2012 में अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के शोध के मुताबिक लड़कों में यौवनावस्था की उम्र पिछले रिसर्च के मुकाबले छह महीने से दो साल पहले हो गई है। ये शोध अमरीका में 4100 लड़कों पर किया गया था। अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट ने ऐसा ही शोध 2010 में लड़कियों पर किया था। उनके शोध के मुताबिक अमरीका में लड़कियां 7 साल की उम्र में 'सेक्शुअली मेच्योर' हो रही हैं। ये शोध 1200 लड़कियों पर किया गया।
'सेक्शुअल मेच्योरिटी' का उम्र पर असर
क्या सेक्शुअल मेच्योरिटी की घटती उम्र के साथ बच्चों का दिमाग उतना परिपक्व हो पाता है कि वो उस अहसास को अपनी उम्र के साथ जोड़ पाएं? रिसर्च में पाया गया है कि बच्चों के साथ ऐसा नहीं हो पा रहा है। जो बच्चों में हड़बड़ाहट की असल वजह बन रही है। सेक्शुअल मच्योरिटी की घटती उम्र की दूसरी वजह बताते हुए डॉ त्रिपाठी कहते हैं सेक्स के बारे में अधपकी जानकारी वाली सामग्री का आसानी से उपलब्ध होना।ये जानकारी इंटरनेट, मीडिया, टीवी और फोन के माध्यम से हर बच्चे के पास आसानी से उपलब्ध है लेकिन दिक्कत ये है कि इस तरह की जानकारी अपने आप में अधूरी होती है।
सवालों का जवाब दें
किशोरावस्था में सेक्शुअल फीलिंग आना स्वाभाविक है। इसे रोका नहीं जा सकता और न ही रोकना चाहिए लेकिन उसे सही तरीके से चैनलाइज करना जरूरी है।सेक्सोलॉजिस्ट डॉ प्रकाश कोठारी कहते हैं कि बच्चे को ये बताना चाहिए कि सेक्शुअल फीलिंग को शेयर करने का सही तरीका क्या है।अगर बच्चा आपके पास आए और पूछे कि रेप क्या है? अक्सर मां-बाप बच्चे के सवाल को खारिज कर देते हैं और उसे जवाब नहीं देते, दरअसल गलती यही है।
...तो इस वजह से 'एडल्ट' चीजें देखने को मजबूर हैं बच्चे
डॉक्टर कोठारी के मुताबिक ऐसे सवाल जब बच्चे करें तो हमें बच्चे को बिठाकर उसे समझाने की जरूरत है कि रेप वो स्थिति है जिसमें लड़की की मर्जी के बिना उससे यौन संबंध स्थापित किया जाता है। ये गलत बात होती है और ऐसा करने पर जेल भी हो सकती है। ऐसा करने वाले गलत लोग होते हैं। आपकी भी जिंदगी खराब हो जाती है। अगर इतने विस्तार से और गंभीरता से आप इस बात को नहीं समझाते तो बच्चे स्कूल में अपने सीनियर्स से और यू-ट्यूब से इस बारे में गलत और आधी-अधूरी जानकारी जुटा लेते हैं। दरअसल, बच्चे को ये बताना होता है कि क्या सही है क्या गलत है।
बच्चे का यौन शोषण हो रहा है, कैसे पता करें?
सेक्स के बारे में बच्चों को बताएं डॉ कोठारी कहते हैं, हर उम्र के बच्चे को समझाने के लिए अलग तरीका होता है। उनके मुताबिक, "11- 12 साल के बच्चे को सेक्स बताना हो तो आप उसे समझा सकते हैं ये बच्चे पैदा करने का तरीका है।"8-10 साल के बच्चों को समझाना हो तो आप उसे "फिजिकल मेनेफेस्टेशन ऑफ लव कह" कर समझा सकते हैं।डॉ त्रिपाठी कहते हैं, "अगर स्कूल का छात्र टीचर को सेक्स और कैंडल लाइट के लिए ईमेल में ऑफर भेजता है तो जरूरत है कि टीचर उसे बुलाकर इस बारे में बात करे।"
कितनी जरुरी है स्कूलों में यौन शिक्षा?
बहुत मुमकिन है कि छात्र को पता ही न हो कि टीचर को सेक्स के लिए ऑफर देने में कोई बुराई नहीं है।सबसे पहले छात्र को ये बताना जरूरी है कि ऐसा करना गलत है। ऐसा करने पर हम सेक्स को बुरा कहकर लेबल कर सकते हैं।उसके बाद भी न मानें तो सजा का तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है।