कहा जाता है कि चुंबन आदम सभ्यता से ही इंसानी जज्बातों, लगाव और भावनाओं के संप्रेषण का सबसे बेहतरीन जरिया है। यह मनुष्य के बीच के संबंध को और ज्यादा मजबूत करता है। घरों में भी बड़े-बुजुर्ग जब लंबे अर्से बाद किसी अजीज, प्रिय और दिल के करीब व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे प्यार से चुंबन देते हैं। गले मिलते हैं। ऐसा करके वह अपने दिल की भावनाओं और प्रेम को व्यक्त करते हैं। विज्ञान चुंबन के कई स्वास्थ्य लाभ बताता है।
साल 2009 में वेस्टर्न जनरल ऑफ कम्युनिकेशन में छपी स्नेह विनिमय सिद्धांत में कहा गया है कि चुंबन से अवसाद दूर होता है। चुंबन से मानव शरीर के फील गुड हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। फील गुड हार्मोन के सक्रिय होने से इंसान का अवसाद दूर होता है और वह खुश रहता है। चुंबन से न्यूरोट्रांसमीटर ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है जिसे लव हार्मोंस भी कहा जाता है। यह मां-बच्चे और पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका के बीच के संबंध को मजबूत करता है। चुंबन हमारे मूड को नियंत्रित रखने के लिए ऐसे डोपामाइन रिलिज करता है स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। दिमाग के स्वास्थ्य और इंसानी व्यवहार में सुधार के लिए भी बोसा योगदान देता है।
मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने चुंबन पर शेर लिखा है-
बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहजा निगाह
जी में कहते हैं कि मुफ्त आए तो माल अच्छा है
अवसाद के दूर होने से हमारा लोअर कोलेस्ट्रोल स्तर भी कम रहता है। साल 2014 में हुए एक शोध में बताया गया है कि चुंबन से हमारे शरीर में बैक्टिरिया का आदान-प्रदान होता है। यह या तो आपको बीमार कर सकता है या फिर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है।