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बच्चे की हर गलती पर उसे डांटना कितना सही? जानें लगातार डांटने से पड़ने वाले ये 4 असर

Sun, 27 Sep 2026 11:56 AM IST
Shruti Gaur लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Major Effects of Scolding Kids: हम सभी को ये समझने की जरूरत है कि बच्चों को बार-बार डांटने से उनके आत्मविश्वास, व्यवहार और भावनात्मक विकास पर असर पड़ सकता है। अनुशासन के लिए डांट के बजाय प्यार, धैर्य और संवाद जरूरी है।
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बच्चे की हर गलती पर उसे डांटना कितना सही? - फोटो : AI
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विस्तार
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Major Effects of Scolding Kids: क्या आप अपने बच्चे को बात-बात पर डांटने लगी हैं? बच्चों की गलतियों पर उन्हें समझाना और सही रास्ता दिखाना परवरिश का जरूरी हिस्सा है, लेकिन क्या हर छोटी-बड़ी गलती पर डांटना सही परवरिश का तरीका है? आप जैसे कई माता-पिता बच्चों को अनुशासित रखने के लिए बार-बार डांटते हैं और इसे उनकी भलाई से जोड़कर देखते हैं। मगर विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार डांट-फटकार बच्चे के व्यवहार और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इस बार-बार की डांट का बच्चे पर गहरा असर होता है, इसे आपको जरूर जानना चाहिए।
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आत्मविश्वास में आती है कमी

जब बच्चे को हर छोटी-बड़ी बात पर डांट सुननी पड़ती है, तो उसके मन में धीरे-धीरे यह धारणा बन जाती है कि वह कुछ भी ठीक से नहीं कर सकता। इस कारण वह खुद को अयोग्य समझने लगता है, जिसका सीधा असर उसके आत्मविश्वास पर पड़ता है। लगातार ऐसा व्यवहार झेलने वाले बच्चे नए काम या चुनौतियों को आजमाने से डरने लगते हैं। उन्हें असफल होने से ज्यादा इस बात का डर सताता है कि गलती होने पर उन्हें फिर डांट सुननी पड़ेगी। ऐसे में माता-पिता होने के नाते आपके लिए बच्चे की गलती बताने के साथ उसकी कोशिशों की सराहना करना भी जरूरी है।

बढ़ सकता है तनाव

लगातार डांट सुनने वाले बच्चे के मन में एक तरह का डर बैठ जाता है। उसे हर समय यह चिंता रहती है कि कहीं उससे कोई गलती न हो जाए। यही डर धीरे-धीरे तनाव का रूप ले लेता है, जिसका असर बच्चे के व्यवहार में भी दिखाई देने लगता है। वह चिड़चिड़ा, सहमा हुआ या जरूरत से ज्यादा शांत रहने लगता है, जो कि उसके विकास में बाधक बन सकता है।
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बढ़ जाएंगी भावनात्मक दूरी

अगर बच्चा आपसे अपनी बातें साझा करने से बचने लगा है, तो लगातार डांट-फटकार भी इसकी एक वजह हो सकती है। जब बच्चे को बार-बार यह महसूस होता है कि उसकी बात समझने के बजाय केवल उसकी गलतियां देखी जाती हैं, तो वह धीरे-धीरे अपने मन की बातें बताना बंद कर सकता है। इससे माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसा कमजोर हो सकता है। बच्चे को यह भरोसा होना चाहिए कि गलती होने पर भी वह अपने माता-पिता से बात कर सकता है।

व्यवहार हो सकता है आक्रामक

जानकार बताते हैं कि बच्चे अपने आस-पास के लोगों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर में समस्याओं का समाधान अक्सर गुस्से, ऊंची आवाज या डांट से किया जाता है, तो बच्चा भी इसी व्यवहार को सामान्य मान लेता है। बाद में वह अपनी नाराजगी दोस्तों, भाई-बहनों या दूसरे बच्चों के सामने गुस्से और कठोर व्यवहार के रूप में दिखाता है। इसलिए अनुशासन सिखाते समय माता-पिता का अपना व्यवहार भी महत्वपूर्ण होता है।

डांट नहीं, समझाने की कोशिश करें

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को अनुशासन सिखाना जरूरी है, लेकिन हर गलती पर डांटना इसका सही तरीका नहीं है। बच्चे की गलती पर शांत रहकर उसे समझाएं, उसके व्यवहार के परिणाम बताएं और सही विकल्प दिखाएं। प्यार, धैर्य और खुला संवाद बच्चे को बेहतर व्यवहार सीखने में मदद करता है। साथ ही साथ इससे वह आत्मविश्वास और माता-पिता के साथ रिश्ते को भी मजबूत बना पाता है।
 
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