मेरी शादी के 10 साल हो चुके हैं। इन 10 सालों में मेरे और मेरे पति के बीच सिर्फ एक बार जिस्मानी रिश्ता बना, हमारे हनीमून पर। उस वक्त मुझे उसका बर्ताव सहज महसूस नहीं हुआ। दरअसल, उसे मुझसे शादी करनी ही नहीं थी। अपने मां-बाप के दबाव में आकर उसने मुझसे शादी की थी। अपनी मां के कहने पर ही वो एक बार मेरे करीब आया था। वो भी सिर्फ अपनी मर्दानगी साबित करने के लिए। मुझे यह बताने के लिए कि वो नामर्द या नपुंसक नहीं है।
हनीमून की उस रात के बाद से आज तक हमारा रिश्ता सामान्य नहीं हो पाया। मैंने कभी खुद से पहल करने की कोशिश की भी, तो उसने यह कहकर मेरी फीलिंग्स का अपमान किया कि मुझे सेक्स के सिवाय कुछ और सूझता ही नहीं। इन सबका असर मेरे स्वास्थ पर भी हुआ। कम उम्र में ही मैं डिप्रेशन और तमाम दूसरी बीमारियों की शिकार हो गई।
इसके बाद भी मैंने हालात से समझौता करने की कोशिश की। सोचा कि पति-पत्नी न सही, हम अच्छे दोस्तों की तरह तो रह सकते थे। मैं नहीं चाहती थी कि हमारे बुरे रिश्ते का असर मेरी बेटी पर पड़े, लेकिन उसे ये भी मंजूर नहीं। न वह मुझे तलाकक देता है और न ही अपना बर्ताव सुधारता है।
बेटी अब बड़ी हो रही है। उसे भी अपने पापा का प्यार उनके 'मूड' के मुताबिक ही मिलता है। मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही हूं क्योंकि मेरे पास न तो मायके का सपोर्ट है और न ससुराल वालों का। कई बार अकेले रहने का ख्याल मन में आया, लेकिन डरती हूं कि अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरी बेटी को कौन संभालेगा?