आज के दौर में जहां बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और बिजनेस जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं, वहां उनकी सफलता के पीछे परिवार, खासकर पिता की भूमिका भी बेहद अहम होती है। कई बार पिता का सिर्फ यह कहना कि "तुम कर सकती हो" किसी भी प्रेरणादायक भाषण से कहीं ज्यादा असर छोड़ता है। हर बेटी अपने पिता से महंगे उपहार या बड़ी सुविधाएं नहीं चाहती, बल्कि वह चाहती है कि उसकी बात सुनी जाए, उसके फैसलों का सम्मान किया जाए और जरूरत पड़ने पर पिता उसके साथ मजबूती से खड़े रहें। यही रिश्ता बेटियों को जीवन की हर चुनौती का सामना करने का साहस देता है।
जब पिता भरोसा करते हैं, बेटियां खुलकर सपने देखती हैं
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की टेक और एआई कंटेंट क्रिएटर यामिनी गौड़ मानती हैं कि बेटियों के लिए सबसे बड़ी ताकत पिता का विश्वास होता है। वह बताती हैं कि समाज ने कई बार उनके परिवार को यह महसूस कराने की कोशिश की कि बेटियां वंश आगे नहीं बढ़ातीं, लेकिन उनके पिता ने कभी ऐसी सोच को महत्व नहीं दिया।
यामिनी के अनुसार, उनके पिता ने उन्हें और उनकी बहन को हमेशा अपने फैसले लेने की आजादी दी और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। शादी के बाद भी उनकी बड़ी बहन से उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हर हाल में समझौता करना है। उन्होंने हमेशा कहा कि अगर कभी लगे कि परिस्थितियां असहनीय हैं, तो मायके का दरवाजा हमेशा खुला है। यामिनी मानती हैं कि जब पिता भरोसा देते हैं, तब बेटियां जीवन के हर फैसले में अधिक आत्मविश्वास महसूस करती हैं।
सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, भावनात्मक साथ भी जरूरी है
हरियाणा के हिसार की रहने वाली सिमरन आज माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक टेक कंपनी में कार्यरत हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके पिता राजेश कुमार का वर्षों का संघर्ष और विश्वास है।
राजेश कुमार गांव-गांव जाकर कबाड़ के बदले बर्तन बेचते थे, लेकिन सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कभी समझौता नहीं किया। सिमरन ने आईआईटी मंडी से पढ़ाई की और कैंपस प्लेसमेंट के जरिए माइक्रोसॉफ्ट तक का सफर तय किया।
सिमरन कहती हैं कि पिता ने उन्हें केवल पढ़ाया ही नहीं, बल्कि हर कठिन परिस्थिति में यह विश्वास भी दिलाया कि मेहनत से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उनके अनुसार, बेटियों को सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की होती है कि उनके माता-पिता उनके सपनों पर भरोसा करें।
सपनों की उड़ान में पिता बन सकते हैं सबसे बड़े कोच
चंडीगढ़ की जानवी जिंदल, जिन्होंने फ्रीस्टाइल स्केटिंग में 11 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं, अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने पिता को देती हैं।
जानवी बताती हैं कि उनके पास शुरुआती दौर में न कोई बड़ा कोच था और न ही अत्याधुनिक सुविधाएं। उन्होंने और उनके पिता ने इंटरनेट पर वीडियो देखकर नई तकनीकें सीखीं और घंटों अभ्यास किया। नौकरी के बाद भी उनके पिता हर दिन समय निकालकर उनकी तैयारी में साथ देते थे।
जानवी का मानना है कि हर पिता को अपनी बेटी के सपनों को गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार केवल साथ, प्रोत्साहन और विश्वास ही किसी बच्चे को असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचा सकता है।