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खुद को तुर्रमखां समझने वालों से कैसे निपटें?

Sat, 23 Apr 2016 04:28 PM IST
बीबीसी/ मारिया अतानासोव
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- फोटो : getty images
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ऑफिस में कई लोग आपको हौसले से लबरेज, जिंदादिल और कई बार नटखट दिखते होंगे। असल में ये लोग आत्मविश्वास से भरे लोग हैं। उन्हें लगता है कि हर काम वे चुटकी बजाते ही कर लेंगे।
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मगर कई बार ये आत्मविश्वास घमंड में बदल जाता है। घमंड इस बात का कि मुझे तो सब आता है। गुरूर इस बात का कि मेरे पास हर मुश्किल का हल है। अहंकार इसलिए कि हर आदमी मुझसे ही मदद मांगता है।

आत्मविश्वास और घमंड में ज्यादा फर्क नहीं होता। और जैसे ही कोई व्यक्ति घमंड दिखाना शुरू करता है , दफ्तर में लोग उससे कन्नी काटने लगते हैं। कोई भी घमंडी इंसान के साथ काम नहीं करना चाहता।
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आख़िर ऐसे लोगों से कैसे निपटा जाए? हमने सवाल-जवाब वाली वेबसाइट क्वोरा के सदस्यों से जवाब जानने की कोशिश की।

क्वोरा की सदस्य एंजी नीक कहती हैं कि जैसे लोगों को सांस लेने के लिए हवा की जरूरत होती है, वैसे ही घमंडी इंसान तवज्जो चाहता है। उन्हें हर वक़्त खुद की तारीफ सुनना पसंद होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते तो, या तो आप उनसे दूर हो जाइए, या फिर बहस में घंटों का वक्त गंवाइए। क्योंकि वो बात नहीं करते, हमेशा बहस करते हैं।

सुरेटा विलियम्स का कहना है कि जो वाकई महान होते हैं, उन्हें दूसरों पर रोब गांठने की जरूरत नहीं होती। घमंडियों के बारे में एना बटलर के ख्याल अलग हैं। उनका मानना है कि घमंडी अकसर बेहद काबिल इंसान होते हैं। वे होशियार और कामयाब होते हैं। उन्हें ये भी लगता है कि अपनी लगन, मेहनत और होशियारी से यदि वो इस मुकाम पर आ पहुंचे हैं तो दूसरे ऐसा क्यों नहीं कर सकते।

खुद को तुर्रमखां समझने वालों से कैसे निपटें?

- फोटो : getty images
इयान विदरो कहते हैं कि ऐसे लोगों को वहम होता है कि वो बहुत होशियार और कामयाब हैं। ऐसे लोगों से रिश्ता बनाने के लिए जरूरी है कि आप या तो उन्हें मूर्ख बनाएं, या उनकी तारीफ करें या फिर खुलकर बहस करें। दोनों ही बातों के लिए जरूरी है कि पहले आप घमंडी इंसान के गुरूर की वजह समझें।

जिल उचियामा मानती हैं कि घमंड अक्सर किसी विषय के बारे में आपकी आर या पार की राय से आता है। जब आप बीच का रास्ता नहीं जानते, तो आपको लगता है कि 'माइ वे ऑर हाइवे'। मतलब या तो आप सामने वाले की राय मानते हैं या विरोध करते हैं। बीच का कोई नहीं होता। ये बात कई लोगों की शख्सियत में दिखाई देती है, खास तौर से युवाओं के। युवाओं को तो लगता है कि उन्हें ही हर बात की सही जानकारी है।

घमंड करने वालों में समझ और गहराई की कमी होती है। ये कुछ ऐसा है मानों किसी के आंखों पर पट्टी बंधी है, कान में हेडफोन लगा है और ऐसे व्यक्ति को आप कुछ समझाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आपको तो खीझ होगी ना। क्योंकि सामने वाला तो न कुछ देखेगा और न ही सुनेगा।

जिल उचियामा के पास ऐसे लोगों से निपटने के लिए तीन नुस्खे हैं। पहला यह कि आप ऐसे घमंडी इंसान से थोड़ी दूरी बना लीजिए। उसकी बातों को अनदेख़ा कीजिए और चुप रहकर अपना विरोध जताइए।
दूसरा तरीक़ा यह है कि उसकी बात सुनिए और कहिए कि, ठीक है। फिर मुस्कुराते हुए उससे दूर हट जाइए। इससे दोनों के बीच तनाव भी कम होगा।

तीसरा और आखिरी तरीका यह है कि आप उसका मजाक बनाइए। व्यंग में कहिए कि, मुझे पता है कि आप सब जानते हैं। फिर भी चलिए खरी-खरी बात कर ली जाए। कई मामलों में तो घमंडी लोगों को एहसास ही नहीं होता कि उनकी बातों का दूसरों पर कितना बुरा असर पड़ता है।

अंकिता बताती हैं कि ऐसे जाहिलों और घमंडी लोगों से खरी बात की जानी चाहिए। आप उनके बारे में जो भी सोचते हैं, उन्हें खुलकर बताइए। कोई अच्छी चीज है तो उसकी तारीफ कीजिए। और कमी के बारे में बताते हुए ये सुझाव दीजिए कि इसमें सुधार की जरूरत है। उन्हें ये भी कहिए कि कोई बात बोलने से पहले जरा सोच-समझ लिया करें।
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खुद को तुर्रमखां समझने वालों से कैसे निपटें?

- फोटो : getty images
अगर आपकी सलाह के बावजूद कोई इंसान अपना बर्ताव नहीं बदलता, तो आपको भी डटकर मुक़ाबला करना चाहिए। बटलर कहते हैं कि आप ऐसे लोगों का विरोध पुख्ता तर्क और तथ्यों के साथ कीजिए। वरना मात भी मिल सकती है। बटलर ने बताया कि उन्होंने कई घमंडी बॉस के साथ काम किया। उनमें से ज्यादातर बटलर के विरोध का सम्मान करते थे। खास तौर से उन लोगों से ज्यादा जो उनकी चापलूसी में लगे रहते थे।

आकांक्षा जोशी की सलाह है कि अगर किसी घमंडी से निपटने में सब फॉर्मूले फेल हो जाएं तो उनकी बातों को हंसी में टाल दीजिए। वे कहती हैं कि उन्हें घमंडी लोगों को देखकर हंसी आती है, जैसे वे किसी कार्टून का किरदार हों। आकांक्षा कहती हैं कि अपने बड़बोलेपन से ऐसे लोग अपनी कमी खुद ही उजागर कर देते हैं।

उन्होंने अपने ही दफ्तर में काम करने वाले एक शख्स के बारे में बताया। आकांक्षा के मुताबिक़ वो खुद को बड़ा अंग्रेजीदां समझता था। अंग्रेजी के मुश्किल लफ्जों का इस्तेमाल करके वह सब पर रोब झाड़ता था। दूसरों के अंग्रेजी बोलने के लहजे का मजाक उड़ाता था। एक दिन उसने एक साधारण सी बात को इतना घुमा-फिराकर कहा कि सब लोग एक साथ हंस पड़े। आकांक्षा कहती हैं कि उसके बाद उस शख्स का हौव्वा उनके जेहन से उतर गया।
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