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शादी के बाद रिश्ते में खोए हुए प्यार को वापस यूं पाएं

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अभिनव और रूही की शादी को दो साल हो गए हैं और शायद हनीमून का दौर अब ख़त्म हो गया है। ज़िंदगी मशीनी से बन के रह गयी है। न रोमांस और न सेक्स के लिए वो इच्छा।
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प्यार तो है, लेकिन दीवानगी ख़त्म हो गयी है। आइये देखते हैं इस युगल ने उस बुझी हुई चिंगारी को कैसे फिर से आग दी।

अभिनव गुडगाँव में कार्यरत 28 साल का ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर है।  

रूही और मेरी शादी को दो साल हुए हैं। हम मिले, प्यार हुआ और तीन साल रिश्ता रहने के बाद हमने हमेशा के लिए एक डोर में बंधने का फैसला किया। हम इस बात को लेकर बहुत उत्साहित थे की अंततः हम एक साथ बिना किसी सामाजिक रोकटोक के रह सकेंगे। लेकिन दो साल में ही सारा उत्साह ठंडा पड़ गया। सुबह 9 से रात के 9 तक नौकरी, सप्ताह के अंत की छुट्टियां घर का सामन खरीदने में गुजरने लगी।

धीरे-धीरे आपस की बातचीत भी कम होने लगी, ज़रूरी बातों को छोड़कर। बिना प्लान बनाये सेक्स करना भी बंद हो गया। बिना वजह के चुम्बन, साथ में टीवी देखना सब कुछ अचानक पुरानी बातें हो गयी। हर समय या तो हम में से एक थका हुआ होता था, या अगले दिन ऑफिस में कोई ज़रूरी मीटिंग होती थी। वजह कोई भी हो, दूरियां बढ़ती जा रही थी।
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एक बार फिर से वो पुराना पागलपन...

खुशनुमा ज़िन्दगी यूं आएगी वापस

एक दिन बहुत ही मुश्किल दिन के बाद जब मैं घर पहुंचा तो रूही पहले से सो चुकी थी और फ्रिज पर एक नोट चिपका हुआ था की खाना फ्रिज के अंदर रखा है। मैंने अकेले अपना खाना खाया और मुझे लगा की वो सब उत्साह और खुशियां कहाँ खो गयी हैं? मैं इस थकी हुई, उदास और एक ही ढर्रे की ज़िन्दगी से उक्ता चुका था। उसी पल मैंने आपकी खोयी हुई खुशनुमा ज़िन्दगी को फिर से वापस लेने का निर्णय किया!

अगले दिन मैं काम से जल्दी घर लौट आया और मैंने हम दोनों के लिए खाना बनाया। जब मैं टेबल पर खाना लगा ही रहा था और रूही घर लौट आई। उसे समझने में कुछ पल लगे की ये सब क्या चल रहा था। लेकिन जब उसे समझ आया तो मुझे उसके चेहरे पर वही खोयी हुई सुन्दर मुस्कान नज़र आई।
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'रिफ्रेश' बटन

डिनर के दौरान मैंने प्यार से रूही का हाथ पकड़ उससे वो सब कहाँ जो न जाने कब से नहीं कह सका था। मैंने उसे बताया की मैं उस पहले प्यार के जादुई एहसास को इतनी आसानी से खो नहीं देना चाहता। शुरू में उसे लगा जैसे मैं इस सब के लिए शायद उसे जिम्मेदार ठहरा रहा हूँ, लेकिन मैंने उसे भरोसा दिलाया की गलती हम दोनों की थी, इसलिए कोशिश भी हम दोनों को करनी होगी।

हमने महसूस किया कि हम सेक्स को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते और इस बारे में हमें कुछ कोशिश करनी चाहिए। हमने ये भी मन कि काम ज़रूरी है लेकिन उसे इतना ज़रूरी नहीं बनाना कि वो हमारी ज़िन्दगी पर ग्रहण लगा दे। हमने साथ में वो सब करने के लिए समय निकलने का वादा किया जो हम करना चाहते थेय जैसे स्पा, जिम, और एक अच्छी हॉलिडे।

जब हमने अपने इस नए रूटीन को जीवन में ढला तो हमने पाया कि ज़िन्दगी फिर से खुशनुमा बनने लगी। अपना पुराना वक़्त फिर से लौट आया। सेक्स अब रूटीन नहीं बल्कि उत्साहित करने वाला एहसास बन गया। और देखते ही देखते प्यार का वो पागलपन फिर से लौट आया।

क्या अपने भी अपने रिश्ते में नीरसता का अनुभव किया है? अपने इसे बदलने के लिए क्या कदम उठाये?
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