ऑफिस में कई लोग आपको हौसले से लबरेज, जिंदादिल और कई बार नटखट दिखते होंगे। असल में ये लोग आत्मविश्वास से भरे लोग हैं। उन्हें लगता है कि हर काम वे चुटकी बजाते ही कर लेंगे।
मगर कई बार ये आत्मविश्वास घमंड में बदल जाता है। घमंड इस बात का कि मुझे तो सब आता है। गुरूर इस बात का कि मेरे पास हर मुश्किल का हल है। अहंकार इसलिए कि हर आदमी मुझसे ही मदद मांगता है।
आत्मविश्वास और घमंड में ज्यादा फर्क नहीं होता। और जैसे ही कोई व्यक्ति घमंड दिखाना शुरू करता है , दफ्तर में लोग उससे कन्नी काटने लगते हैं। कोई भी घमंडी इंसान के साथ काम नहीं करना चाहता।
आख़िर ऐसे लोगों से कैसे निपटा जाए? हमने सवाल-जवाब वाली वेबसाइट क्वोरा के सदस्यों से जवाब जानने की कोशिश की।
क्वोरा की सदस्य एंजी नीक कहती हैं कि जैसे लोगों को सांस लेने के लिए हवा की जरूरत होती है, वैसे ही घमंडी इंसान तवज्जो चाहता है। उन्हें हर वक़्त खुद की तारीफ सुनना पसंद होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते तो, या तो आप उनसे दूर हो जाइए, या फिर बहस में घंटों का वक्त गंवाइए। क्योंकि वो बात नहीं करते, हमेशा बहस करते हैं।
सुरेटा विलियम्स का कहना है कि जो वाकई महान होते हैं, उन्हें दूसरों पर रोब गांठने की जरूरत नहीं होती। घमंडियों के बारे में एना बटलर के ख्याल अलग हैं। उनका मानना है कि घमंडी अकसर बेहद काबिल इंसान होते हैं। वे होशियार और कामयाब होते हैं। उन्हें ये भी लगता है कि अपनी लगन, मेहनत और होशियारी से यदि वो इस मुकाम पर आ पहुंचे हैं तो दूसरे ऐसा क्यों नहीं कर सकते।