना परेशान क्यूं होता है? चल मेरे साथ! तू अगर शादी कर भी लेगा तो भी इतना मजा नहीं आएगा। देख दुनिया कितनी रंगीन है। उसका मजा ले यार! तू चल मेरे साथ।"

4 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
मैं इस ख्याल से ही हैरान था। पर मेरा दोस्त मुझे मनाने में लगा था। आखिर हम एक होटल में चले ही गए। मैंने कई ब्लू फिल्में देखी थीं, पर असल जिंदगी में किसी औरत के साथ मैं पहली बार था। फिर क्या था, होटलों में जाना मेरी आदत बन गई। पांच साल तक ये सिलसिला जारी रहा। खुद को सुकून देने के लिए ये एक आसान रास्ता था। 

5 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लेकिन एक दिन मेरे इस राज की भनक मेरे पिताजी के कानों तक पहुंच गई। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हाथ तो उठा नहीं सकते थे, इसलिए चिल्लाकर खुद को शांत करने की कोशिश कर रहे थे। "तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुए? अपनी मां और बहन के बारे में तो एक बार सोचा होता। समाज में लोगों को वो क्या मुंह दिखाएंगी?"
विज्ञापन

6 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मां और दीदी अलग से रो रही थीं। दीदी के ससुराल वालों को भी ये बात मालूम पड़ गई थी। मैंने सफाई दी कि दोस्तों ने मुझे शराब पिला दी थी और होटल में ले गए थे। मैं नशे में था इसलिए पता नहीं क्या-क्या हो गया। फिर माफी मांगी कि गलती हो गई है। "तो फिर इतने सालों तक एक ही गलती क्यों दोहराता रहा?"

7 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पिताजी के इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं था। दीदी और जीजाजी अलग से डांट रहे थे। बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, मानो मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म किया हो। जैसे कि किसी का खून। तीन दिन तक मेरे पिता जी ने मुझसे बात नहीं की और तीसरे दिन सीधे कहा, "तेरे लिए एक विधवा का रिश्ता है। उसका पांच साल का बेटा है लेकिन लड़की अच्छे घर से है।"

"लड़की के पिताजी को तेरी इन हरकतों के बारे में पता है, लेकिन वो शादी के लिए राजी है। बेटा, तेरी भी उम्र हो रही है। तू 31 साल का हो गया है। इस रिश्ते को हां कह दे।"

"अब तो तू कमाता भी अच्छा है। गृहस्थी बसा, हम भी खुश रहेंगे।"

8 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : canva.com
लेकिन मुझे तो कोई और पसंद आ चुकी थी। वो महिला उस होटल में काम करती थी जहां मैं सेक्स वर्करों के लिए जाता था। वो काम तो हाउस-कीपिंग का करती थी। कम पैसे कमाती थी। लेकिन उसमें एक बात थी। वो मुस्कुराती थी तो बला की खूबसूरत लगती थी। लेकिन वो भी मेरी करतूतों से नाराज थी। उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया। जब उसने किसी और से शादी कर ली, तो मैं सदमे में चला गया।

मुझे अधूरापन महसूस होने लगा था। ये अधूरापन था किसी के साथ का। जो मेरी भावनाओं को समझे और जीवनभर मेरे साथ रहे। शादीशुदा जीवन की कमी अब खलने लगी थी। परिवारवालों को भी समाज में घुलने-मिलने में काफी परेशानी हो रही थी। इसलिए मैंने घर छोड़ दिया। पर दो हफ्ते बाद ही मां-बाप के बुलाने पर मैं वापस लौट आया। मेरी शादी को लेकर सवाल जस के तस थे और परिवार उनसे परेशान रह रहा था। समाज है ही ऐसा। उसे उन्हीं सवालों में ज्यादा मजा आता है जो सबसे ज्यादा दुख देते हैं। इस बार मैंने घर हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला कर लिया।
विज्ञापन

9 of 9
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
नया शहर, नए लोग पर मेरी आदतें पुरानी रहीं। कभी पड़ोस में रहने वाली औरत तो कभी पास के शहरों में जाकर दिल बहलाया। कई बार तो मेरे बॉस भी साथ आते थे। उन्हें मुझ पर काफी भरोसा था। आज मैं 39 साल का हो चुका हूं लेकिन अकेला महसूस नहीं करता। शादी के जो सपने संजोए थे, वो बीवी के साथ ना सही, बाकी औरतों के साथ पूरे हो चुके हैं। सब चलता है, ज़िंदगी है। अब तो परिवारवालों ने भी समझौता कर लिया है। और छोटे भाई ने एक आदिवासी महिला के साथ प्रेम-विवाह कर लिया है।

मैं अब आजाद परिंदा हूं।
Next
AU ऐप में पढ़ें